प्रतीकात्मक तस्वीर
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्चों के माता-पिता कोरोना से संक्रमित हुए थे और उनमें लक्षण भी दिखे थे। इस दौरान बच्चे उनके साथ ही रहे। दो बच्चों में तो कोरोना के हल्के लक्षण दिखे, लेकिन तीसरे और सबसे छोटे वाले बच्चे में कोई भी लक्षण नहीं दिखे, पर एंटीबॉडीज बन गईं। मर्डोक चिल्ड्रेंस रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडीज का मिलना इस बात का सबूत है कि वो कभी न कभी कोरोना से संक्रमित हुआ है और उसी के बाद उसके शरीर में एंटीबॉडीज बनीं।