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Cervical Health Awareness Month: महिलाओं में होने वाला ये सबसे जानलेवा कैंसर, कहीं आपको भी तो नहीं है खतरा?

Fri, 12 Jan 2024 03:26 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सर्वाइकल कैंसर का जोखिम - फोटो : instagram
कैंसर, दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारकों में से एक है, हर साल तमाम प्रकार के कैंसर के कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है। पर क्या आप जानते हैं कि कुछ प्रकार के कैंसर सिर्फ महिलाओं को प्रभावित करते हैं? (दुर्लभ मामलों में पुरुषों में भी खतरा देखा गया है)। सर्वाइकल कैंसर, ऐसी ही एक गंभीर समस्या है।

साल 2020 में अनुमानित 6.04 लाख नए मामलों और 3.42 लाख से अधिक मौतों के साथ वैश्विक स्तर पर सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाल चौथा सबसे आम कैंसर रहा है। सर्वाइकल कैंसर के केस और मृत्यु दर, निम्न और मध्यम आय वाले देशों में सबसे अधिक देखे जाते रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दुनियाभर में महिलाओं को प्रभावित करने वाले इस स्वास्थ्य जोखिम पर प्रकाश डालना महत्वपूर्ण है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते इस कैंसर के जोखिमों को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने, रोकथाम, जांच और उपचार के बारे में शिक्षित करने के उद्देश्य से जनवरी माह को 'सर्वाइकल कैंसर अवेयनेस मंथ' के रूप में मनाया जाता है। भारत में भी सर्वाइकल कैंसर एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौती है, क्या आप इसके बारे में जानते हैं?
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सर्वाइकल कैंसर के जोखिम कारक - फोटो : Agency (File Photo)
सर्वाइकल कैंसर के बारे में जानिए

सर्वाइकल कैंसर, सर्विक्स यानी गर्भाशय ग्रीवा में होने वाला कैंसर है, जो योनि से जुड़ा गर्भाशय का निचला हिस्सा होता है। यह कैंसर अक्सर धीरे-धीरे विकसित होता है जिसके कारण लक्षणों को पहचानने में समस्या हो सकती है। ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के कारण सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा सबसे अधिक देखा जाता रहा है। एचपीवी एक सामान्य संक्रमण है जो यौन संपर्क से फैलता है।

एचपीवी वायरस को शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली वैसे तो नष्ट कर सकती है, हालांकि, कुछ प्रतिशत लोगों में यह वायरस वर्षों तक जीवित रह सकता है और कैंसर का कारण बनता है।
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सर्वाइकल कैंसर की पहचान - फोटो : Pixabay
सर्वाइकल कैंसर के लक्षण

सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती स्टेज में आमतौर पर कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते, यही कारण है कि इसका खतरा अधिक हो सकता है। जैसे-जैसे यह कैंसर बढ़ता है, इसके कुछ लक्षण स्पष्ट हो सकते हैं जिनपर ध्यान देना बहुत जरूरी है।
  • संभोग के बाद, मासिक धर्म के बीच या रजोनिवृत्ति के बाद योनि से रक्तस्राव।
  • मासिक धर्म में रक्तस्राव का भारी होना या इसका सामान्य से अधिक समय तक रहना।
  • योनि से होने वाले स्राव से दुर्गंध आ सकती है।
  • संभोग के दौरान पेल्विक हिस्से में तेज दर्द का अनुभव होना।

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महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की समस्या - फोटो : iStock
किन लोगों में इस कैंसर को होता है खतरा?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कुछ स्थितियां आपमें इस कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

यदि आपका एक से अधिक लोगों के साथ यौन संपर्क है। यौन साझेदारों की संख्या जितनी अधिक होगी इस कैंसर का जोखिम उतना अधिक हो सकता है। इसके अलावा  कम उम्र में यौन संबंध बनाने से भी एचपीवी का खतरा बढ़ जाता है। यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) भी इस कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती है। यदि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली किसी अन्य क्रोनिक स्वास्थ्य समस्या के कारण कमजोर हो गई है और आपको एचपीवी संक्रमण होता है तो सर्वाइकल कैंसर होने की अधिक आशंका हो सकती है।

धूम्रपान से भी सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। धूम्रपान करने वाले लोगों में एचपीवी संक्रमण लंबे समय तक बना रह सकता है।
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सर्वाइकल कैंसर से करें बचाव - फोटो : istock
सर्वाइकल कैंसर से बचाव कैसे किया जाए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कुछ प्रकार के उपायों का पालन करके आप सर्वाइकल कैंसर से बचाव कर सकती हैं। इसके लिए एचपीवी वैक्सीन लेना सबसे महत्वपूर्ण है। एचपीवी संक्रमण को रोकने के लिए टीकाकरण प्राप्त करने से सर्वाइल कैंसर और अन्य एचपीवी से संबंधित बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। अपने डॉक्टर से पूछें कि क्या एचपीवी टीका आपके लिए सही है? इसके अलावा डॉक्टर की सलाह पर नियमित पैप परीक्षण कराएं। पैप परीक्षण गर्भाशय ग्रीवा में कैंसर की स्थितियों का पता लगाने में मदद करता सकता है।

इस संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए सुरक्षित यौन संबंध बनाएं। यौन संचारित संक्रमणों को रोकने के उपाय करना बहुत जरूरी है। इसके अलावा यदि आप धूम्रपान करती हैं, तो इसे छोड़ना बहुत आवश्यक है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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