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Coronavirus से जंग में एक और कामयाबी, वैज्ञानिकों ने पता लगाया- कोरोना से कैसे लड़ता है मानव शरीर

Thu, 19 Mar 2020 02:35 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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इस शोध से वायरस के लिए वैक्सीन तैयार करने में मदद मिलेगी
ऑस्ट्रेलिया में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने इस बात की पहचान कर ली है कि मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कोरोना वायरस का मुकाबला कैसे करती है। यह शोध नेचर मेडिसीन जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

इस शोध में कहा गया है कि चीन समेत कई देशों में लोगों के कोरोनावायरस संक्रमण से उबरने की खबरें आने लगी हैं। ऐसे में शोधकर्ताओं ने यह पता करने का प्रयास किया कि आखिर मानव शरीर का सुरक्षा तंत्र इस वायरस से कैसे लड़ता है और कैसे उसे हरा पाता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस शोध का मकसद उन कोशिकाओं के काम के बारे में पता लगाना था जो इस वायरस को टक्कर दे रही हैं। उनका मानना है कि इससे वायरस के लिए वैक्सीन तैयार करने में मदद मिलेगी।
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Research - फोटो : अमर उजाला
चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस का संक्रमण 159 से अधिक देशों तक पहुंच चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वायरस से संक्रमित 1।84 लाख से ज्यादा मामलों की पुष्टि की जा चुकी है जबकि इस कारण 7,500 से भी ज्यादा मौतें भी दर्ज की गई हैं।

इस शोध में शामिल प्रोफेसर कैथरीन केडज़िएर्स्का के मुताबिक, यह एक बेहद महत्वपूर्ण खोज है क्योंकि हमें पहली बार शोध से यह पता चल पा रहा है कि हमारा शरीर (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कोरोना वायरस से कैसे लड़ता है।

मेलबर्न के पीटर डोहर्टी इंस्टीट्यूट फॉर इंफेक्शन एंड इम्यूनिटी के शोधकर्ताओं के इस काम की दूसरे कई शोधकर्ताओं ने भी तारीफ की है। एक शोधकर्ता ने इसे एक बड़ी सफलता बताया है।
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स्प्रे करते हुए स्वास्थ्यकर्मी - फोटो : PTI
शोध में क्या मिला?
एक ओर जहां कोरोनावायरस के संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं वहीं बहुत से लोगों ने इसके संक्रमण से मुक्ति भी पाई है। शोधकर्ताओं का कहना है संक्रमण हुए कई लोगों को क्वारेंटीन किया गया था लेकिन अब वो स्वस्थ होकर अपने घर लौटे हैं। 

ये अपने आप में बताता है कि मानव शरीर को रोग रक्षा प्रणाली को इससे लड़ना आता है। वो मानते हैं कि अभी तक इस पर विशेष तौर पर ध्यान नहीं दिया गया था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अपने शोध के बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि यह पहला मौक़ा है जब रिसर्च के माध्यम से चार प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिकाओं की पहचान की गई है, जो कोविड 19 से लड़ने में सक्षम पाई गईं। इन कोशिकाओं का पता एक संक्रमित महिला की जांच से किया गया। 

उन्हें मामूली-मध्यम संक्रमण था और उसे इसके अलावा दूसरी कोई भी बीमारी नहीं थी। चीन के वुहान शहर की एक महिला को संक्रमण के बाद ऑस्ट्रेलिया के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भर्ती कराये जाने के 14 दिनों के भीतर वो पूरी तरह स्वस्थ हो गईं।
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कोरोना वायरस परीक्षण की व्यवस्था - फोटो : PTI
प्रोफेसर केडजिएर्स्का ने बीबीसी को बताया कि उनकी टीम ने इस महिला की विस्तृत जांच की। उनकी जांच के केंद्र में इस महिला का इम्यून सिस्टम था। टीम ने अपनी जांच में यह पता लगाने की कोशिश की कि इस महिला का इम्यून सिस्टम कोरोना वायरस के संक्रमण पर किस तरह की प्रतिक्रिया करता है। वो बताती हैं
जब महिला की स्थिति में सुधार आने लगा तो उसके खून के बहाव में कुछ विशिष्ट प्रकार की कोशिकाओं को देखा गया। ये कुछ उसी तरह की वही कोशिकाएं थीं जो इंफ्लूएंजा के मरीजों में ठीक होने से पहले दिखाई देती हैं।
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शोध
यह कैसे मददगार है?
स्विनबर्न यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में हेल्थ साइसेंस के डीन प्रोफेसर ब्रूस थॉम्पसन के मुताबिक़, ये शोध वायरस को पहचानने में मदद कर सकता है। प्रोफेसर ब्रूस के मुताबिक, जब आपको यह पता होता है कि विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं कब होंगी तो आपको ये पता लगाने में आसानी होती है कि आप इस वायरस और उसका काम करने के तरीके की पहचान करने के कितने करीब हैं।

ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य मंत्री ग्रेग हंट का कहना है कि इस खोज से कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन बनाने की दिशा में तेजी आएगी और जल्द से जल्द लोगों को इलाज मुहैया हो पाएगा।
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रिसर्च
प्रोफेसर केडजिएर्स्का का कहना है कि उनकी टीम का अगला कदम यह पता करना होगा कि जिन मामलों में संक्रमण काफी अधिक था उस समय प्रतिरक्षा प्रक्रिया क्यों कमजोर हो गई या क्यों नाकामयाब रही।

उन्होंने कहा कि अब यह समझना जरूरी है कि जिन लोगों की मौत हुई उनके शरीर में किस चीज की कमी थी या क्या कमी थी या फिर क्या सिर्फ उन्हीं लोगों की मौत हुई जिन्हें कोई घातक बीमारी थी?
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Research - फोटो : अमर उजाला
अगर ये बातें स्पष्ट हो जाएगी तो यह समझना भी आसान हो जाएगा कि लोगों को सुरक्षित कैसे बचाया जाए। इस शोध के बाद से इस सेंटर (पीटर डोहर्टी इंस्टीट्यूट फॉर इंफेक्शन एंड इम्यूनिटी) को सरकार की ओर से तो अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी ही गई है साथ ही दुनिया के सबसे धनी लोगों में शुमार 'जैक मा' ने भी सेंटर को अनुदान दिया है।
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