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Covid-19: वयस्कों की तुलना में बच्चों में कोरोना संक्रमण का कितना खतरा? अध्ययन में सामने आई यह बड़ी जानकारी

Thu, 24 Mar 2022 02:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बच्चों में कोरोना संक्रमण का खतरा - फोटो : iStock
दुनिया के कई देशों में एक बार फिर से बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामले अन्य देशों के लिए अलार्मिंग हैं। चीन और यूके के कई हिस्सों में ओमिक्रॉन के स्लील्थ वैरिएंट (BA.2) के मामले काफी तेजी से बढ़ते रिपोर्ट किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वैसे तो संक्रमितों के लक्षण हल्के स्तर के ही हैं, पर जिस रफ्तार से यह वैरिएंट लोगों को अपना शिकार बना रहा है, यह चिंता बढ़ाने वाली बात हो सकती है। भारत में भी स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को लगातार सुरक्षात्मक उपायों को प्रयोग में लाते रहने की सलाह दे रहे हैं जिससे संक्रमण के प्रसार और जोखिम को कम किया जा सके। हाल ही में देश में 12-18 साल तक के बच्चों के लिए वैक्सीनेशन की भी शुरुआत कर दी गई है।

इस बीच बच्चों में कोरोना के जोखिम को लेकर अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम ने राहत भरी जानकारी दी है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि वयस्कों की तुलना में बच्चों में एंटीबॉडीज अधिक समय तक बनी रह सकती हैं, जो कोरोना संक्रमण के जोखिम से उन्हें सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है। इसके पहले के कुछ अध्ययनों में भी वैज्ञानिक, बच्चों को अधिक सुरक्षित बताते आ रहे हैं। आइए इस अध्ययन की महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं।
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बच्चों में बनी रहती हैं एंटीबॉडीज (सांकेतिक) - फोटो : istock
बच्चों में लंबे समय तक बनी रहती हैं एंटीबॉडीज
जर्नल पेड्रियाट्रिक
में प्रकाशित एक हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने बताया है कि पहले कोरोना के शिकार रह चुके बच्चों में प्राकृतिक रूप से विकसित एंटीबॉडीज कम से कम सात महीने तक प्रभावी रह सकती है। अध्ययन से पता चला है कि कोविड-19 से संक्रमित रह चुके 96 प्रतिशत बच्चों में सात महीने बाद तक एंटीबॉडी बनी रहीं। इस आधार पर शोधकर्ताओं का कहना है कि बच्चों को वयस्कों के मुकाबले कोरोना से जल्दी संक्रमित होने का जोखिम कम होता है।
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बच्चों में संक्रमण का खतरा वयस्कों की तुलना में कम - फोटो : iStock
अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन के लिए, टीम ने टेक्सास में 5-19 वर्ष की आयु के 218 बच्चों के डेटा की जांच की गई। टीकों के रोलआउट से पहले, डेल्टा और ओमिक्रॉन संक्रमण के प्रसार के दौरान तीन बार ब्लड सैंपल लिए गए। सैंपल की जांच और अध्ययन के परिणाम में वैज्ञानिकों ने पाया कि कोविड-19 से संक्रमित रह चुके 96 प्रतिशत बच्चों में संक्रमण के बाद सात महीने तक इस बीमारी के प्रति सुरक्षात्मक एंटीबॉडी प्रभावी थीं। शोधकर्ताओं का कहना है कि प्राकृतिक सुरक्षा के साथ वैक्सीन देकर बच्चों को कोरोना के खतरे से काफी हद तक सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।

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बच्चों में कोविड-19 का जोखिम - फोटो : istock
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
ह्यूस्टन में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास हेल्थ की शोधकर्ता सारा मसीहा कहती हैं, बच्चों में कोरोना के खतरे को जानने के लिए यह अध्ययन काफी महत्वपूर्ण है। एसिम्टोमैटिक, लक्षणों की गंभीरता, स्वस्थ वजन या मोटापा से ग्रसित, या लिंग के आधार पर, यह परिणाम सभी बच्चों में समान देखे गए हैं। बच्चों में लंबे समय तक प्राकृतिक एंटीबॉडीज मौजूद रह सकती हैं। वैक्सीनेशन अतिरिक्त सुरक्षा टूल साबित हो सकता है।
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बच्चों का टीकाकरण हो सकता है काफी असरदार - फोटो : iStock
वैक्सीनेशन से बच्चे होंगे अधिक सुरक्षित
शोधकर्ताओं का कहना है कि बच्चों में भी कोरोना का खतरा रहता है। अमेरिका में अब तक 14 मिलियन से अधिक बच्चों में कोरोना वायरस का सकारात्मक परीक्षण किया जा चुका है, वैक्सीनेशन से उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा दी जा सकती है। हाल ही में भारत सरकार ने देश में 12-18 साल तक बच्चों के लिए तीन टीकों को मंजूरी दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए बच्चों को भी सुरक्षा के सभी उपायों का निरंतर ध्यान रखना चाहिए।


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स्रोत और संदर्भ
Durability of SARS-CoV-2 Antibodies From Natural Infection in Children and Adolescents

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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