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Cervical Cancer: हर महिला को जानना जरूरी, सर्वाइकल कैंसर और एचपीवी वैक्सीन से जुड़े 6 जरूरी सवाल-जवाब

Mon, 16 Mar 2026 05:18 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक गंभीर लेकिन काफी हद तक रोका जा सकने वाला कैंसर है। यह मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के संक्रमण से जुड़ा होता है। आइए इससे जुड़े कुछ जरूरी सवाल-जवाब जान लेते हैं।
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एचपीवी वैक्सीनेशन को लेकर जरूरी सवाल - फोटो : Adobe Stock
कैंसर का खतरा सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। महिला हो या पुरुष सभी को कैंसर के जोखिमों को लेकर सावधान रहने की सलाह दी जाती है। ये बीमारी हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बनती है। अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम सबसे अधिक होता है, इसके साथ-साथ सर्वाइकल कैंसर भी बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है। 

विशेषज्ञ कहते हैं, सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक गंभीर और जानलेवा कैंसर है, हालांकि अच्छी बात ये है कि अगर समय रहते सावधानी बरती जाए तो इसे काफी हद तक रोका जा सकता है।

ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के संक्रमण के कारण होने वाले इस कैंसर के खतरे को एचपीवी वैक्सीन के जरिए कम किया जा सकता है। भारत में भी इसके मामले लगातार सामने आते रहे हैं, जिसकी रोकथाम के लिए सरकार ने 14 साल और उससे अधिक उम्र की लड़कियों के लिए पूरे देश में फ्री एचपीवी वैक्सीनेशन प्रोग्राम शुरू की है।

सर्वाइकल कैंसर और एचपीवी वैक्सीनेशन को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं। आइए ऐसे ही कुछ कॉमन सवालों के जबाव जानते हैं।
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सर्वाइकल कैंसर और इसका खतरा - फोटो : Amar Ujala
अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. शेखर गर्ग कहते हैं, ये कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में होता है। आंकड़े बताते हैं कि हमारे देश में हर 8 मिनट में एक महिला की इस कैंसर से मौत हो जाती है। इसी वजह से अब सरकार इसकी रोकथाम के लिए एचपीवी वैक्सीनेशन पर जोर दे रही है। हालांकि इस वैक्सीन को लेकर लोगों के मन में कई सारे सवाल हैं।


1. कैसे जानें सर्वाइकल कैंसर तो नहीं हो गया?

डॉक्टर कहते हैं, सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती चरण में अक्सर लक्षण नहीं दिखते। हालांकि शरीर में कुछ बदलावों पर ध्यान देना चाहिए।
 
  • पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग
  • यौन संबंध के बाद रक्तस्राव
  • मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग
  • बदबूदार या असामान्य डिस्चार्ज
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एचपीवी के टीके लगवाने की सलाह - फोटो : Adobe stock
2. सर्वाइकल कैंसर से बचाव कैसे संभव है?

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के दो प्रमुख तरीके प्रभावी हो सकते हैं।

एचपीवी वैक्सीनेशन और नियमित स्क्रीनिंग (पैप स्मीयर टेस्ट) की मदद से आप इसके खतरे को कम कर सकते हैं। पैप स्मीयर टेस्ट से सर्विक्स की कोशिकाओं में होने वाले शुरुआती बदलावों का पता चल जाता है।


3. एचपीवी वैक्सीन कैसे काम करती है?

एचपीवा वैक्सीन शरीर में एचपीवी वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने में मदद करती है, जिससे एचपीवी संक्रमण का खतरा कम होता है। यह वैक्सीन संक्रमण होने से पहले ज्यादा प्रभावी होती है, इसलिए इसे किशोरावस्था में लगवाना बेहतर माना जाता है।

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एचपीवी वैक्सीनेशन के बारे में जानिए - फोटो : Adobe stock
4. सरकारी और प्राइवेट वैक्सीन में क्या अंतर है?

वैक्सीन की प्रभावशीलता में कोई अंतर नहीं है। सरकारी कार्यक्रमों में ज्यादातर भारत में बनी सर्वावैक वैक्सीन दी जाती है। वहीं प्राइवेट अस्पतालों में गार्डासिल 4 और गार्डासिल 9 जैसी वैक्सीन दी जाती है। 


5. क्या शादीशुदा महिलाएं भी टीके लगवा सकती हैं? 

डॉक्टर कहते हैं, शादीशुदा महिलाएं भी ये वैक्सीन लगवा सकती हैं। 9-14 वर्ष की उम्र में दो डोज जबकि 15 वर्ष या उससे अधिक में तीन डोज टीके लगाए जाते हैं। आप स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह से वैक्सीन लगवा सकती हैं।
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एचपीवी टीकाकरण के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com
6. क्या पुरुषों को भी यह वैक्सीन लगवानी चाहिए? 

कई देशों में पुरुषों को भी यह वैक्सीन लगाने के लिए सलाह दी जाती है।एचपीवी वायरस से पुरुषों को पेनाइल कैंसर, एनल कैंसर और ओरोफैरिन्जियल जैसे कैंसर हो सकते हैं। यह वैक्सीन एचपीवी संक्रमण के फैलाव को कम करने में भी मददगार होती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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