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कोरोना से डायबिटीज: स्टेरॉयड लेने के बाद शुगर बढ़ गया, तो क्या हमेशा के लिए ऐसा रहेगा? विशेषज्ञ से जानें

Sun, 06 Jun 2021 10:05 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock/Pixabay
देश में कोरोना की दूसरी लहर के बीच संक्रमण के मामलों में तेजी से गिरावट देखने को मिल रही है। पिछले 24 घंटे में संक्रमण के 1.14 लाख नए मामले सामने आए हैं, जबकि 2,600 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। हालांकि इस बीच देश में कोरोना का एक नया वैरिएंट भी सामने आ गया है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वह महज सात दिन में ही संक्रमित व्यक्ति का वजन कम कर देता है। इसके अलावा कोरोना से ठीक होने के बाद कई मरीजों में म्यूकरमाइकोसिस की समस्या भी देखने को मिल रही है, जो जानलेवा साबित हो रही है। वहीं, कई लोगों में कोरोना की वजह से डायबिटीज की समस्या भी देखने को मिली है। कहा जा रहा है कि स्टेरॉयड लेने के बाद मरीजों का शुगर लेवल बढ़ जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि स्टेरॉयड लेने के बाद अगर शुगर लेवल बढ़ गया, तो क्या हमेशा के लिए ऐसा रहेगा? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना से जुड़े ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब... 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना की तीसरी लहर की संभावना को कैसे देखती हैं? 
  • दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल की डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, 'कई ऐसी रिपोर्ट आ रही हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि तीसरी लहर शायद बच्चों को ज्यादा प्रभावित करे। लेकिन इसका प्रूव एविडेंस (पुख्ता सबूत) नहीं है और पैनिक न करें। इससे बचने का एक ही तरीका है, कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर का पालन करना, बच्चों को भी इसकी आदत डलवाएं। इससे चाहे तीसरी लहर हो या चौथी, हम संक्रमण से सुरक्षित रहेंगे।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोरोना काल में बच्चे दिन-भर घर में हैं, उन्हें कैसे स्वस्थ रखें? 
  • डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, 'जी हां, पिछले एक साल से बच्चे घर से बाहर नहीं जा पा रहे हैं, क्लास भी घर में बैठे-बैठे ले रहे हैं। लेकिन बच्चे घर में हैं, इस बात से आश्वस्त न हो जाएं, क्योंकि आज देखें तो इससे बच्चों में तरह-तरह की समस्या भी आ रही है। उनका वजन बढ़ रहा है, दिनभर क्लास की वजह से लैपटॉप या मोबाइल के साथ वक्त बिताते हैं या ऐसे भी बेड पर दिनभर बैठ कर फोन और गेम खेलते रहते हैं। इससे आंखों पर भी प्रभाव पड़ता है। माता-पिता को समझना होगा कि उन्हें कुछ ऐसी एक्टिविटी कराएं, जिससे उनका शारीरिक श्रम होता रहे। इसके अलावा उन्हें हेल्दी खाना खिलाएं।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या जिंक लेने से भी म्यूकरमाइकोसिस हो सकता है? 
  • डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, 'जिंक लेने से ऐसी कोई बीमारी नहीं होती है, लेकिन ये दवाइयां भी डॉक्टर की सलाह पर ही लें। फंगस की बीमारी सभी को नहीं होती है, बल्कि जिनकी इम्यूनिटी कम होती है, डायबिटीज है और स्टेरॉयड लेते हैं, उनमें ही इसके केस पाए गए हैं। खासतौर पर ऐसे लोगों में भी, जिन्होंने घर पर ऑक्सीजन ली है, उसमें जो पानी होता है, वो कई बार दूषित हो जाता है। इसलिए सफाई का ध्यान रखें। पैनिक न करें।'  
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कई लोगों में पोस्ट कोविड समस्या लंबे समय तक रह रही है, इसे कैसे दूर करें? 
  • डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, 'इस वक्त देखा जा रहा है कि पोस्ट कोविड सिंड्रोम हो रहा है, इसमें लंबे समय तक शरीर में दर्द, थकान दो महीने तक भी रह रही है। इसे जाने में कई बार वक्त लग जाता है। हालांकि कुछ अलग से नहीं करना है। संतुलित, हेल्दी, ताजा आहार लें। समय पर सोना और व्यायाम करें।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कोविड से पहले डायबिटीज नहीं थी, लेकिन स्टेरॉयड लेने के बाद शुगर बढ़ गया, तो क्या हमेशा के लिए ऐसा रहेगा? 
  • डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, 'स्टेरॉयड ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाता है, सामान्य लोगों में स्टेरॉयड लेने के बाद, ये खुद ही समय के साथ नीचे हो जाता है। इसमें एक या दो हफ्ते का वक्त लग सकता है। इसके बाद भी शुगर लेवल हाई रहता है, तो डॉक्टर से संपर्क करना होगा। कई बार ऐसा होता है कि लोगों में पहले से शुगर लेवल बढ़ा होता है, लेकिन उन्हें पता नहीं होता। ऐसे में स्टेरॉयड लेने पर शुगर लेवल तुरंत और बढ़ जाता है। तब उन्हें आगे डायबिटीज होने की संभावना हो सकती है।'  
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या 100 प्रतिशत वैक्सीनेशन के बाद कोरोना का खतरा टल जाएगा? 
  • डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, 'अगर सभी को वैक्सीन लग जाए तो ये कहना अभी मुश्किल है कि एकदम से कोरोना खत्म हो जाएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि वायरस म्यूटेट करते रहते हैं और अगर नया स्ट्रेन आ जाए, तो हो सकता है हमें नए सिरे से काम करना पड़े। हां, वायरस कमजोर हो सकता है और हर्ड इम्यूनिटी से संक्रमण की गंभीरता को कम कर सकते हैं। लेकिन वायरस जड़ से खत्म होने में समय लग सकता है।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
एक और स्वदेशी वैक्सीन आने वाली है, क्या कहेंगी? 
  • डॉ. रूपाली मलिक कहती हैं, 'ये एक गर्व की बात है कि कोवाक्सीन के बाद एक और स्वदेशी वैक्सीन आ रही है। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने बायोलॉजिकल ई कंपनी से करार किया है। लेकिन वैक्सीन के आने के बाद ही फैक्ट के साथ कुछ कहा जा सकता है। जहां तक वैक्सीन की बात है, यह आरबीडी प्रोटीन सबयूनिट की वैक्सीन है। ये एक रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन होता है। ये वैक्सीन उस प्रोटीन को टारगेट करती है, जिसके द्वारा कोरोना वायरस शरीर के रिसेप्टर से बाइंडिंग करता है। वैक्सीन को उन बाइंडिंग रिसेप्टर को टारगेट करके उनके खिलाफ एंटीबॉडी बनाई गई है, ताकि वायरस शरीर में प्रवेश करता है तो रिसेप्टर से बाइंड न कर पाए। ये कितनी कारगर होगी, ट्रायल पूरे होने के बाद ही कुछ भी कहा जा सकता है।' 
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