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विशेषज्ञ से जानें: कोरोना वैक्सीन की दूसरी खुराक बूस्टर है तो आखिर पहली डोज का क्या काम है?

Thu, 15 Apr 2021 01:24 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : Pixabay
देश में कोरोना के मामले लगातार तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटों में देशभर में कोरोना संक्रमण के दो लाख से अधिक नए मामले दर्ज किए गए, जो कि एक नया रिकार्ड है। यह पहली बार है जब भारत में एक ही दिन में इतने अधिक नए मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि इस बीच टीकाकरण अभियान में भी तेजी आई है। पिछले 24 घंटों में लोगों को टीके की 33 लाख से अधिक खुराक दी गई हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अब तक देशभर में 11 करोड़ 44 लाख से अधिक कोरोना टीके लगाए जा चुके हैं। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना और वैक्सीन से जुड़े कुछ सवालों के जवाब...
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
देश की तीसरी वैक्सीन यानी स्पूतनिक-वी कितनी कारगर है? 
  • दिल्ली स्थित आरएमएल अस्पताल के डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'स्पूतनिक-वी रूस की वैक्सीन है। वहां जो ट्रायल हुए हैं, उसमें इसे करीब 90 प्रतिशत प्रभावी बताया गया है। भारत के विशेषज्ञ समूह ने भी इसे सुरक्षित और प्रभावी माना है, इसलिए इसकी आपातकालीन अनुमति दी है। हालांकि, अभी भारत में कुछ लोगों पर एक हफ्ते के लिए ट्रायल किया जाएगा और उसकी प्रभाविता का पता चलेगा। उसके बाद भारत में डॉ. रेड्डी की लेबोरेटरी के साथ समझौता हुआ है, जिसमें पहले तो रूस से वैक्सीन आएगी, उसके बाद भारत में भी वैक्सीन का उत्पादन किया जाएगा।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कुछ लोगों में भ्रम है कि कोविड-19 हो चुका है तो वैक्सीन क्यों लगवाएं? 
  • डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'कई कोविड मरीज जो खुद से रिकवर करते हैं तो उनमें एंटीबॉडी बन जाती हैं, लेकिन जरूरी नहीं है कि सभी में एंटीबॉडी बनी हो या हो सकता है उनकी एंटीबॉडी ज्यादा दिन तक न रहे। ऐसे में वैक्सीन सभी लोगों के लिए जरूरी है। अगर किसी में एंटीबॉडी पहले से है तो हो सकता है पहली डोज ही बूस्टर डोज का काम करने लगे। ऐसे में दूसरी डोज के बाद व्यक्ति का शरीर लंबे समय तक वायरस से लड़ने की क्षमता रखेगा।' 

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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन की दूसरी डोज बूस्टर है तो पहली डोज का क्या काम है? 
  • डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'अभी हमारे देश में दो वैक्सीन लग रही हैं, कोवैक्सीन और कोविशील्ड। कोवैक्सीन की पहली डोज के 4-6 हफ्ते के बाद दूसरी डोज दी जाती है। वहीं, कोविशील्ड की दूसरी डोज 6-8 हफ्ते के बाद दी जाती है। वैक्सीन एक तरह से वायरस का पार्ट होती है और एंटीजन का काम करती है, जब पहली डोज लगती है तो शरीर के प्रतिरोधक सेल्स को एक्टिवेट करते हैं। लेकिन वे इतनी एक्टिवेट नहीं हो पाती हैं कि एंटीबॉडी बने। जब दूसरी डोज लगती है, तो सेल्स पहले से ही एक्टिव हो गई होती हैं, अब सिर्फ एंटीबॉडी बनने लगती हैं। दूसरी डोज लगने के 14 दिन बाद माना जाता है कि शरीर में एंटीबॉडी बन जाती हैं। लेकिन 20 प्रतिशत लोग जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है, कोमोरबिडिटी वाले हैं, उनमें हो सकता है पर्याप्त एंटीबॉडी न बनें, तो उन्हें वैक्सीन लगवाने के बाद भी सतर्क रहना है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
जिस तरह से केस बढ़ रहे हैं, कहां चूक हो रही है? 
  • डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'इस वक्त काफी चिंता का विषय है, क्योंकि जहां कोरोना के खत्म होने का इंतजार कर रहे थे, वहीं एक बार फिर स्थिति गंभीर हो रही है। लेकिन वायरस चाहे पुराना वाला हो या म्यूटेट वाला हो, उसका शरीर में प्रवेश का तरीका एक ही है। नाक, मुंह से वायरस शरीर में प्रवेश करता है, तो मास्क का सावधानी के साथ प्रयोग करना होगा। इसके साथ हाथों की सफाई रखें। लोगों में यही लापरवाही हो रही है, इसलिए केस बढ़ने लगे हैं। भीड़ में न जाएं, अभी पार्टी आदि में शामिल न हों और वैक्सीन लगवाने जरूर जाएं।' 
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