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क्रोनिक स्ट्रेस बन सकता है इन खतरनाक बीमारियों की वजह, रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी पड़ता है असर

Mon, 05 Oct 2020 11:10 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सोचिए...सोमवार का दिन है, आप ऑफिस पहुंचने में लेट हो रहे हैं, मेट्रो स्टेशन पर पैर रखने की जगह नहीं है, और तभी काफी इंतजार के बाद एक मेट्रो आती है...। दरवाजे खुलते ही आप ट्रेन में दाखिल हो जाते हैं और तभी आपके जहन में आता है कि आपने गलत ट्रेन पकड़ ली है। अब आप क्या करेंगे? सामान्यत: जिस पल आपको अहसास होगा कि आप गलत मेट्रो में चढ़ गए हैं, आप उसी पल बाहर निकलने की कोशिश करेंगे। अगर दरवाजे बंद हो गए होंगे तो आप पता करेंगे कि अगला स्टेशन कौन सा है, और किस स्टेशन पर उतरकर वहां से ऑफिस जाने के लिए मेट्रो मिलेगी। अगली मेट्रो कितनी देर में ऑफिस पहुंचाएगी और इस तरह आप कितने मिनट की देरी से अपने दफ्तर पहुंचेंगे। 

ये सब करने में संभवत: आपको कुछ सेकेंड का टाइम लगेगा। इसके बाद आप ये सोचेंगे कि ऑफिस लेट पहुंचने पर क्या होगा और किसे मैसेज किया जा सकता है...आदि आदि। आखिरकार आप सही मेट्रो पकड़कर ऑफिस पहुंच जाएंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत मेट्रो में चढ़ने से लेकर सही मेट्रो पकड़ने के बीच आपने जिस तनाव को झेला, उसका असर आपके शरीर में क्या हुआ होगा? क्यों आपका दिमाग इतनी तेजी से काम कर रहा था या क्यों आप इतनी फुर्ती से भागकर सही दिशा में जाने वाली मेट्रो पकड़ पाए? 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इस दौरान आपके शरीर में जो कुछ हुआ, वो सब कुछ उस हिरन के शरीर में भी होता है जब एक चीता उसका पीछा कर रहा होता है। आपका दिमाग भी ठीक यही करता है - जब आपको अपनी जान बचाने के लिए तेज दौड़ने की जरूरत होती है तो आप तेज दौड़ते हैं, जब आपको हिम्मत की जरूरत होती है तो आपमें हिम्मत आती है और जब आपको अंधेरे में देखना होता है तो आपकी पुतलियां बड़ी हो जाती हैं।

सरल शब्दों में कहें तो जब दिमाग के सामने एक तनावभरी स्थिति पैदा होती है तो वह शरीर की ऊर्जा को दूसरी जगहों से हटाकर तनावभरी स्थिति से निपटने में लगाता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई आपके ऊपर चाकू से वार करने जा रहा होगा तो आपका दिमाग आपके पैरों या जांघों में इतनी ताकत पहुंचाएगा कि आप वहां से भाग सकें। उस मौके पर दिमाग दिन में किए गए भोजन को पचाने में ऊर्जा खर्च नहीं करेगा या किसी चोट को ठीक करने में ऊर्जा नहीं लगाएगा, क्योंकि वो मौका जान बचाने का होता है। ऐसे में ये कहा जा सकता है कि कम मात्रा में तनाव या स्ट्रेस आपके लिए जरूरी है, लेकिन अगर स्ट्रेस देने वाली घटनाएं बार-बार होने लगीं तो क्या होगा और ये कब क्रोनिक स्ट्रेस में तब्दील हो सकता है।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्रोनिक स्ट्रेस क्या होता है?

दिल्ली के सेंट स्टीफेंस अस्पताल से जुड़ीं साइकेट्रिस्ट डॉक्टर रुपाली बताती हैं कि 'स्ट्रेस एक मनोवैज्ञानिक और शारीरिक प्रतिक्रिया है जो कि असामान्य और मुश्किल परिस्थितियों में सामने आती है।' सरल शब्दों में कहें तो स्ट्रेस या तनाव होने की वजहें रोजमर्रा की घटनाएं हो सकती हैं। 

उदाहरण के लिए, किसी को प्रपोज करना, इंटरव्यू देने जाना, ब्रेकअप होना, आईफोन गिर जाना, नौकरी से निकाले जाने की चेतावनी मिलना, बच्चे को चोट लगना, बाल गिरना, पेट साफ न होना या मोटापा बढ़ना आदि आदि। लेकिन अगर तनाव का ये दौर लंबा चलता है तो इससे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पर असर होने लगता है, जिससे आपको डायबिटीज, दिल की बीमारी, अल्सर समेत तमाम मानसिक समस्याएं जैसे कि एंग्जाएटी और डिप्रेशन आदि हो सकती हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डॉ. रुपाली कहती हैं, 'कुछ मात्रा में स्ट्रेस अच्छा होता है। क्लिनिकल भाषा में इसे पॉजिटिव स्ट्रेस कहते हैं। ये आपको आगे बढ़ने में मदद करता है, लेकिन जब यही स्ट्रेस आपके सोचने की शक्ति कम कर देता है, आपको पैरालाइज कर देता है तो ये नकारात्मक स्ट्रेस हो जाता है। नकारात्मक स्ट्रेस की प्रतिक्रिया हमारे दिमाग से आती है। हमारे दिमाग में एक सेंटर होता है हाइपोथेलमस, जो कई शारीरिक गतिविधियों और भावनाओं को नियंत्रित करता है। ये हमारे ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम का भी सेंटर होता है। ऐसे में स्ट्रेस जब भी आता है तो तीन तरह से नजर आता है। इनमें एंग्जाइटी लक्षण, शारीरिक लक्षण, और भावनात्मक लक्षण शामिल होते हैं। एंग्जाइटी लक्षण में व्यक्ति बैचेन रहता है, अपना ध्यान एक जगह नहीं लगा पाता है, कई बार ऐसा लगता है कि जैसे व्यक्ति का दिमाग सुन्न हो गया हो, वो कोई प्रतिक्रिया नहीं दे पा रहा हो।' 

डॉक्टर रुपाली के अनुसार शारीरिक लक्षण में ये आपके शरीर पर असर करता है जैसे आपके दिल की धड़कने तेज हो जाती हैं, आपको लगता है कि टॉयलेट बार-बार जाना है, गला सूखने लगता है, जी मिचलाने लगता है या ऐसा लगता है जैसे पेट खराब हो गया हो। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्रोनिक स्ट्रेस अपनी गिरफ्त में कैसे लेने लगता है?

ये नकारात्मक स्ट्रेस आपके शरीर पर असर दिखाने लगता है और उसके गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं। डॉक्टर ये भी बताते हैं कि लगातार तनाव में रहने की वजह से लोग बार-बार बीमार होने लगते हैं और उन्हें इरेटब बाउल सिंड्रोम जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। डॉ. रुपाली बताती हैं, 'लोगों को क्रोनिक स्ट्रेस की स्थिति में साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर का सामना करना पड़ता है। इसका मतलब ये हुआ है कि जब आपके जहन का असर शरीर पर पड़ने लगता है तो कई तरह की समस्याएं सामने आती हैं, जिनमें एक समस्या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम है, दूसरा एसिडिटी या गैसट्राइटिस के लक्षण आना, कई बार कुछ लोगों में अस्थमा होता है तो वो दिक्कत देने लगता है।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डॉ. रुपाली शिवलकर इसे एक उदाहरण से समझाती हैं कि उनके पास एक मामला आया था। वे कहती हैं, 'ये व्यक्ति सरकारी नौकरी में थे और काफी दिनों से कब्ज की समस्या से परेशान थे। इनका गेस्ट्रो में इलाज भी चल रहा था, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। छह से आठ महीने के बाद वहां के डॉक्टर ने कहा कि वह मनोचिकित्सक की मदद लें। ये शख्स जब हमारे पास आए तो वो न तो खा पा रहे थे, न सो पा रहे थे। इन शख्स की नौकरी ऐसी थी कि आपको चौकन्ना रहने की जरुरत थी, कभी दिन की ड्यूटी तो कभी रात की, घंटों-घंटों खड़े रहना, तबीयत खराब होने की वजह से छुट्टी भी ले चुके थे और मेमो भी मिल चुका था। इन्हें डर लग रहा था कि ऐसे ही चलता रहा तो नौकरी हाथ से जा सकती है यानी बीमारी के साथ-साथ नौकरी जाने का भी तनाव।' 

'जब हमने बात की तो समझ आया कि वे तनाव की समस्या से जूझ रहे थे, जिसका असर उनके शरीर के साथ-साथ परिवारिक जीवन और काम पर भी पड़ रहा था। हालांकि वे दवाएं ले रहे थे कब्ज की समस्या को दूर करने की, लेकिन समस्या की जड़ तनाव था।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
वैवाहिक संबंधों पर असर

ये स्ट्रेस शरीर के साथ-साथ आपके वैवहिक संबंधों पर भी असर डालता है, जिससे आपकी सेक्स में रूचि कम हो जाती है और प्रजनन में भी गंभीर समस्या पैदा करता है। तीस साल तक स्ट्रेस पर शोध करने वाले स्टेनफॉर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. रॉबर्ट सोप्लोस्की ने अपनी किताब 'व्हाय जीब्राज डोंट गेट अल्सर्स' में इस विषय को विस्तार से समझाया है। 

वे लिखते हैं, 'अगर आप लगातार स्ट्रेस में रहते हैं तो प्रजनन से जुड़े कई डिसऑर्डर सामने आ सकते हैं। महिलाओं में मेंस्ट्रुअल साइकिल अनियमित हो सकती है या पूरी तरह बंद भी हो सकती है, पुरुषों में स्पर्म काउंट और टेस्टोस्टोरेन लेवल कम हो सकता है और महिला एवं पुरुष दोनों में सैक्सुअल बिहेवियर कम हो जाता है।' 

लेकिन एक सवाल ये पैदा होता है कि क्या स्ट्रेस आपको बार-बार बीमार कर सकता है। इसके जवाब में डॉ. रुपाली बताती हैं, 'स्ट्रेस की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता की प्रतिक्रियाएं अनियमित हो जाती हैं। ऐसे में आप बार-बार बीमार पड़ सकते हैं। आपने सुना होगा कि डायबिटीज पेशेंट में डिप्रेशन ज्यादा होता है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और स्ट्रेस एक जाना माना फैक्टर है जो कि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है।' ऐसे में कई बार ऐसा होता है कि आप किसी अन्य वजह से तनाव में रहते हैं और उसकी वजह से नए तनाव पैदा होने लगते हैं। ऐसे में तनाव का एक दुष्चक्र शुरू होता है जिससे आप बाहर नहीं निकल पाते हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस (निम्हंस) ने 2016 में देश के 12 राज्यों में एक सर्वेक्षण करवाया था। इसके बाद कई चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं।  भारत के 15 करोड़ लोगों को किसी न किसी मानसिक समस्या की वजह से तत्काल डॉक्टरी मदद की जरूरत है। वहीं, साइंस मेडिकल जर्नल लैंसेट की 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 10 जरूरतमंद लोगों में से सिर्फ एक व्यक्ति को डॉक्टरी मदद मिलती है। स्ट्रेस या तनाव अब व्यस्कों से होते हुए बच्चों को भी अपना शिकार बनाने लगा है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
स्ट्रेस का सामना कर रहे हैं तो क्या करें?

अगर आप स्ट्रेस का सामना कर रहे हैं तो आप निम्नलिखित काम कर सकते हैं- 
  • सुबह टहलना शुरू करें या एक्सरसाइज शुरू करें। 
  • अपने दोस्तों या परिवार से अपने मन की चिंताएं साझा करें।
  • अपने लिए समय निकालें, जिसमें आप काम या काम से जुड़ी बातें न सोचें। 
  • शराब, सिगरेट और कैफीन की लत लगाने से बचें। 
  • अन्य लोगों की मदद करें। 
  • सकारात्मक रहने की कोशिश करें। 

अगर ये सब करने से आपकी समस्या हल नहीं होती है तो आप साइकेट्रिस्ट से संपर्क कर सकते हैं। तनाव झेलने की क्षमता को लेकर अपनी तुलना किसी अन्य शख्स से करना बेमानी है क्योंकि इससे तनाव ही होगा। 
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