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Coronavirus का कहर: इटली का वह अस्पताल, जो 'कोरोना अस्पताल' बन गया है

Sat, 21 Mar 2020 11:12 AM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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Corona in Italy - फोटो : Social Media
हर कई हमें हीरो कह कर पुकार रहा है लेकिन हम ऐसा नहीं समझते।
यह कहना है इटली के क्रेमोना शहर के एकमात्र अस्पताल के नर्स पाओलो मिरांडा का। इटली के लोम्बार्डी इलाके के इस छोटे से शहर में अब तक 2160 से ज्यादा मामले आ चुके हैं और 199 लोग मारे जा चुके हैं। अपने कई दूसरे सहकर्मियों की तरह वो पिछले महीने से 12 घंटे की शिफ्ट कर रहे हैं। वो कहते हैं, "हम प्रोफेशनल लोग हैं, लेकिन हम पुरी तरह से अब थक चुके हैं। ऐसा लग रहा है कि हम किसी सुरंग में हैं। हम सब डर हुए हैं।"
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
यूरोप में सबसे बुरी तरह से प्रभावित होने वाला देश इटली है। पाओलो को तस्वीरें लेना पसंद है। उन्होंने फैसला लिया है कि वे इस हताशा भरे समय को तस्वीरों के सहारे संजों कर रखेंगे।

"जो हो रहा है उसे मैं कभी नहीं भूलना चाहूंगा। यह इतिहास बनने जा रहा है और मेरे लिए शब्दों से कहीं ज्यादा ताकतवर तस्वीरें हैं।" अपनी तस्वीरों में वो अपने सहकर्मियों की बहादुरी के साथ-साथ उनकी कमजोरियों को भी दिखाना चाहते हैं।

"एक दिन मेरी एक सहकर्मी कॉरिडोर में चिल्लाते हुए कूदने लगी। उसका कोरोना का टेस्ट हुआ था और उसे तभी पता चला था कि उसे कोरोना नहीं है। आम तौर पर तो वो बहुत शांत रहती थी लेकिन वो बहुत डरी हुई थी। आखिरकार वो भी एक इंसान ही है।"
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- फोटो : Social Media
इटली में अब तक कोरोना के 35000 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। पाओलो और उनकी टीम के लिए यह बहुत मुश्किल भरा समय है लेकिन वो एक-दूसरे को संभालते हुए मदद कर रहे हैं। वो बताते हैं, "कभी-कभी हम हताश हो जाते हैं। हम रोने लगते हैं। खुद को उस वक्त असहाय पाते हैं जब हमारे मरीज के हालत में सुधार नहीं हो रहा होता है।"

जब ऐसा होता है तब टीम के बाकी सदस्य तुरंत उसकी मदद के लिए आगे बढ़ते हैं और उसे ढाढस बंधाते हुए उसे सहज होने में मदद करते हैं। "हम आपस में मजाक करके एक दूसरे को हंसाने की कोशिश करते हैं नहीं तो हम अपना दिमाग़ी संतुलन खो बैठेंगे।"

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इटली में करीब 3000 लोग एक महीने में मारे जा चुके हैं। करीब 35000 से ज़्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर और नर्स खासकर उत्तरी इटली में इस हालात से जूझ रहे हैं।

पाओलो नौ सालों से नर्स हैं। उन्होंने अपनी आंखों के सामने बहुत लोगों को मरते देखा है। लेकिन इस महामारी के दौरान जो बात सबसे चुभने वाली है, वो यह है कि लोग ऐसे हालात में मर रहे हैं जब कोई उनका अपना उनके साथ नहीं होता।

"आम तौर पर जब कोई मरीज मरता है तो उनके परिवार वाले उनके साथ होते हैं। वो एक गरिमामयी अंत होता है। हम परिवार के लोगों को संभालने और उन्हें संत्वाना देने के लिए होते हैं।"
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लेकिन पिछले महीने से संक्रमण के ख़तरे को देखते हुए परिवार वालों को आने की इजाजत नहीं है। यहां तक कि वे अस्पताल भी नहीं आ सकते हैं। हम उन सभी वायरस से संक्रमित लोगों का इलाज कर रहे हैं जिन्हें पूरी तरह से अकेले छोड़ दिया गया है। अकेले मरना बहुत तकलीफदेह है। मैं दुआ करता हूं कि किसी के साथ ऐसा न हो।

क्रेमोना का यह अस्पताल 'कोरोना वायरस के अस्पताल' में तब्दील हो चुका है। अब यहां सिर्फ कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का इलाज हो रहा है। दूसरे सभी मामले सस्पेंड कर दिए गए हैं। नए मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है लेकिन आईसीयू में उनके लिए बेड कम पड़ रहे हैं।

"हम अस्पताल के अंदर हर जगह पर जहां कहीं भी संभव हो, अब बेड की व्यवस्था कर रहे हैं। अस्पताल में अब कहीं भी जगह नहीं बचा।" अस्पताल के गेट पर 60 बेड लगा कर जगह की कमी को पूरा करने की कोशिश की जा रही है लेकिन यह भी पर्याप्त नहीं है।
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Corona in Italy - फोटो : Social Media
पाओलो इस स्थिति से निपटने के लिए क्या करते हैं?

इस पर वो कहते हैं, हमारे प्रति जो पूरे देश में प्यार दिखाया जा रहा है, वो हमें आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दे रहा है। कई लोग उन्हें हीरो बता रहे हैं। लोग उनके लिए उपहार भेज रहे हैं। पाओलो कहते हैं, "हम हर रोज जब काम पर आते हैं तब कुछ नया पाते हैं। पिज्जा, मिठाई, ड्रिंक और कॉफी पॉड्स जैसी ढेरों चीजें। मैं यह कह सकता हूँ कि हम कार्ब के सहारे खुद के मनोबल को संभाले हुए हैं।"
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वो बताते हैं कि इससे उन्हें थोड़ी राहत तो मिलती है लेकिन वो कभी भी अस्पताल से पूरी तरह से अलग नहीं रख पाते। वो कहते हैं, "मैं जब शिफ्ट खत्म कर के लौटता हूं तो बहुत बुरी तरह से थका रहता हूं लेकिन जब सोने जाता हूँ तो रात में कई बार उठ बैठता हूं। मेरे कई सहकर्मियों के साथ ऐसा ही होता है।"

पाओलो हर दिन खुद को ज्यादा थका हुआ महसूस कर रहे हैं। वो कहते हैं, "मैं इस अंधी सुरंग में रौशनी नहीं देख पा रहा। पता नहीं आगे क्या होगा। बस इसके खत्म होने की उम्मीद करता हूं।"
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