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फैक्ट चेक: कोरोना से जान बचा सकती है रेमडेसिविर दवा, जानें वायरल मैसेज की सच्चाई

Wed, 12 May 2021 01:52 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
देश में कोरोना संक्रमण के मामले दिनों-दिन बढ़ते जा रहे हैं और साथ ही मरने वालों का आंकड़ा भी। कई जगहों पर अस्पतालों में बेड की कमी तो है ही, इसके साथ-साथ ऑक्सीजन और कई जरूरी दवाओं की भी कमी हो गई है। ऐसे में मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना की इस दूसरी लहर में हेपेटाइटिस के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली रेमडेसिविर दवा की मांग भी तेजी से बढ़ी है। माना जा रहा है कि इसका इंजेक्शन कोरोना मरीजों के लक्षणों को कम करने में प्रभावी हो सकता है। सोशल मीडिया पर इस दवा को 'जीवन रक्षक दवा' बताया जा रहा है। आइए जानते हैं इसकी सच्चाई क्या है? 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्या 'जीवन रक्षक दवा' है रेमडेसिविर? 
  • दरअसल, कोरोना वायरस को लेकर सोशल मीडिया पर तमाम तरह की बातें फैली हुई हैं, जिसमें से कुछ सच भी हैं और कुछ अफवाह भी। रेमडेसिविर को लेकर भी यह अफवाह फैली हुई है कि यह दवा कोरोना मरीजों की जान बचा सकती है। पीआईबी फैक्ट चेक में यह दावा गलत पाया गया है कि रेमडेसिविर कोरोना की 'जीवन रक्षक दवा' है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
पीआईबी के मुताबिक, 'यह एक प्रयोगात्मक दवा है, जिसे आपातकालीन मंजूरी दी गई है। यह उन लोगों के लिए उचित है जो मध्यम रूप से बीमार हैं और ऑक्सीजन प्राप्त कर रहे हैं। अध्ययन में यह साबित नहीं हुआ है कि इस दवा के इस्तेमाल से कोरोना मरीजों की मृत्यु दर में कमी आई हो।' 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी अपने कोविड-19 प्रबंधन प्रोटोकॉल दस्तावेज में यह साफतौर पर कहा है कि आवश्यकतानुसार और डॉक्टरी सलाह के मुताबिक कोरोना मरीजों पर रेमडेसिविर के उपयोग को मंजूरी दी गई है। कोरोना में जरूरी नहीं है कि इससे मरीजों की जान बचाई जा सके। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
दिल्ली स्थित एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने भी पिछले महीने ही यह कहा था कि रेमडेसिविर न तो जादू की गोली है न ही ऐसी दवा, जिसका उपयोग कोरोना के मृत्यु दर को कम कर सकता है। उन्होंने कहा था कि कोविड-19 के उपचार के दौरान 85-95 फीसदी लोगों को ऑक्सीजन और रेमडेसिविर की आवश्यकता नहीं होती है। यह केवल उन्हीं मरीजों को दिया जाना चाहिए जो अस्पताल में भर्ती हैं या जिन मरीजों में मध्यम और गंभीर स्थिति है और ऑक्सीजन सेचुरेशन 93 से कम है। 
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