प्रतीकात्मक तस्वीर
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अमेरिका स्थित ब्रिघम एंड वुमेन्स अस्पताल के शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब बीमारी कोशिकाओं को काम करने के लिए पर्याप्त ग्लूकोज प्राप्त करने से रोकती है, तो 'डायबटिक कीटोएसिडोसिस' (डीकेए) की स्थिति पैदा हो सकती है। अध्ययन में कहा गया है कि कोरोना के जो मरीज एसजीएलटी2आई दवा ले रहे हैं, उनमें 'डायबटिक कीटोएसिडोसिस' के एक प्रकार, ईयूडीकेए की स्थिति पैदा होने का अधिक खतरा है। दरअसल, एजीएलटी2आई दवा शरीर में ग्लूकोज का स्तर कम करती है।