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Heatwave: आंखों के लिए बहुत खतरनाक है बढ़ती गर्मी और धूप, जा सकती है रोशनी; कैसे रहें सुरक्षित?

Mon, 16 Jun 2025 06:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • तेज धूप और बढ़ते तापमान से सिर्फ त्वचा ही नहीं, आंखों की रोशनी भी प्रभावित हो सकती है।
  • धूप के सीधे संपर्क में रहना आपकी आंखों के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
  • डॉक्टर बताते हैं, यूवी किरणों से रेटिना को खतरा रहता है, जिससे समय के साथ देखने की क्षमता कम हो जाती है।
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गर्मी के कारण आंखों की बढ़ती समस्याएं - फोटो : Freepik.com
देश के अधिकतर राज्य इन दिनों भीषण गर्मी और लू का प्रकोप झेल रहे हैं। कई स्थानों पर पारा 45 डिग्री तक भी रिकॉर्ड किया गया है जिसका सेहत पर कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है। गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), हीटस्ट्रोक होने का जोखिम तो रहता ही है साथ ही ये मौसम आपकी आंखों के लिए भी दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है।

इतना ही नहीं अगर आप लगातार गर्मी और धूप के संपर्क में रहते हैं तो इसका आंखों की सेहत पर दीर्घकालिक असर होने का भी जोखिम रहता है, जिससे रोशनी तक भी जा सकती है।

जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे हमारी आंखों के लिए खतरा भी बढ़ता है। तेज धूप और बढ़ते तापमान से सिर्फ त्वचा ही नहीं, आंखों की रोशनी भी प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक सूरज की यूवी किरणों के संपर्क में आने से आंखों को स्थायी नुकसान तक हो सकता है। 

आइए जानते हैं कि कैसे गर्मी और धूप आंखों पर असर डालती है और कैसे हम अपनी आंखों को सुरक्षित रख सकते हैं?
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आंखों पर धूप का असर - फोटो : Adobe Stock Photos
धूप के सीधे संपर्क से आंखों को नुकसान

धूप के सीधे संपर्क में रहना आपकी आंखों के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। डॉक्टर बताते हैं, यूवी किरणों से रेटिना को खतरा रहता है,  धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट किरणें आंखों की रेटिना को क्षतिग्रस्त कर सकती हैं, जिससे समय के साथ देखने की क्षमता कम हो जाती है।

इसके अलावा धूप और गर्मी के कारण ड्राई आइज सिंड्रोम का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है, जो आंखों की रोशनी को प्रभावित करने वाली समस्या मानी जाती है।
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आंखों की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं डॉक्टर?

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ आकाश अस्थाना बताते हैं, इस मौसम में आंखों की देखभाल बहुत जरूरी है। धूप के संपर्क में रहने के कारण फोटोकरेटाइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है, यह एक तरह का सनबर्न है जो आंखों में होता है। इसके कारण आंखों में दर्द, जलन, धुंधला दिखने और रोशनी के प्रति असंवेदनशीलता (फोटोफोबिया) हो सकता है। 

इतना ही नहीं लंबे समय तक धूप में रहने से आंखों के लेंस पर भी असर पड़ता है जिससे समय से पहले मोतियाबिंद विकसित हो सकता है। वहीं गर्म हवा, धूल और तेज धूप मिलकर आंखों को सुखा देती हैं, जिससे ड्राई आइज की समस्या होने लगती है।

अगर समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान न दिया जाए तो इससे आंखों को गंभीर क्षति हो सकती है।

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तेज धूप और डिहाइड्रेशन ग्लूकोमा को बढ़ा सकता है। - फोटो : Freepik.com
कहीं आपके लिए भी न बढ़ जाए दिक्कत?
 
डॉ अस्थाना कहते हैं, जिन लोगों को पहले से आंखों से संबंधित दिक्कतें रही हैं उन्हें इस मौसम में और भी सावधानी बरतनी चाहिए। 

कुछ मामलों में तेज धूप और डिहाइड्रेशन ग्लूकोमा को बढ़ा सकता है। इसके अलावा गर्मी में घर में रहने के दौरान लोग स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिससे डिजिटल आई स्ट्रेन और ड्राई आइज का खतरा बढ़ जाता है। धूप और  डिजिटल आई स्ट्रेन का एक साथ होना आपके लिए बड़ी मुसीबतों का कारण भी बन सकता है।
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आंखों की देखभाल जरूरी - फोटो : Freepik.com
कैसे रखें आंखों का ख्याल?

अब सवाल है कि फिर आंखों को स्वस्थ रखने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए? इस बार में नेत्र रोग विशेषज्ञ कहते हैं, आप कुछ सावधानियां बरतकर भी बड़ी समस्याओं को टाल सकते हैं।
  • गर्मी में आंखों को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षात्मक चश्मे पहनें। बाहर निकलते वक्त हमेशा अच्छे ब्रांड के यूवी प्रोटेक्शन वाले चश्मे पहनें।
  • सूरज की सीधी रोशनी से बचाव के लिए टोपी या छाता बहुत फायदेमंद होता है।
  • आंखों को बार-बार धोएं। ठंडे पानी से दिन में 2-3 बार आंखें धोने से धूल और एलर्जी के कण हट जाते हैं।
  • गंदे हाथों से आंखों को छूने से संक्रमण का खतरा बढ़ता है, ये गलती न करें। 
  • हाइड्रेटेड रहना इस मौसम में सबसे जरूरी है। ज्यादा पानी पिएं ताकि आंखों में नमी बनी रहे और ड्राई आई से बचाव हो सके। 
  • सबसे जरूरी बात स्क्रीन टाइम को कम करें। लगातार मोबाइल या लैपटॉप देखने से बचें।
  • जलन-लालिमा होने पर बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवा-आईड्रॉप का इस्तेमाल न करें।


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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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