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Study: कहीं आप भी तो नहीं करते हैं इन सप्लीमेंट्स का सेवन? ऐसी गलतियां बढ़ा सकती हैं कैंसर का खतरा

Thu, 25 Aug 2022 07:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सप्लीमेंट्स से होने वाले नुकसान - फोटो : iStock
शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए रोजाना आहार के माध्यम से सभी लोगों को पोषक तत्वों के सेवन की सलाह दी जाती है।पोषक तत्वों की कमी कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इसके कारण ऊर्जा के स्तर में कमी से लेकर अंगों की कमजोरी और कई प्रकार के रोगों का जोखिम तक बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पोषक तत्वों की प्राप्ति के लिए हमेशा आहार को स्रोत बनाने पर ही जोर दिया जाना चाहिए, सप्लीमेंट्स का सेवन सिर्फ उन स्थितियों में  ही किया जाना चाहिए, जब किसी वजह से पोषक तत्वों की शरीर में विशेष रूप से कमी हो जाती है। इसके अलावा सप्लीमेंट्स को हमेशा विशेषज्ञों की सलाह के बाद भी सेवन करना चाहिए, क्योंकि कुछ स्थितियों में इनसे भी गंभीर समस्याओं का खतरा हो सकता है।

सप्लीमेंट्स से होने वाले दुष्प्रभावों को जानने के लिए किए गए एक हालिया अध्ययन में विशेषज्ञों ने बड़ा खुलासा किया है। बीएमजे जर्नल में प्रकाशित एक समीक्षा में शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ न्यूट्रिशन सप्लीमेंट्स का एक साथ सेवन करना शरीर के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है। विशेषकर विटामिन-ए और बीटा-कैरोटीन के संयोजन से कैंसर बढ़ने का भी जोखिम पाया गया है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि इस समीक्षा के परिणाम एक बार फिर से इस बात पर जोर देते हैं कि सप्लीमेंट्स को बिना डॉक्टरों के सलाह के सेवन नहीं करना चाहिए। आइए इस अध्ययन के बारे में जानते हैं।
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फेफड़ों के कैंसर का खतरा - फोटो : iStock
सप्लीमेंट्स और कैंसर का जोखिम

कैंसर के जोखिम और इसमें सप्लीमेंट्स की भूमिका को समझने के लिए किए गए अध्ययन में विशेषज्ञों ने पाया कि मौजूदा सबूत कैंसर के जोखिम को कम करने में विटामिन और खनिजों के सप्लीमेंट्स खुराक की भूमिका का समर्थन नहीं करते हैं, इतना ही नहीं कुछ सबूत इनसे होने वाले संभावित नुकसान की ओर जरूर इशारा करते हैं। कुछ सप्लीमेंट्स के एक साथ सेवन को अध्ययनों में शरीर के लिए नुकसानदायक भी पाया गया है।

विशेषज्ञ कहते हैं, एक पुरानी धारणा चली आ रही है कि सप्लीमेंट्स से कैंसर तक के खतरे को कम किया जा सकता है, पर सभी लोगों के लिए यह सही ही हो. ऐसा जरूरी नहीं है। इस शोध ने इस धारणा को खारिज कर दिया है।
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विटामिन ए सप्लीमेंट्स औऱ इसके खतरे - फोटो : istock
अध्ययन में क्या पता चला?

विटामिन-ए और बीटा-कैरोटीन का संयोजन किस प्रकार से कैंसर को जोखिम को बढ़ाने वाला हो सकता है, इसे समझने के लिए शोधकर्ताओं ने 18,314 लोगों पर अध्ययन किया। इसमें धूम्रपान करने और धूम्रपान न करने वाले, दोनों तरह के प्रतिभागी शामिल थे। चार वर्षों तक सभी को प्रतिदिन 30mg बीटा-कैरोटीन और विटामिन-ए की 25,000 IU की मात्रा का सेवन करने को दिया गया। परिणामों की तुलना करने पर, यह पता चला कि धूम्रपान करने वालों और सिगरेट के धुंए के संपर्क में रहने वालों के समूह में कैंसर का जोखिम लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ा हुआ पाया गया।
 

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सप्लीमेंट्स के सेवन को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Pixabay
फेफड़ों के कैंसर का खतरा

द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के अध्ययन में पाया गया कि विटामिन-ए और बीटा-कैरोटीन के संयोजन से धूम्रपान करने वालों या इसके संपर्क में आने वालों में फेफड़ों के कैंसर का खतरा 28 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। आश्चर्यजनक बात यह है कि विटामिन-ए प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट है, बीटा-कैरोटीन पौधे से प्राप्त कैरोटीनॉयड है, फिर भी इसके संयोजन के कारण कैंसर को जोखिम पाया गया है। 
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सप्लीमेंट्स के अधिक सेवन से हो सकता है नुकसान - फोटो : istock
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने बताया कि धूम्रपान करने वालों में लंबे समय तक बीटा-कैरोटीन के सप्लीमेंट्स का अत्यधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है। वैसे अगर आहार के माध्यम से इस पोषक तत्व को प्राप्त किया जाए तो इससे नुकसान नहीं पाया गया है।  बीटा-कैरोटीन के आहार स्रोत सुरक्षित हैं और कुछ प्रकार के कैंसर, यहां तक कि हृदय रोग के जोखिम को कम भी करते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि पोषक तत्वों के लिए सप्लीमेंट्स स्रोत से ज्यादा आहार का सेवन सुरक्षित है। बिना डॉक्टरी सलाह के सप्लीमेंट्स का सेवन करना सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।


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स्रोत और संदर्भ
Serum carotenoids, vitamins A and E, and 8 year lung function decline in a general population

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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