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विशेषज्ञ से जानें: समय पर नहीं लगवा पाए कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज, तो क्या करें?

Sun, 04 Jul 2021 01:03 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में थोड़ी गिरावट देखने को मिली है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, बीते 24 घंटे में कोरोना के 43 हजार से अधिक नए मामले सामने आए हैं। हालांकि इस दौरान 900 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। फिलहाल देश में कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या 4,85,350 है, जबकि संक्रमण के कारण मृतकों की संख्या बढ़कर 4,02,005 हो गई है। वही, मंत्रालय का कहना है कि देश में अब तक 35.12 करोड़ लोगों को कोविड-19 का टीका लगाया जा चुका है। हालांकि वैक्सीन को लेकर लोगों के मन में अभी भी बहुत सारे सवाल हैं, जिनके जवाब शायद वो नहीं जानते हैं। जैसे, अगर कोई व्यक्ति वैक्सीन की पहली खुराक ले चुका है और दूसरी डोज का समय हो चुका है, लेकिन वैक्सीन समय पर नहीं मिल पाई है, तो ऐसे में क्या करें? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब... 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
दूसरी डोज का समय हो चुका है, लेकिन समय पर नहीं मिल पाई है, क्या करें? 
  • दिल्ली स्थित एम्स के डॉ. अंजन त्रिखा कहते हैं, 'कोविशील्ड की दूसरी डोज के समय को बढ़ाया गया है, अब यह 84 दिन के बाद लगाई जा रही है। अगर दूसरी डोज का समय हो चुका है और उस दिन किसी कारणवश वैक्सीन नहीं लगवा पाए हैं तो उसके बाद जिस दिन भी स्लॉट मिले, जाकर लगवाएं। ऐसे न सोचें कि अब तो 100 दिन हो गए हैं तो दूसरी डोज नहीं लगवानी है। दूसरी डोज जरूर लें।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
अभी भी सरकारी अस्पतालों के आईसीयू में मरीजों की संख्या बनी हुई है, क्या कारण है? 
  • डॉ. अंजन त्रिखा कहते हैं, 'जी हां, हमें लग रहा था कि संक्रमण की रफ्तार थमी है तो केस कम हो रहे हैं और आईसीयू के बेड भी खाली होंगे। दूसरी लहर में बहुत सारे मरीज निगेटिव होने के बाद इलाज कराकर घर चले जाते हैं, लेकिन कई बार घर जाने के बाद भी उनके दिल की धड़कन बढ़ गई है, सेचुरेशन नहीं ठीक होता, फेफड़े का संक्रमण बना हुआ है। ऐसे में लोग पहले तो घर के पास के अस्पताल में ऑक्सीजन ले लेते हैं। फिर भी आराम नहीं मिलता तो वो सरकारी अस्पतालों के आईसीयू में भर्ती होते हैं। ये वायरस सिर्फ फेफड़ों पर ही नहीं बल्कि कई दूसरे अंगों को भी प्रभावित करता है। ऐसे लोग उम्र में भी थोड़ा ज्यादा होते हैं।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि डेल्टा प्लस परेशानी का सबब बन सकता है, क्या कहेंगे? 
  • डॉ. अंजन त्रिखा कहते हैं, 'वायरस अपना प्रकार बदलता ही है, जिसे म्यूटेट कहते हैं। कई बार जब वह अपने रूप को परिवर्तित करता है तो कमजोर हो जाता है और कई बार और अधिक तेजी से बीमारी फैलाता है। कोरोना के इस वायरस ने भी अपना आकार बदल लिया है। इससे लगता है कि ये ज्यादा संक्रमण फैलाएगा और तीसरी लहर आने में इसका हाथ हो सकता है। लेकिन ये हम सभी पर निर्भर करता है। अगर हम भीड़ में जाएंगे, पार्टी करेंगे, मास्क नहीं लगाएंगे तो तीसरी लहर देखनी पड़ सकती है। इसलिए हम अगर नियमों का पालन करें तो तीसरी लहर से बच सकते हैं।' 
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