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Corona Test: 'टाटाएमडी चेक' से कम समय में होगी कोरोना की जांच, एंटीजन टेस्ट से अधिक विश्वसनीय होगी रिपोर्ट

Thu, 12 Nov 2020 09:44 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना महामारी पर नियंत्रण के लिए सबसे शुरुआती रणनीति 'ज्यादा से ज्यादा जांच' बताई जाती रही है। कम समय में कोरोना की जांच के लिए अबतक कई तरह की तकनीक सामने आ चुकी है। इसी कड़ी में भारत में अब टाटा समूह ने केंद्र सरकार के साथ मिलकर कोविड-19 की तेज जांच के लिए एक नया टेस्ट विकसित किया है, जिसकी मदद से आरटी-पीसीआर टेस्ट से कम समय में रिपोर्ट मिल सकेगी। दावा किया जा रहा है कि इस टेस्ट के नतीजे रैपिड एंटीजन टेस्ट से अधिक विश्वसनीय होंगे। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
इस जांच तकनीक को टाटा समूह की कंपनी टाटा मेडिकल एंड डायग्नोस्टिक्स ने विकसित किया है।  इस टेस्ट का नाम टाटाएमडी चेक है। आरटी-पीसीआर टेस्ट की ही तरह इस नए टेस्ट के लिए भी नाक से सैंपल लिए जाते हैं। खबरों के मुताबिक, कंपनी जल्द ही चेन्नई स्थित अपनी फैक्टरी में 10 लाख किट का उत्पादन शुरू करेगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
डॉयचे वेले की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के सीईओ गिरीश कृष्णमूर्ति ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि इससे डेढ़ घंटे यानी 90 मिनट में नतीजे मालूम किए जा सकते हैं। अस्पताल और लैब के जरिए अगले महीने से इसकी बिक्री शुरू होगी। खबरों के मुताबिक, शुरुआत में केवल देश में ही इसकी बिक्री की जाएगी। 

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मरीज का सैंपल लेते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
कंपनी के सीईओ कृष्णमूर्ति के मुताबिक, इस जांच के लिए किसी बड़े और महंगे उपकरण की जरूरत नहीं है। अन्य जांच की तुलना में यह सरल और आसानी से उपलब्ध होने वाला टेस्ट है। इसमें सैंपलों की जांच के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन पर आधारित प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाएगा।
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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, इस टेस्ट में नाक से लिए गए स्वाब सैंपल को लैब में जांचने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि जहां सैंपल लिया गया, वहीं इसकी जांच हो जाती है। यह टेस्ट CRISPR जीनोम एडिटिंग तकनीक पर आधारित है। इसी तकनीक की खोज के लिए वैज्ञानिकों इमानुएल शॉपोंतिये और जेनिफर ए डुडना को इस साल रसायन के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला। इसी तकनीक पर आधारित जांच विकसित की गई है। 
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