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Coronavirus: फेस मास्क को लेकर हुए इस अध्ययन में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Wed, 17 Jun 2020 01:41 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Mask for Coronavirus - फोटो : PTI/Amarujala
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच लोगों को फेस मास्क का इस्तेमाल, सोशल डिस्टेंसिंग और हाइजीन मेंटेन करने की सलाह दी जा रही है। पिछले दिनों एक अध्ययन में बताया जा चुका है कि केवल लॉकडाउन से कोरोना संक्रमण पर रोक संभव नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर फेस मास्क का इस्तेमाल जरूरी है। अब एक नए शोध अध्ययन में बताया जा रहा है कि चेहरे पर लगाए जाने वाले मास्क से कोरोना वायरस के फैलने का खतरा कम होता है, लेकिन बार-बार खांसने से उसकी फिल्टर करने की क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ता है। शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर मॉडलों का प्रयोग कर यह अध्ययन किया है। 
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Home made Mask - फोटो : Facebook
  • साइप्रस में यूनिवर्सिटी ऑफ निकोसिया के शोधकर्ताओं ने फेस मास्क से संबंधित अध्ययन के बाद यह नई जानकारी दी है। इस अध्ययन में स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों के लिए एयर-फिल्टर्स और फेस शील्ड से लैस हेल्मेट समेत निजी सुरक्षा उपकरण पहनने की सिफारिश की गई है।
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Car Drive in Mask - फोटो : Social Media
  • साइप्रस में यूनिवर्सिटी ऑफ निकोसिया के तालिब दिबुक और दिमित्रिस द्रिकाकिस समेत वैज्ञानिकों ने कम्प्यूटर मॉडलों का इस्तेमाल कर यह पता लगाया कि जब मास्क पहनने वाला कोई शख्स बार-बार खांसता है तो खांसने से गिरने वाली छोटी-छोटी बूंदों के प्रवाह की क्या प्रवृत्ति होती है।

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कोरोना संक्रमण के बचाव के लिए मास्क है जरूरी - फोटो : PTI
  • इससे पहले एक अध्ययन में पाया गया कि जब बिना मास्क पहने व्यक्ति खांसता है तो उसकी लार की बूंदें पांच सेकंडों में 18 फुट तक की दूरी तय कर सकती हैं। पत्रिका ‘फिजिक्स ऑफ फ्लूइड्स’ में प्रकाशित इस अध्ययन में चेहरे पर लगाए जाने वाले मास्क की फिल्टर की क्षमता का अध्ययन किया गया।
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मास्क पहने हुए एक मजदूर(File Photo) - फोटो : PTI
  • अध्ययन के अनुसार मास्क से हवा में लार की बूंदों के फैलने का खतरा कम हो सकता है लेकिन बार-बार खांसने से उसकी क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ता है। वैज्ञानिकों ने कहा कि यहां तक कि मास्क पहनने पर भी लार की बूंदें कुछ दूरी तक गिर सकती हैं। उन्होंने कहा कि मास्क न पहनने पर लार की बूंदों के गिरने की दूरी दोगुनी हो जाती है।

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