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Coronavirus: कोरोना मरीजों की जान बचाने वाली दो और दवाएं मिलीं, जानें कितनी है कीमत

Fri, 08 Jan 2021 11:21 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना संक्रमण से जकड़े मरीजों की जान बचाने के लिए दो और जीवन रक्षक दवाएं मिल गई हैं। ये दवाएं कोरोना मरीजों की मौत के आंकड़े में एक चौथाई कमी ला सकती हैं। एनएचएस के इंटेसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में इन वैक्सीन का ट्रायल करने वाले शोधकर्ताओं ने बताया कि ये दवा ड्रिप के जरिए दी जाती है और इलाज किए जाने वाले हर 12 लोगों में से एक अतिरिक्त की जान बचाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन दवाओं की सप्लाई पूरे ब्रिटेन में पहले से ही उपलब्ध है, इसलिए इनका इस्तेमाल तुरंत किया जा सकता है ताकि सैकड़ों जानें बचाई जा सकें। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ब्रिटेन के अस्पतालों में 30 हजार से अधिक कोरोना मरीज हैं। यह आंकड़ा बीते साल अप्रैल के मुकाबले 39 फीसदी अधिक है। ब्रिटेन सरकार दवा निर्माता कंपनी से लगातार संपर्क बनाए हुए है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सकते कि ब्रिटेन में मरीजों के लिए टोसीलिजुमैब और सरीलूमैब, दवाएं उपलब्ध रहें। जान बचाने के साथ ही इन दवाओं के इस्तेमाल से मरीज जल्दी ठीक हो रहे हैं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को एक हफ्ते तक आईसीयू में रखने की जरूरत पड़ रही है। प्रतिदिन के अस्पताल के खर्च से भी कम में ये दोनों दवाएं बराबर असरदार हैं और सस्ते एस्टेरॉयड डेक्सामेथासोन के साथ और असरदार हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हालांकि दवाएं बहुत सस्ती नहीं हैं। इनकी कीमत प्रति मरीज 750 पाउंड (करीब 69,784 रुपये) से 1000 पाउंड ( करीब 99,649 रुपये) के बीच आती है, जो डेक्सामेथासोन के पांच पाउंड (करीब 500 रुपये) के कोर्स के कहीं ज्यादा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन टीकों को लगवाने का फायदा यह है कि ये आईसीयू में प्रति दिन के बेड के खर्च से कम में उपलब्ध हैं। आईसीयू का प्रति दिन का चार्ज 2000 पाउंड (करीब दो लाख रुपये) है। मुख्य शोधकर्ता और इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रो. एंथनी गॉर्डोन ने कहा, 'हर 12 मरीज जो इन दवाओं से ठीक होंगे वो एक जिंदगी बचा सकेंगे। ये बड़ा प्रभावी है।' 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ब्रिटेन समेत छह अलग-अलग देशों में आईसीयू के करीब 800 मरीजों पर रीमैप-कैप ट्रायल हुआ। स्टैंडर्ड केयर में रखे गए करीब 36 फीसदी कोविड मरीजों की मौत हो गई। आईसीयू में भर्ती होने के 24 घंटों के भीतर ये नई दवाएं देने पर मौतों का आंकड़ा एक चौथाई गिरकर 27 फीसदी हो गया। एनएचएस के नेशनल मेडिकल डायरेक्टर प्रो. स्टीफन पॉविस ने कहा, 'कोरोना मरीजों की मौत के आंकड़े में कमी लाने के लिए अब दूसरी दवाई आ गई है ये बेहद खुशी की बात है और कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में एक सकारात्मक कदम है।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने कहा, 'ब्रिटेन ने वक्त-वक्त पर साबित किया है और फिर कर रहा है कि वो अपने यहां मरीजों के लिए सबसे आशाजनक और बेहतर इलाज देने में सबसे आगे है। हालांकि इन दवाओं के खतरे भी हो सकते हैं। कोविड मरीजों को अधिक मात्रा में दिए जाने पर फेफड़ों और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डॉक्टरों को ये दवा उन सभी कोविड मरीज को देने की सलाह दी जा रही है, जो डेक्सामेथासोन देने बावजूद गंभीर हालत में हों और जिन्हें काफी देखभाल की जरूरत हो। टोसीलिजुमैब और सरीलूमैब, इन दोनों दवाओं के निर्यात पर सरकार ने रोक लगा रखी है। दवाओं को लेकर सामने आई ये रिसर्च अब तक रिव्यू नहीं की गई है और न ही किसी मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुई है। 
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