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COPD: युवाओं में तेजी से बढ़ रही है सांस की गंभीर बीमारी, ये दुनियाभर में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण

Thu, 17 Oct 2024 06:49 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांस की समस्या - फोटो : Freepik.com
शरीर के सभी अंग बेहतर तरीके से काम करते रहें और स्वस्थ रहें, इसके लिए जरूरी है कि ऑक्सीजन का संचार ठीक से होता रहे। इसमें फेफड़ों के स्वस्थ रहने की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हालांकि समय के साथ लोगों की बिगड़ती दिनचर्या, खान-पान में समस्याओं के कारण फेफड़ों से संबंधित कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।

क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) ऐसी ही एक समस्या है जिसके बढ़ते जोखिमों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट करते हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि 40 से कम आयु वालों में भी इसका तेजी से निदान बढ़ गया है।

साल 2020 के आंकड़ों के मुताबिक दुनियाभर में सीओपीडी के अनुमानित 480 मिलियन (48 करोड़) मामले थे, जो वैश्विक आबादी का लगभग 10.6% है। इसके अलावा ये बीमारी हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बनती है। साल 2019 में 3.23 मिलियन (32.3 लाख) लोगों की इससे मौत भी हो गई।

आइए जानते हैं कि सीओपीडी की समस्या के क्या कारण हैं और इससे बचाव के लिए क्या किया जा सकता है?
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फेफड़ों की बीमारी - फोटो : Adobe Stock
दुनियाभर में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक सीओपीडी दुनियाभर में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण है। सीओपीडी के 70% से अधिक मामले तम्बाकू-धूम्रपान के कारण होते हैं। सीओपीडी फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाली बीमारी है, जिसमें वायुमार्ग के अंदर सूजन और जलन होने लगती है। इस बीमारी के कारण फेफड़ों में हवा का प्रवाह भी बाधित हो जाता है।

अध्ययनों से पता चलता है कि धुएं, धूल या रसायनों के लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण सीओपीडी रोग होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। समय पर इस बीमारी का पता न चलने या इलाज न होने के कारण गंभीर जटिलताओं और मौत तक का भी खतरा हो सकता है।
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सीओपीडी की दिक्कत क्यों होती है? - फोटो : Freepik.com
कैसे जानें आपको हो गई है ये बीमारी?

सीओपीडी के लक्षण आमतौर पर तब तक प्रकट नहीं होते जब तक कि फेफड़ों को बहुत ज्यादा नुकसान न हो जाए। हालांकि कुछ संकेतों पर ध्यान देते रहने से इस बीमारी का पता लगाना आसान हो सकता है। सीओपीडी के कारण सांस लेने में परेशानी होती है, खासकर शारीरिक गतिविधियों के दौरान। इसके साथ बलगम के साथ बहुत ज्यादा खांसी आना, सीने में जकड़न या भारीपन होना, बार-बार फेफड़ों में संक्रमण होना, बिना किसी कारण के वजन कम होना भी इस स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।

गंध, ठंडी हवा, वायु प्रदूषण, सर्दी या संक्रमण के कारण ये लक्षण ट्रिगर हो सकते हैं।

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फेफड़ों को प्रभावित करने वाली समस्या - फोटो : Freepik.com
सीओपीडी की दिक्कत क्यों होती है?

सीओपीडी को मुख्यरूप से धूम्रपान के कारण होने वाली समस्या के रूप में जाना जाता है। कार्यस्थल में रसायन, धुंआ, वाष्प और धूल के संपर्क में लंबे समय तक रहना भी सीओपीडी का एक कारण हो सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों को अस्थमा की दिक्कत रही है, उन्हें इसे कंट्रोल में रखने के लिए प्रयास करते रहना चाहिए। इसके कारण भी सीओपीडी की दिक्कत हो सकती है। 

कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि सीओपीडी की गंभीर स्थिति हार्ट अटैक जैसी जानलेवा समस्याओं का भी कारण बन सकती है। इससे लंग्स कैंसर भी हो सकता है।
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तंबाकू, धूम्रपान से बनाएं दूरी - फोटो : Freepik.com
सीओपीडी से बचाव और इलाज 

अधिकांश मामलों में सीओपीडी सीधे सिगरेट पीने से जुड़ी समस्या होती है, सीओपीडी को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है कि धूम्रपान न करें। रसायनों-प्रदूषण से बचाव और दिनचर्या को ठीक रखकर भी सीओपीडी से बचा जा सकता है। कुछ प्रकार की दवाओं, थेरेपी आदि के माध्यम से लक्षणों को बिगड़ने से रोका जा सकता है। समय पर इसकी पहचान हो जाने से सीओपीडी के कारण होने वाली जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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