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Covid-19: महामारी खत्म होने के फिलहाल संकेत नहीं, WHO की आने वाले वैरिएंट्स को लेकर बड़ी चेतावनी

Thu, 25 Aug 2022 04:49 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मारिया वान केरकोव (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
कोरोना महामारी पिछले दो साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर गंभीर समस्याओं का कारण बनी हुई है। दुनियाभर में फिलहाल इसके ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स का संक्रमण जारी है। अध्ययनों में ओमिक्रॉन को भले ही कम गंभीर माना जाता रहा हो पर अन्य कोरोनावायरस की तुलना में ओमिक्रॉन वैरिएंट्स की संक्रामकता दर काफी अधिक बताई जा रही है।

इस साल दिसंबर में कोरोना महामारी के तीन साल पूरे हो रहे हैं। इतना समय बीत जाने के बाद भी अब तक वैज्ञानिक इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं खोज पाए हैं कि दुनिया को कब तक कोरोना का कहर झेलना पड़ सकता है, कोरोना महामारी कब खत्म होगी?

इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने आने वाले दिनों में संक्रमण को लेकर एक बड़ा दावा कर दिया है। कोविड मामलों और संक्रमण में होती वृद्धि को देखते हुए डब्ल्यूएचओ की कोविड तकनीकी प्रमुख, मारिया वान केरखोव कहती हैं कि फिलहाल कोरोना इतनी जल्दी खत्म होता नजर नहीं आ रहा है।  भविष्य में कोरोना के अधिक संक्रमणीय रूप सामने आ सकते हैं, सभी लोगों को उससे सुरक्षित रहने का प्रयास करते रहने की आवश्यकता है।

महामारी विज्ञानी का कहना है कि भले ही हम अभी कोरोना को हल्के में लेने की गलती कर रहे हैं, पर यह भारी पड़ सकती है। इस वजह से कोरोना को नए म्यूटेशन करने का मौका मिल जा रहा है जो आने वाले समय में यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं कि कोरोना के आने वाले वैरिएंट्स की प्रकृति को लेकर और क्या दावा किया गया है?
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कोरोना वैरिएंट्स में आ रहे हैं म्यूटेशन - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस में हो चुके हैं कई म्यूटेशन

साल 2019 के आखिर में चीन से नोवेल कोरोना वायरस की शुरुआत हुई थी, तब से अब तक कोरोनावायरस में कई बार म्यूटेशन हो चुका है। हर म्यूटेशन के साथ वायरस कुछ नई प्रकृति लेकर संक्रमण बढ़ाने का कारण बनता जा रहा है। अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और ओमिक्रोन जैसे अब तक कई वैरिएंट्स और इनके सब-वैरिएंट्स सामने आ चुके हैं। डेल्टा वैरिएंट्स का सबसे पहले भारत में पता चला था और यह अब तक का सबसे खतरनाक माना जा रहा था, वहीं मौजूदा समय में दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स के कारण संक्रमण जारी है। इसे अति संक्रामकता दर वाला बताया जा रहा है। डॉ केरखोव ने भविष्य में और अधिक गंभीर रूपों की चेतावनी दी है।
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कोरोना के सब-वैरिएंट्स का बढता संकट - फोटो : Pixabay
ज्यादातर देशों में ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स के केस

इस साल की शुरुआत से ही ओमिक्रॉन वैरिएंट का ही असर देखा जा रहा है। इसे डब्ल्यूएचओ ने 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न' के रूप में वर्गीकृत किया है। ओमिक्रॉन में अब तक कई म्यूटेशन हो चुके हैं। समय के साथ हो रहे म्यूटेशन इसे शरीर में वैक्सीनेशन और संक्रमण के कारण बनी प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा देने वाला बनाते जा रहे हैं।

मारिया वैन केरखोव द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, ओमिक्रोन वायरस दुनियाभर के कई देशों में प्रमुख खतरे के रूप में जारी है, जिनमें से बीए.5 संस्करण 121 देशों में प्रभावी है और बीए.4 को 103 देशों में संक्रमण का कारण माना जा रहा है। BA.4 और BA.5 को ओमिक्रॉन वैरिएंट के दो सबसे व्यापक सब-वैरिएंट्स हैं।

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- फोटो : Pixabay
अधिक संक्रामकता दर वाले होंगे आने वाले वैरिएंट्स

डॉ केरखोव ने सावधान करते हुए बताया है कि भविष्य के वैरिएंट्स अधिक संक्रामकता दर वाले होंगे और इनकी प्रतिरक्षा से बचने की क्षमता भी अधिक हो सकती है। लेकिन यह कितने गंभीर रोगों का कारण बनेंगे इस बारे में स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है। डॉ केरखोव कहती हैं, डब्ल्यूएचओ हमेशा टेस्टिंग पर जोर देता रहा है ताकि संक्रमण का जल्द पता लगाया जा सके और यदि कोई नया वैरिएंट लोगों के बीच आया हो तो समय रहते उसकी पहचान की जा सके। हमें भविष्य में कोरोना के संभावित संकट को लेकर हमेशा तैयार रहने की जरूरत है।
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वैक्सीनेशन बहुत जरूरी - फोटो : Pixabay
वैक्सीनेशन पर ध्यान देना बहुत आवश्यक

डॉ केरखोव कहती हैं, वैक्सीनेशन ही है जिसने न सिर्फ कोरोना को काफी हद तक कमजोर किया है साथ ही लोगों की जान भी बचाई है। कोविड-19 के टीके गंभीर बीमारी को रोकने में अविश्वसनीय रूप काम कर रहे हैं। सभी देश के सरकारों को वैक्सीनेशन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। अब भी कई देशों में अधिक जोखिम वालों का वैक्सीनेशन नहीं हो पाया है, इस पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। जिनका वैक्सीनेशन हो चुका है उन्हें कोविड से बचाव के सभी आवश्यक उपाय करते रहने चाहिए, वैक्सीनेशन और कोविड से बचाव के उपाय ही आपको भविष्य में सुरक्षित रखने में सहायक होंगे।


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नोट:
यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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