फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानना जरूरी: कोवाक्सिन, कोविशील्ड के बाद अब स्पूतनिक-वी भी तैयार, जानें कौन सी वैक्सीन कितनी असरदार

Fri, 14 May 2021 04:10 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 8
covid 19 vaccine - फोटो : PTI
कोरोना वायरस की वजह से हर दिन काफी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं। इस बीच देश में टीकाकण का काम भी जारी है। वहीं, लोग भी इस टीकाकरण अभियान में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। मौजूदा समय में भले ही देश दो वैक्सीन कोवाक्सिन और कोविशील्ड का इस्तेमाल कर रहा है। लेकिन अब अगले सप्ताह से देश के पास तीसरी वैक्सीन स्पूतनिक-वी भी होगी जो बाजारों में उपलब्ध होगी। इस वैक्सीन को रूस ने तैयार किया है। वहीं, अगर आपके मन में ये सवाल घूम रहा है कि आखिर इन तीनों में से कौन सी वैक्सीन कितनी असरदार है और इनके साइड इफेक्ट क्या हैं? तो चलिए जानते हैं।
विज्ञापन

2 of 8
Sputnik v - फोटो : social media
स्पूतनिक-वी
  • दरअसल, ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया यानी डीजीसीआई भारत में स्पूतनिक-वी कोरोना वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दे चुकी है। डीजीसीआई ने इस वैक्सीन को रूस में किए गए परीक्षणों के आधार पर मंजूरी दी है, जिसमें इस वैक्सीन का एफिकेसी रेट 91.6 प्रतिशत पाया गया। कोरोना से लड़ने में ये वैक्सीन कारगर साबित हुई। इस वैक्सीन को रूस के गामलेया नेशनल सेंटर ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी द्वारा विकसित किया गया है। इस वैक्सीन को शुरुआती दौर में ही विश्व स्तर पर इस्तेमाल करने की मंजूरी मिल गई थी।
विज्ञापन

3 of 8
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
साइड इफेक्ट
  • ये वैक्सीन एक वायरल वेक्टर वैक्सीन है, जो एंटीबॉडी के उत्पादन को ट्रिगर करके काम करती है। वहीं, बात इसके साइड इफेक्ट की करें, तो फरवरी 2021 में प्रकाशित एक लैंसेट अध्ययन के अनुसार स्पूतनिक-वी वैक्सीन लगने के बाद सिरदर्द, थकान, इंजेक्शन लगने वाली जगह पर दर्द या फ्लू जैसे साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जो कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। लेकिन वैक्सीन लेने के बाद कोई गंभीर मामला सामने नहीं आया है। वहीं, हर व्यक्ति में इस वैक्सीन के साइड इफेक्ट अलग-अलग भी हो सकते हैं।

4 of 8
कोवाक्सिन - फोटो : पीटीआई
कोवाक्सिन
  • कोवाक्सिन का एफिकेसी रेट 81 प्रतिशत से ज्यादा पाया गया। इस वैक्सीन को हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा विकसित और निर्मित किया गया है। ये वैक्सीन इम्यून सिस्टम को प्रशिक्षित करने के लिए निष्क्रिय SARS-COV-2 एंटीजन स्ट्रेन या मृत वायरस का उपयोग करती है, जो कोरोना के संक्रमण को पहचानकर इससे लड़ने में मदद करेगी।
विज्ञापन

5 of 8
फीवर - फोटो : अमर उजाला
साइड इफेक्ट
  • वहीं, इसके साइड इफेक्ट की बात करें, तो कोवाक्सिन फैक्ट शीट और रेगुलेट्री गाइडलाइंस के मुताबिक, इनॉक्यूलेशन राउंड के बाद लोगों में सूजन, बुखार, पसीना आना, इंजेक्शन लगने की जगह पर दर्द होना, ठंड लगना, शरीर में दर्द व कमजोरी, जुकाम, खुजली, चकत्ते आना, जुकाम और सिर दर्द जैसे लक्षण देखने को मिले।
विज्ञापन

6 of 8
कोविशील्ड - फोटो : twitter@serum institute
कोविशील्ड
  • कोविशील्ड को विश्व स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है और इसका एफिकेसी रेट 70.4 प्रतिशत से अधिक है। वहीं, इसकी दो डोज के बीच अंतराल बढ़ाकर इसे 90 प्रतिशत तक लाया जा सकता है। भारत में ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन को देश की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ने एस्ट्रेजेनिका के साथ मिलकार कोविशील्ड के नाम से तैयार किया है।
विज्ञापन

7 of 8
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
साइड इफेक्ट
  • बाकी दोनों वैक्सीन की तरह ही कोविशील्ड के भी अपने कुछ साइड इफेक्ट हैं। इसमें इंजेक्शन लेने वाली जगह पर दर्द होना, बुखार आना, थकान होना, बदन दर्द होना, लालपन होना, मांसपेशियों में जकड़न आदि साइड इफेक्ट देखे गए हैं।
विज्ञापन

8 of 8
vaccine, vaccination - फोटो : अमर उजाला
हमें एक चीज का हमेशा ही ध्यान रखना चाहिए कि सभी वैक्सीन को तब मान्यता मिलती है, जब वो सुरक्षा के सभी मानकों को पूरा करती हैं। वहीं, कोरोना से लड़ने में लगभग इन सभी वैक्सीन को प्रभावी माना गया है। इसलिए कोरोना को मात देनी है तो हर किसी को वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए।

स्रोत और संदर्भ: 
https://cdsco.gov.in/opencms/opencms/en/Home/
https://www.thelancet.com/journals/lancet/home

अस्वीकरण नोट: यह लेख ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया और लैंसेट के एक अध्ययन आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। अमर उजाला राउटर्स के इस अध्ययन और दवा को लेकर कोई दावा नहीं करता है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें