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Cancer: युवा महिलाओं में 'साइलेंट' तरीके से बढ़ रहा है ये घातक कैंसर, लक्षणों को अनदेखा करना पड़ सकता है भारी

Mon, 28 Apr 2025 10:18 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दुनियाभर में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर, भारत में युवा महिलाओं में चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है। शोध के अनुसार, भारत में हर साल 1.27 लाख से ज्यादा सर्वाइकल कैंसर के नए मामले सामने आते हैं।
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महिलाओं में बढ़ रहे हैं सर्वाइकल कैंसर के मामले - फोटो : Adobe Stock
कैंसर एक गंभीर समस्या है जिसका जोखिम सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। महिला हों या पुरुष, बच्चे हों या बुजुर्ग, कैंसर का खतरा किसी को भी हो सकता है।  हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारतीय महिलाओं में कुछ प्रकार के कैंसर के मामले काफी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं।

ब्रेस्ट (स्तन) कैंसर तो एक गंभीर चिंता का विषय है ही, साथ ही पिछले कुछ वर्षों में सर्वाइकल कैंसर 'साइलेंटली' बड़ी संख्या में महिलाओं को अपना शिकार बनाता जा रहा है। 

दुनियाभर में महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर, भारत में युवा महिलाओं में चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है। शोध के अनुसार, भारत में हर साल 1.27 लाख से ज्यादा सर्वाइकल कैंसर के नए मामले सामने आते हैं। युवा आयु समूहों में इस वृद्धि का मुख्य कारण ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) का प्रसार माना जा रहा है।

ये समय से पहले यौन संबंध, जांच की कमी और समय पर रोग का निदान न हो पाने के साथ टीकाकरण कवरेज की कमी जैसे कारणों के चलते बढ़ता जा रहा है। गड़बड़ लाइफस्टाइल इन जोखिमों को और भी बढ़ा देती है, जिसको लेकर सभी महिलाओं को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
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सर्वाइकल कैंसर का खतरा - फोटो : Freepik.com
सर्वाइकल कैंसर और इसका खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स पर नजर डालें तो पता चलता है कि सर्वाइकल कैंसर भारत सहित कई विकासशील देशों में महिलाओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। हालिया शोधों से पता चला है कि यह रोग अब युवा महिलाओं में तेजी से और चुपचाप (साइलेंटली) फैल रहा है। इसकी शुरुआती पहचान कठिन होती है, जिससे इलाज में देरी और जटिलताएं बढ़ जाती हैं।

सर्वाइकल कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा यानी गर्भाशय के निचले हिस्से में कोशिकाओं के असामान्य रूप से बढ़ने के कारण होता है। ज्यादातर मामलों में इसके लिए मुख्य रूप से एचपीवी संक्रमण को कारण माना जाता रहा है। 
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सर्वाइकल कैंसर को कैसे रोका जाए? - फोटो : Freepik.com
20 की उम्र में भी महिलाएं हो रही है शिकार

ग्लोबोकॉन के साल 2020 के डेटा के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 77,000 लोगों की इस कैंसर से मौत हो जाती है। 30-45 वर्ष की महिलाओं में इसका खतरा सबसे अधिक है, लेकिन हाल के वर्षों में 20 से 30 वर्ष की उम्र की युवतियों में भी तेजी से निदान के मामले बढ़े हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है, यदि समय पर टीकाकरण, स्क्रीनिंग और इलाज हो जाए तो सर्वाइकल कैंसर को रोका जा सकता है। संक्रमण के कारणों का पता लगाकर, इसके लक्षणों की पहचान कर ली जाए तो सर्वाइकल कैंसर से बचा जा सकता है।

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कैंसर के खतरे को पहचानिए - फोटो : Freepik.com
किन लोगों में इसका खतरा अधिक होता है?

डॉक्टर बताते हैं, कुछ स्थितियां हैं जो आपमें सर्वाइकल कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं, जिनसे सभी महिलाओं को निरंतर बचाव करते रहना चाहिए।

सर्वाइकल कैंसर के अधिकतर मामले वायरल संक्रमण के कारण होते हैं। इसके अलावा कम उम्र में ही यौन सक्रियता या एक से अधिक यौन साथी होना भी आपमें इस कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है या लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं तो इसके कारण भी सर्वाइकल कैंसर का खतरा हो सकता है।
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सर्वाइकल कैंसर का समय पर निदान कराएं - फोटो : Adobe Stock
शुरुआती लक्षणों को कैसे पहचानें?

सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण बहुत स्पष्ट लक्षण नहीं होते, लेकिन कुछ संकेतों पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • अनियमित माहवारी या दो पीरियड्स के बीच रक्तस्राव
  • यौन संबंधों के बाद रक्तस्राव होना। 
  • पेल्विक हिस्से में  दर्द या असामान्य डिस्चार्ज होना।
ये लक्षण कई अन्य कारणों से भी हो सकते हैं, लेकिन यदि ये लगातार बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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