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World Sleep Day: ब्लड टेस्ट बता देगा आपका बच्चा ठीक से सोता है या नहीं, इन लक्षणों पर हो जाएं अलर्ट

Fri, 13 Mar 2020 10:43 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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आपके बच्चे की नींद पूरी हुई या नहीं? - फोटो : Pixabay/AmarUjala
आपका बच्चा पूरी नींद ले पा रहा है या नहीं, इसका पता लगाना बेहद कठिन होता है। खासकर छोटे बच्चों के मामले में यह और मुश्किल होता है, क्योंकि वे बता नहीं पाते। कई बार आप गौर करते हैं कि आपके बच्चे के व्यवहार में चिड़चिड़ापन दिखता है, या वह दिनभर रोता रहता है। छोटी-छोटी बात पर चिढ़ जाता है। ऐसे में आप बच्चे को डांट लगा बैठते है। ऐसा करना सही नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार, अब एक ब्लड टेस्ट से पता चल जाएगा कि आपके बच्चे की नींद पूरी हुई या नहीं! आइए, जानते हैं इस बारे में:
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Sleeping Baby - फोटो : Pixabay
हमें हर दिन छह से आठ घंटे की नींद जरूरी होती है, जबकि बच्चों को उम्र के अनुसार इससे कहीं ज्यादा नींद जरूरी होती है। हमें ये बात पता होने के बावजूद भी अपनी नींद को लेकर बहुत गंभीर नहीं होते और बच्चों को तो नींद का महत्व पता नहीं होता। ऐसे में पता लगाना मुश्किल होता है कि बच्चे की नींद पूरी हुई या नहीं! नई रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने कहा है कि अब ब्लड टेस्ट से इसका पता लगाया जा सकेगा।b
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Sleeping Baby - फोटो : Pixabay
इटली के फूड साइंसेज ऑफ द नेशनल रिसर्च काउंसिल ने यह टेस्ट तैयार किया है। वैज्ञानिकों ने इसके लिए खून में मौजूद सूक्ष्म अणु माइक्रो आरएनए का विश्लेषण किया। वैज्ञानिकों का कहना है कि नींद की मात्रा के हिसाब से शरीर में माइक्रो आरएनए अणुओं की संख्या में बदलाव आता है। बता दें कि माइक्रो आरएनए शरीर के उन जीन्स को नियंत्रित करता है जो सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एक्सपेरिमेंटल फिजियोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोध के नतीजों में वैज्ञानिकों ने बताया कि दो अलग-अलग माइक्रो आरएनए में बदलाव से यह आंदाजा लग सकता है कि किस बच्चे ने पर्याप्त नींद ली है। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों की नींद पूरी नहीं होती, उनके खून में एमआईआर-26बी-3पी नामक माइक्रो आरएनए का स्तर करीब 15 फीसदी तक ज्यादा होता है। दूसरी तरफ, जो बच्चे पूरी नींद लेते हैं, उनके खून में एमआईआर-485-5पी नामक माइक्रो आरएनए का स्तर 50 फीसदी तक ज्यादा होता है।
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Sleeping Baby - फोटो : Pixabay
फेबियो लाउरिया और उनके सहयोगियों ने स्पेन, इटली, साइप्रस, जर्मनी, बेल्जियम, एस्टोनिया, हंगरी और स्वीडन के 111 बच्चों पर यह शोध किया था।  शोध करने वालों में शामिल लाउरिया ने कहा कि नतीजों से पहली बार पता चला है कि स्कूल जाने वाली उम्र के बच्चों में नींद की मात्रा से माइक्रो आरएनए के स्तर में बदलाव आता है। इससे डॉक्टर बच्चों में नींद की समस्या सहित अन्य बीमारियों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।
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Child Sleep, Sleeping Child, Child, Baby - फोटो : Pixabay

किस उम्र के बच्चों को कितनी नींद लेनी चाहिए?

नेशनल हेल्थ सोसाइटी के अनुसार,
  • तीन साल की उम्र तक बच्चों को हर दिन 12 घंटे सोना चाहिए
  • उम्र में एक साल की बढोतरी के साथ नींद की मात्रा में 15 मिनट की कमी होनी चाहिए
  • 16 साल की अवस्था में उनके लिए 9 घंटे की नींद जरूरी होती है
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Child Sleep, Sleeping Child, Child, Baby - फोटो : Pixabay
आप भी बच्चों पर गौर करना शुरू करें कि क्या वह पूरी नींद ले पा रहा है?
  • उसके व्यवहार में चिड़चिड़ापन तो नहीं आ गया है?
  • बच्चा छोटा है तो वह दिनभर रोता तो नहीं रहता है?
  • समय से खाने में रुचि कम तो नहीं हो गई है?
  • वह सुबह देर तक तो नहीं सोने लगा है? हो सकता है रात में देर तक जागता हो!
बच्चों की नींद के बारे में पता लगा पाने वाले ब्लड टेस्ट से माता-पिता और अभिभावकों को बड़ी राहत होगी।
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