लगातार बढ़ रहा है बायो मेडिकल कचरा
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लगातार बढ़ रहा है बायो मेडिकल कचरा
- अगर आप बायो मेडिकल कचरे को लेकर उलझन में हैं, तो यहां आपको ये बता दें कि अस्पतालों और प्रयोगशाला से निकला हुआ कचरा (ग्लूकोज की बोतलों, इंजेक्शन, सिरिंज, दवाओं के डिब्बे, दस्ताने आदि) ही बायो मेडिकल कचरा होता है। वहीं, बात अगर इस कचरे की करें, तो कोरोना से होने वाला बायो मेडिकल कचरा लगातार बढ़ रहा है। पीसीबी के आंकड़ें बताते हैं कि जनवरी 2021 में 74 टन, फरवरी में 53 टन, मार्च में 75, अप्रैल में 139 टन और 10 मई 2021 में ये बढ़कर 203 टन पहुंच गया।
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्याधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह आईसीएचएच से वह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।
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