फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Study: इस घरेलू औषधि से कम हो सकता है पुरुषों में सबसे कॉमन कैंसर का खतरा, शोध में दिखे बेहतर परिणाम

Fri, 01 Sep 2023 05:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को समझिए - फोटो : istock
वर्षों से कई प्रकार की बीमारियों के इलाज के लिए घरेलू औषधियों को प्रयोग में लाया जाता रहा है। अध्ययनों में भी पाया गया है कि हमारे किचन में मौजूद कई औषधियों-मसालों में प्राकृतिक गुण होते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और इंफ्लामेशन, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं को कंट्रोल करने में सहायक हो सकते हैं। दालचीनी ऐसी ही एक अति प्रभावी औषधि मानी जाती है जिसका वर्षों से मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। सर्दी-जुकाम जैसी फ्लू की समस्या हो या इम्यून सिस्टम को मजबूत करना, इसके लिए भी दालचीनी का सेवन किया जाता रहा है।

पर क्या आप जानते हैं कि ये औषधि पुरुषों में सबसे कॉमन प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने में आपके लिए लाभकारी हो सकती है? एक नवीनतम अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि दालचीनी में मौजूद कई एक्टिव कंपाउंड्स प्रोस्टेट कैंसर को रोक सकते हैं।

गौरतलब है लाइफस्टाइल में गड़बड़ी के कारण पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा काफी तेजी से बढ़ता हुआ रिपोर्ट किया जा रहा है। फेफड़ों के कैंसर के बाद, प्रोस्टेट कैंसर अमेरिकी पुरुषों में कैंसर से होने वाली मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है। 41 में से लगभग एक व्यक्ति की मौत प्रोस्टेट कैंसर के कारण हो जाती है। आइए जानते हैं किए दालचीनी से इसके जोखिमों को कैसे कम किया जा सकता है?
विज्ञापन

2 of 5
दालचीनी से प्रोस्टेट कैंसर में लाभ - फोटो : istock
दालचीनी से कम हो सकता है प्रोस्टेट कैंसर का खतरा

हैदराबाद स्थित आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (एनआईएन) द्वारा किए गए शोध में दालचीनी को प्रोस्टेट कैंसर से बचाव के लिए कारगर पाया गया है। चूहों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि जिन चूहों ने मौखिक रूप से दालचीनी का सेवन किया, उनमें इसके एक्टिव कंपाउंड्स- सिनामाल्डिहाइड और प्रोसायनिडिन बी2 के कारण प्रारंभिक चरण के प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम कम हो गया।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इंसानों में भी इसके सकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं।
विज्ञापन

3 of 5
प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को समझिए - फोटो : istock
अध्ययन में क्या पता चला?

इंटरनेशनल पीर रिव्यूड जर्नल 'कैंसर प्रिवेंशन रिसर्च' में प्रकाशित अध्ययन में नर चूहों में दालचीनी की कीमोप्रिवेंटिव प्रभावकारिता का आकलन किया गया है। 

अध्ययन के दौरान चूहों को आहार के माध्यम से दालचीनी या इसके बायोएक्टिव यौगिक दिए गए, 16 सप्ताह तक यह प्रक्रिया चलती रही। इस दौरान अध्ययन लेखकों ने पाया कि दालचीनी या इसके सक्रिय यौगिकों को खिलाने से 60-70 प्रतिशत चूहों में प्रोस्टेट विकारों का जोखिम काफी कम हो गया। 

4 of 5
प्रोस्टेट कैंसर का इलाज जरूरी - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

एंडोक्रिनोलॉजी डिवीजन की प्रमुख आयशा इस्माइल कहती हैं, "हमने कीमोप्रिवेंटिव प्रभाव के लिए संभावित तंत्र को समझने की कोशिश की और देखा कि दालचीनी और इसके एक्टिव कंपाउंड्स ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम कर सकते हैं। इसके अलावा प्रोस्टेट ग्रंथि में कैंसर कोशिकाओं के प्रसार को कम करने में भी इसके बेहतर परिणाम देखे गए हैं।

दिलचस्प बात यह है कि लेखकों ने पाया कि चूहों के बोन मिनरल कंटेट पर इसका लाभकारी प्रभाव और विकृति में कमी भी देखी गई। जिसका मतलब है कि हड्डियों की समस्याओं में भी इसके लाभ हो सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
दालचीनी कई प्रकार से स्वास्थ्य के लिए लाभकारी - फोटो : iStock
दालचीनी के कई स्वास्थ्य लाभ

आईसीएमआर-एनआईएन के निदेशक हेमलता आर कहते हैं, आमतौर पर व्यंजनों में उपयोग किए जाने वाले भारतीय मसालों को लेकर पहले के अध्ययनों में भी कई प्रकार के फायदों का जिक्र मिलता है। दालचीनी के कुछ घटक कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोक सकते हैं। दालचीनी की एंटी इंफ्लामेटरी गुण सेलुलर स्ट्रेस और क्षति को कम करने में भी भूमिका निभाती हैं, जो कैंसर के विकास से जुड़े कारक हैं।

इसके पहले के अध्ययनों में दालचीनी को टाइप-2 डायबिटीज को कंट्रोल करने और शरीर से इंफ्लामेशन को कम करने में भी लाभकारी पाया गया था।



--------------
स्रोत और संदर्भ
Anti-cancer effects of cinnamon: Insights into its apoptosis effects

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें