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Covid-19: कोरोना संक्रमितों में देखी गई 'रेजर ब्लेड थ्रोट' की दिक्कत, विशेषज्ञों से जानिए क्या है ये समस्या

Mon, 16 Jun 2025 07:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • नोवा साउथईस्टर्न यूनिवर्सिटी में विशेषज्ञ डॉ. स्नेहल स्मार्ट ने एक रिपोर्ट में बताया कि इस बार की लहर में यूएस सहित कई देशों में कई मरीजों में 'रेजर ब्लेड थ्रोट' की समस्या देखी गई है।
  • कुछ मरीजों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं भी देखी गईं हैं।
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कोरोना के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
New Covid Symptoms 2025: कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले इन दिनों वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। पिछले करीब एक महीने से भारत में भी इसका असर देखा जा रहा है। देखते ही देखते यहां एक्टिव केस बढ़कर 7200 से ऊपर हो गए हैं। देश में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट और इसके सब-वैरिएंट्स (NB.1.8.1 और XFG) को प्रमुख पाया गया है, जिसकी प्रकृति अत्यधिक संक्रामकता वाली तो रही है हालांकि इसके कारण गंभीर रोग विकसित होने का जोखिम कम देखा गया है।

हालिया रिपोर्ट्स में डॉक्टरों ने बताया कि कोरोना के ज्यादातर संक्रमितों में हल्के स्तर के लक्षण देखे जा रहे हैं, अधिकतर लोग घर पर रहकर ही ठीक हो रहे हैं। बुजुर्गों और कोमोरबिडिटी के शिकार कुछ लोगों में गंभीर रोग के मामले जरूर सामने आए हैं पर इसकी संख्या आबादी की तुलना में काफी कम है।

कोरोना के मामलों में जारी वृद्धि के बीच लोगों के मन में एक सवाल बना हुआ है कि क्या इस बार लोगों में कुछ अलग प्रकार के लक्षण देखे जा रहे हैं? क्या पहले की तरह फिर से लोगों को सांस की तकलीफ या कोई अन्य गंभीर दिक्क्त हो रही है? आइए इस बारे में समझते हैं।
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कोविड टेस्ट और लक्षण - फोटो : Freepik.com
NB.1.8.1 वैरिएंट अत्यधिक संक्रामक पर खतरनाक नहीं

देश में फैल रहे कोरोना के NB.1.8.1 सब-वैरिएंट को लेकर किए गए कई अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि ये ज्यादातर लोगों के लिए खतरनाक नहीं है। हां, इसके कारण किसी आबादी में तेजी से संक्रमण फैलने का जोखिम जरूर रहता है, जिसका मतलब है कि कम समय में ये ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना सकता है, खासकर अगर लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है या फिर  उनकी इम्युनिटी कमजोर है।

(ये भी पढ़िए-  कोरोना से ठीक होने के बाद भी पूरी तरह से सेहत में नहीं होता सुधार, चिंता बढ़ा रही है ये रिपोर्ट)
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'रेजर ब्लेड थ्रोट' की समस्या - फोटो : Adobe Stock
कई रोगियों में 'रेजर ब्लेड थ्रोट' जैसे लक्षण

नोवा साउथईस्टर्न यूनिवर्सिटी में विशेषज्ञ डॉ. स्नेहल स्मार्ट ने एक रिपोर्ट में बताया कि इस बार की लहर में यूएस सहित कई देशों में मरीजों में 'रेजर ब्लेड थ्रोट' की समस्या देखी गई है। 

'रेजर ब्लेड थ्रोट' का मतलब है रोगी के गले में तेज दर्द होना, जो कोविड-19 से संबंधित होता है। विशेषज्ञ ने बताया कि इस बार यह कोविड-19 के प्रमुख लक्षणों में से एक है। डॉ. स्मार्ट के अनुसार, रेजर ब्लेड थ्रोट में सिर्फ दर्द या खराश ही नहीं होता, बल्कि ऐसा लगता है जैसे चाकू घोंप दिया गया हो।


(कोरोना से बचे रहने के लिए क्या फिर से शुरू कर देना चाहिए काढ़ा-गिलोय का सेवन?)

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कोरोना के लक्षण - फोटो : Adobe Stock
गले में तेज दर्द जैसा एहसास

होली नेम मेडिकल सेंटर में संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख, डॉ. सूरज सागर बताते हैं, "कोविड से संक्रमित होने वाले 60 से 70 प्रतिशत लोगों में गले में खराश की शिकायत होती है। ये लक्षण महामारी की शुरुआत से ही देखा जा रहा है।

सामान्य गले में खराश और 'रेजर ब्लेड थ्रोट' में अंतर बस दर्द की तीव्रता का है। नए सब-वैरिएंट से संक्रमितों में ये लक्षण ऐसे महसूस हो सकता है कि जैसे आपने टूटा हुआ कांच खा लिया हो जिसे खाना और निगलना मुश्किल हो जाता है। यह अक्सर कुछ भी निगलने पर आपके गले के पिछले हिस्से में दर्द करता है।
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कोरोना के कारण गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं - फोटो : Freepik.com
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं भी देखी गईं

इन लक्षणों के अलावा दिल्ली से अस्पतालों से प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक इस वैरिएंट के कारण लोगों को पहले की ही तरह सर्दी-खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बुखार की दिक्कत हो रही है। डॉक्टर बताते हैं, कुछ मरीजों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं भी देखी गईं, जिसमें लोगों ने सामान्य के लक्षणों के साथ-साथ मतली, दस्त और पेट दर्द की शिकायत की है। 


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स्रोत
This Is the Most Common (and Painful) COVID Symptom Doctors Are Seeing Right Now


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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