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विशेषज्ञ से जानें: अगर ग्रामीण इलाकों में किसी को कोरोना के लक्षण दिखें तो क्या करें?

Fri, 04 Jun 2021 05:22 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना की दूसरी लहर के बीच देश में उपचार करा रहे लोगों और नए संक्रमित मरीजों की संख्या में भारी कमी देखने को मिल रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, संक्रमण से उबरने की दर में लगातार सुधार हो रहा है और यह 93.08 फीसदी हो गई है। बीते 24 घंटे में दो लाख सात हजार से अधिक कोरोना मरीज संक्रमण मुक्त हुए हैं। इसी के साथ अब तक कुल मिलाकर देश में दो करोड़ 65 लाख से अधिक संक्रमित मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। इस बार यह वायरस गांवों तक भी फैल चुका है, ऐसे में स्थिति थोड़ी चिंताजनक हो गई है। हालांकि देश के कुछ गांवों को छोड़ दें तो लगभग सभी गांवों में लोग संक्रमित हुए और उनमें से अधिकतर खुद ब खुद ठीक भी हो गए यानी उन्हें हल्का संक्रमण हुआ। चूंकि गांवों में भी टीकाकरण अभियान चल रहा है, लेकिन अभी भी बहुत सारे ग्रामीण इलाके ऐसे हैं, जहां अभी भी वैक्सीन को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब... 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
मरीज को कोरोना से ज्यादा समस्या नहीं थी, फिर भी म्यूकरमाइकोसिस हो गया है, क्या ये संभव है? 
  • दिल्ली स्थित  गंगाराम अस्पताल के डॉ. (लेफ्टिनेंट जनरल) वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'फंगस की बीमारी कोई नई नहीं है। इससे पहले भी केस आते थे। ये उनमें होते हैं, जिनकी इम्यूनिटी कम होती है, उन्हें जल्दी ये बीमारी होती है। खास तौर पर यह डायबिटीज वाले मरीजों में देखी जाती थी। अब कोविड की वजह से इसके केस ज्यादा आने लगे हैं। इसलिए थोड़ी सतर्कता बरतें। लेकिन इसका इलाज संभव है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
अगर ग्रामीण इलाकों में किसी को कोरोना के लक्षण दिखें तो क्या करें? 
  • डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'सबसे पहले तो कोरोना के लक्षण को लेकर लोगों को जागरूक करना है। दूसरा ये काम करना है कि अगर किसी को बुखार या सर्दी या कोई भी लक्षण आता है तो तुरंत अस्पताल न भागें, बल्कि पैरासिटामोल ले सकते हैं। अगर बुखार और लक्षण बढ़ते जा रहे हैं, तब डॉक्टर के पास जाएं या फिर टेली मेडिसिन के जरिये यानी फोन के जरिये डॉक्टर से संपर्क करके इलाज करा सकते हैं। अगर लक्षण बढ़ते हैं, तो हो सकता है कि डॉक्टर कई दवा देंगे और स्टेरॉयड भी दें। लेकिन अगर आप अपना काम कर पा रहे हैं और सांस अभी नहीं फूल रही है, तो तुरंत स्टेरॉयड नहीं लेना है। अगर सांस फूलने लगी है, चल नहीं पा रहे हैं तो अस्पताल जा सकते हैं या डॉक्टर से संपर्क करके स्टेरॉयड ले सकते हैं। कितना लेना है, कैसे लेना है, इसके बारे में डॉक्टर से अच्छी तरह से समझ लें।' 

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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
ग्रामीण इलाकों में अभी भी वैक्सीन को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है, क्या कहेंगे? 
  • डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'हम सभी की जिम्मेदारी है कि देश के आखिरी व्यक्ति तक इसकी महत्ता को बताना है। फिर चाहे व्यक्ति पढ़ा-लिखा हो या नहीं। उन्हें बताना होगा कि ये कोई नई चीज नहीं है, पहले भी कई तरह के अभियान के जरिये हमने बीमारी को जड़ से खत्म किया है, जैसे पोलियो और चेचक है। उसी तरह वैक्सीन के जरिये हमें कोरोना को हराना है। गांव में अफवाहें जल्दी फैलती हैं और लोग भ्रमित हो जाते हैं। हमारे देश में हर साल करोड़ों बच्चों को वैक्सीन लगती है, हमारे देश को वैक्सीन में महारत हासिल है, इसलिए उन्हें समझाना है कि उन्हें इससे कोई खतरा नहीं है, जिस भी तरह से उन्हें जागरूक करना है, करना होगा, नहीं तो बीमारी को दूर करने में काफी लंबा वक्त लग जाएगा।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कई लोग वैक्सीन को लेकर असमंजस में हो जाते हैं कि कौन सी लगवाएं, ऐसे लोगों को क्या कहेंगे? 
  • डॉ. वेद चतुर्वेदी कहते हैं, 'पहले तो ये जान लें कि सभी वैक्सीन सुरक्षित हैं। देश में दो तरह की वैक्सीन लगाई जा रही हैं, जल्द ही स्पूतनिक भी लगाई जाएगी। इन सभी का उद्देश्य मानव शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी बनाना है। इन सभी वैक्सीन को अप्रूवल भी इसलिए मिला है, क्योंकि सभी में 50 प्रतिशत से अधिक एंटीबॉडी बनाने की क्षमता है। हम बहुत भाग्यशाली हैं कि पूरे विश्व में केवल पांच देश ही वैक्सीन बना रहे हैं और भारत उनमें से एक है। इसलिए हमें इसमें पिछड़ना नहीं है, जो भी वैक्सीन आपंके आसपास उपलब्ध हो, तुरंत लगवा लें।' 
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