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कोरोना वायरस की जांच के लिए किफायती तरीका तैयार, आईसीएमआर से मंजूरी का इंतजार

Thu, 11 Jun 2020 11:15 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस जांच (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PIB/Pixabay
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद(ICMR) ने अबतक कोरोना वायरस की जांच के लिए केवल रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पोलीमरेज चेन रिएक्शन (RT-qPCR) टेस्ट की अनुशंसा की है। वहीं, सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के शोधकर्ताओं ने एक नया टेस्ट विकसित किया है। यह टेस्ट पहले से मौजूद तरीकों से ज्यादा किफायती है और जांच का यह तरीका तकनीकी रूप से बहुत पेचीदा भी नहीं है। इस टेस्ट के लिए रियल टाइम क्वांटेटिव को रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन नेस्टेड पीसीआर की जरूरत नहीं पड़ती है। इस टेस्ट की खास बात है कि पहले से उपलब्ध जांच के तरीकों की अपेक्षा यह नमूनों की पहचान करने में ज्यादा सक्षम है। खासकर वैसी जगह जहां RT-qPCR मशीनें नहीं हैं, वहां ये टेस्ट उपयोगी साबित होगी।
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कोरोना वायरस जांच (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social Media
शोधकर्ताओं ने दोनों टेस्ट के परिणामों की तुलना करने पर पाया कि मानक RT-qPCR टेस्ट में वास्तविक परीक्षण परिदृश्य में पहचान क्षमता 50 फीसदी से कम हो सकती है। ऐसा कई नमूनों में कम वायरस की मौजूदगी के कारण भी हो सकता है। ऐसे में इस कामयाबी निगरानी दक्षता और टेस्टिंग वातावरण को और अधिक कारगर बनाया गया है।
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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
सीसीएमबी के निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा ने कहा- हमने आरटी-एनपीसीआर प्रोटोकॉल को विकसित कर टेस्ट किया है, जिसमें चार सार्स कोविड-2 एम्पलीकॉन्स के प्रवर्धन के लिए एक मल्टीप्लेक्स प्राइमरी आरटी-पीसीआर और एक कंट्रोल ह्यूमन एम्प्लिकॉन के बाद एक सेकंडरी नेस्टर्ड पीसीआर है। हमने आरएनए-अलगाव के बिना आरटी-एनपीसीआर के उपयोग और आरएनए अलगाव के बिना प्रत्यक्ष प्रवर्धन में भी जांच की। यानी कि यह आरएनए को अलग किए बिना भी जांच रिपोर्ट देने में कारगर है। 

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कोरोना वायरस जांच (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social Media
मालूम हो कि नासो फ्रिनजील से, स्वैब नमूनों से अलग किए गए आरएनए को पहले दो RT-qPCR टेस्टों में से एक का उपयोग करके परीक्षण किया गया था। फिर RT-NPCR  का उपयोग करके जांच की गई थी और दोनों के परिणामों की तुलना की गई थी। शोध में पाया गया कि दोनों मानक RT-qPCR टेस्ट एक साथ लेने पर RT-NPCR टेस्ट, रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पोलीमरेज चेन रिएक्शन द्वारा प्राप्त नमूनों में से 90 फीसदी को पहचानने में सक्षम था। इसने 13 फीसदी ऐसे नमूनों का भी पता लगाया, जो नमूनों के बीच पॉजिटिव थे, जबकि मानक RT-NPCR द्वारा निगेटिव बताए गए थे।
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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
इस अध्ययन से RT-NPCR टेस्ट द्वारा प्रायोगिक रूप से मापी गई नकारात्मक दर के आधार पर यह अनुमान लगाया गया था कि 50 फीसदी पॉजिटिव सैंपल वास्तविक परीक्षण परिदृश्य में रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पोलीमरेज चेन रिएक्शन द्वारा सिंगल टेस्ट में पता लगाने से बच सकते हैं। डॉ. मिश्रा ने कहा कि इस नए टेस्ट को आईसीएमआर से मंजूरी मिलने का इंतजार है। हम आईसीएमआर को उन जगहों पर इस टेस्ट का उपयोग करने के लिए कह सकते हैं, जहां कोई RT-qPCR मशीनें नहीं हैं।
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