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Coronavirus: क्या कोरोना से ठीक होने के बाद बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा? विशेषज्ञ से जानें

Mon, 21 Dec 2020 02:32 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले बढ़कर अब सात करोड़ 72 लाख से भी ऊपर हो गए हैं जबकि मरने वालों की संख्या भी 17 लाख के पार चली गई है। वहीं भारत की बात करें तो यहां संक्रमण का आंकड़ा एक करोड़ के पार हो चुका है। हालांकि यहां इस बीमारी से स्वस्थ होने वालों की दर भी 95.53 फीसदी हो गई है, लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी कई लोगों में कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। ऐसे में ये एक बड़ा सवाल है कि क्या कोरोना से ठीक होने के बाद हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है? आइए जानते हैं विशेषज्ञ इसपर क्या कहते हैं... 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या अब भारत में कोरोना के मामले केवल कम ही होते जाएंगे? 
  • दिल्ली स्थित गंगाराम अस्पताल के डॉ. लेफ्टिनेंट जनरल वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'किसी भी महामारी में ट्रेंड को देखते हुए जो भी भविष्यवाणी की जाती है, वो गणितीय मॉडल के आधार पर की जाती है। यह गणित कभी भी बदल सकती है। कल को अगर मामले फिर बढ़ने लगें, तो सारी गणना अलग हो जाएगी। यहां संक्रमण कम होने का एक कारण यह भी है कि जब ठंड बढ़ती है, तब लोग घर से बाहर निकलना कम कर देते हैं। हालांकि हमने एक साल में बहुत कुछ सीख लिया है और बहुत कुछ भुगता है, जिससे हमारी आदतें अब बदल रही हैं। इन आदतों को जारी रखें तो मामले नियंत्रित रहेंगे।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
अगर किसी को वैक्सीन के ट्रायल में भाग लेना है, तो वह क्या करें? 
  • डॉ. लेफ्टिनेंट जनरल वेद चतुर्वेदी बताते हैं, 'अगर आपको कोविड-19 की वैक्सीन के ट्रायल में भाग लेना है, तो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली में फोन करके संपर्क कर सकते हैं। फोन पर व्हाट्सएप नंबर दिया जाएगा। यह नंबर वहां के प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष का है। आपको व्हाट्सएप के जरिए सारी जानकारी प्राप्त हो जाएगी। आपको बता दें कि यह प्रक्रिया बहुत आसान है। कोई भी वैक्सीन के लिए वॉलेंटियर बन सकता है।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन के लिए वॉलेंटियर्स की कमी पड़ रही है, इस पर क्या कहेंगे? 
  • डॉ. लेफ्टिनेंट जनरल वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'वैक्सीन में फेज-1, 2, 3 और पोस्ट मार्केटिंग ट्रायल होते हैं। फेज-1 में यह देखा जाता है कि दवा का कोई साइड-इफेक्ट तो नहीं है। फिर फेज-2 के बाद अब फेज-3 आ गया है, जिसमें लोगों का उत्साह बहुत कम हो गया है। दरअसल, लोगों को लगता है कि अब दो-तीन कंपनियों ने वैक्सीन बना ली है, वही ले लेंगे। दूसरा कारण, ठंड में लोग थोड़े आलसी हो जाते हैं। तीसरा कारण यह कि ट्रायल के दौरान बहुत कुछ डॉक्यूमेंटेशन होता है, जिससे व्यक्ति थोड़ा सा चिंतित हो जाता है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या माउथवॉश से कोरोना वायरस मर जाता है? 
  • डॉ. लेफ्टिनेंट जनरल वेद चतुर्वेदी बताते हैं, 'जी नहीं, माउथवॉश में आमतौर पर हैक्सिडीन होता है, जो केवल मामूली बैक्टीरिया को ही नष्ट करने में सक्षम होता है। इससे वायरस का खात्मा नहीं हो सकता है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या कोरोना से ठीक होने के बाद हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है? 
  • डॉ. लेफ्टिनेंट जनरल वेद चतुर्वेदी बताते हैं, 'शुरू-शुरू में डाटा के आधार पर जब यह पता चला कि कोरोना में मौत हो जाती है, तब हमें लगा कि मौत का कारण फेफड़ों में संक्रमण है। जब इटली में पोस्टमॉर्टम स्टडीज की गई, तो यह पाया गया कि यह थ्रॉम्बस बन जाता है, तो क्लॉटिंग ज्यादा हो जाती है, जिससे हार्ट अटैक होता है। बच्चों, टीनेजर्स या युवाओं में कावासाकी बीमारी होने की खबरें भी आईं। यह भी पाया गया कि संक्रमित युवाओं को यह बीमारी हो रही है। दरअसल, कोरोना में क्लॉटिंग ज्यादा होने की वजह से हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।' 
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