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Coronavirus Research: कोरोना को 'हवा में फैलने वाली बीमारी' कहने पर आपत्ति, स्टडी वापस लेने की मांग

Fri, 19 Jun 2020 02:24 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
कोविड-19 को मुख्यत: हवा से फैलने वाली बीमारी बताने वाली एक रिसर्च स्टडी को दुनियाभर के 40 से अधिक वैज्ञानिकों ने वापस लेने की मांग की है। आम जानकारी है कि कोरोना वायरस का संक्रमण मुख्यत: संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान उसके मुंह से निकलने वाले ड्रॉपलेट्स से फैलता है। इसके अलावा अगर ये ड्रॉपलेट्स किसी सतह पर पड़ जाए तो वहां से भी संक्रमण फैल सकता है। लेकिन पिछले हफ्ते 'पीएनएस' जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में इसे 'हवा में फैलने वाली बीमारी' बताया गया। इस पर वैज्ञानिकों ने आपत्ति जताते हुए इसे वापस लेने के मांगपत्र पर हस्ताक्षर किया है।  
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
  • पिछले हफ्ते पीएनएस पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में चीन के वुहान शहर, इटली और अमेरिका की न्यूयॉर्क सिटी में लागू किए गए उपायों और कोविड-19 के मामलों की तुलना की गई। इसमें बताया गया कि सार्वजनिक स्थानों पर निकलते वक्त मास्क पहनना कोविड-19 के प्रसार को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
इस अध्ययन के खिलाफ एक खुले पत्र में, अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के नोआह हाबर समेत अन्य वैज्ञानिकों ने कहा है कि पीएनएएस के अध्ययन में अनुसंधान प्रणाली संबंधी खामियां हैं। इसमें 'आसानी से झूठे साबित हो सकने वाले दावे' किए गए हैं। खुले पत्र के मुताबिक, अध्ययन के मुख्य परिणाम रोग नियंत्रण प्रयासों, वुहान, इटली और न्यूयॉर्क सिटी के मामलों की तुलना पर आधारित हैं।

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Coronavirus - फोटो : Pixabay
  • खुले पत्र में कहा गया है कि पीएनएस के अध्ययन में इन स्थानों पर अपनाई गई रोग नियंत्रण नीति के अन्य स्पष्ट अंतरों को नजरअंदाज किया गया, जिसमें मास्क लगाने संबंधी नीति में भी अंतर शामिल थे। कहा गया कि अध्ययन के विश्लेषण में रोग प्रसार में बदलाव और सामने आ रहे मामलों में परिवर्तन के बीच के अंतराल को नजरअंदाज किया गया।
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
  • वैज्ञानिकों का तर्क है कि अध्ययन में जिन नीति क्रियान्वयन तिथियों पर विचार किया गया वे तमाम लोगों के व्यवहार के परिप्रेक्ष्य में बेहद खराब प्रतिनिधित्व को दर्शाता है जिसमें सामाजिक दूरी और मास्क का प्रयोग भी शामिल है।
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Coronavirus - फोटो : Pexels
  • वैज्ञानिकों ने कहा कि पीएनएएस अध्ययन में मुद्दों के स्तर, संभावनाओं और तीव्रता को देखते हुए और इसके परिणामों के आधार पर लिए गए फैसलों की तत्कालिकता को देखते हुए इसको ठीक करना अब असंभव है इसलिए उनकी मांग है कि पीएनएएस का संपादकीय बोर्ड इस अनुसंधान पत्र को तत्काल वापस ले।
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