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सामने आई असली वजह: इसलिए बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं कोरोना के नए वेरिएंट्स

Tue, 01 Jun 2021 06:25 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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कोरोना का बच्चों में खतरा - फोटो : Pixabay
Medically Reviewed By-
डॉ राजन गांधी
बाल रोग विशेषज्ञ और फिजीशियन
उजाला सिग्नस हॉस्पिटल, कानपुर


देश में कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर की रफ्तार अब काफी हद तक थमती नजर आ रही है। अप्रैल-मई में रोजाना के जो आंकड़े बढ़कर साढ़े तीन तक पहुंच हो गए थे, उनमें अब काफी सुधार आ गया है। हालांकि इस बीच कई रिपोर्टस में कोरोना की तीसरी लहर को लेकर दावा किया जा रहा है। इतना ही नहीं, तीसरी लहर को बच्चों के लिए काफी खतरनाक बताया जा रहा है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल आ रहे हैं कि जब पहली दो लहरों में वायरस ने बच्चों को ज्यादा प्रभावित नहीं किया, तो आखिर तीसरी लहर में इस तरह की आशंका क्यों जताई जा रही है?
कई रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि कोरोना वायरस के आने वाले स्ट्रेनों से भी बच्चों को ज्यादा खतरा हो सकता है। इन खबरों ने माता-पिता की चिंता बढ़ा दी है। आइए इस लेख में बाल रोग विशेषज्ञ से जानते हैं कि आखिर कोरोना के नए स्ट्रनों को बच्चों को लिए ज्यादा खतरनाक क्यों बताया जा रहा है? साथ ही किन उपायों को प्रयोग में लाकर बच्चों को सुरक्षित रखा जा सकता है? 
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बच्चों में कोरोना की तीसरी लहर का असर - फोटो : iStock
बच्चों को क्यों है ज्यादा खतरा?
बच्चों को लेकर जताई जा रही चिंता के बारे में जानने के लिए अमर उजाला ने उजाला सिग्नस हॉस्पिटल कानपुर में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ राजन गांधी से बात की। डॉ राजन बताते हैं कि कोरोना की तीसरी में बच्चों को लेकर चिंता करने का मुख्य कारण है कि देश में फिलहाल बच्चों को कोरोना की वैक्सीन नहीं दी जा रही है। तीसरी लहर और कोरोना के अन्य वेरिएंट्स के  आते-आते देश में 18 साल के ऊपर के ज्यादातर लोगों का टीकाकरण हो चुका होगा, ऐसे में जिन लोगों को वैक्सीन नहीं लगी होगी, उनमें संक्रमण का खतरा स्वाभाविक रूप से ज्यादा होगा।

 
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बच्चों की सुरक्षा को लेकर रखें ध्यान प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
...ताकि बच्चे रहें सुरक्षित
बच्चों की सुरक्षा का ध्यान में रखते हुए सरकार ने अभिभावकों को वैक्सीन देने के अभियान को और तेज कर दिया है। देश में तमाम वैक्सीनेशन सेंटरों पर उन अभिभावकों के वैक्सीन देने की शुरुआत कर दी गई है, जिनके बच्चे 12 साल या उससे कम आयु के हैं। माना जा रहा है कि यदि देखभाल करने वाले लोग कोरोना से सुरक्षित होंगे तो बच्चों को भी संक्रमण से मुक्त रखा जा सकेगा। आइए जानते हैं कि संक्रमण से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए और क्या-क्या चीजें जरूरी हैं?
 

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बच्चों को भी मास्क लगाकर रखें (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
मास्क पहनाना जरूरी
डॉ राजन गांधी कहते हैं बच्चों को भी कोविड सुरक्षा के सभी नियमों के पालन को लेकर जागरूक करना बेहद जरूरी है। बच्चों को घर से बाहर जानें से रोकें, विशेषकर भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर। किन्हीं परिस्थितियों में यदि बच्चों को भी बाहर ले जाना पड़े तो सुनिश्चित करें कि बच्चों ने भी ठीक तरीके से मास्क पहने हों।
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हाथों की सफाई पर ध्यान दें - फोटो : iStock
हाथों की सफाई
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि बड़ों की तरह बच्चे हमेशा हाथों का सफाई पर ध्यान नहीं रख सकते हैं, ऐसे में अभिभावकों को समय-समय पर बच्चों के हाथ साफ करते रहने चाहिए। इसके अलावा अभी से बच्चों में साफ-सफाई के नियमों के पालन कराने की आदत डालें, जिससे भविष्य में भी उन्हें किसी प्रकार के संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सके।

 
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टीकाकरण शुरू होते ही कराएं वैक्सीनेशन - फोटो : iStock
इन बातों का भी रखें ध्यान
डॉ राजन गांधी कहते हैं कि बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए घर में आगंतुकों से उनका संपर्क न होने दें, क्योंकि वे भी कोरोना के वाहक हो सकते हैं। वैज्ञानिक लगातार बच्चों में टीकाकरण कराने के उद्देश्य से वैक्सीनों का परीक्षण कर रहे हैं। जैसे ही बच्चों के लिए टीके उपलब्ध हों, तुरंत उनका वैक्सीनेशन कराएं। जब तक देश की 70-80 फीसदी आबादी का टीकाकरण नहीं हो जाता है, देश को तब तक कोरोना से मुक्त नहीं समझा जा सकता है।

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नोट: यह लेख उजाला सिग्नस हॉस्पिटल कानपुर में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ राजन गांधी से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।  डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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