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Covid-19: तीसरी लहर के बाद पहली बार दैनिक मामले 20 हजार के पार, विशेषज्ञ से जानिए- क्यों जारी है यह उतार-चढ़ाव?

Thu, 14 Jul 2022 02:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में कोरोना संक्रमण के मामले - फोटो : iStock
देशभर में पिछले एक महीने से कोरोना के दैनिक मामलों में उतार चढ़ाव जारी है। पिछले 30 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि रोजाना औसतन 16-17 हजार नए लोगों में संक्रमण की पुष्टि की जा रही है। दैनिक रूप से सामने आ रहे इतने केसों ने देश में संक्रमण के सक्रिय मामलों को बढ़ा दिया है। पिछले 24 घंटे तीसरी लहर के बाद पहली बार 20 हजार से अधिक मामले (20138) सामने आए। इसके साथ ही अब एक्टिव केस बढ़कर 1.32 लाख से अधिक हो गए हैं।

रोजाना संक्रमण के मामलों में देखा जा रहा उतार-चढ़ाव डराने वाला जरूर है पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसके कारण किसी और लहर आने की आशंका फिलहाल न के बराबर है। हालांकि सभी लोगों को कोरोना संक्रमण के जोखिम को ध्यान में रखते हुए बचाव के उपाय करते रहने चाहिए।  

बढ़ते मामलों के बीच सभी के मन में एक सवाल बना हुआ है कि आखिर कोरोना के मामलों में इस तरह से रोजाना के केस में उतार-चढ़ाव क्यों जारी है? इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस की प्रकृति में जिस तरह से बदलाव आया है उसने उन लोगों के लिए भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं जिनका वैक्सीनेशन हो चुका है या जो पहले संक्रमित रहकर कोरोना से ठीक हो चुके हैं। आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।
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कोरोना संक्रमण के मामले - फोटो : Pixabay
क्यों संक्रमण के मामलों में जारी है उतार-चढ़ाव?

कोरोना संक्रमण के जारी खतरे और इसके कारण बढ़ी चुनौतियों को समझने के लिए हमने सीनियर कंसल्टेंट-इंटरनल मेडिसिन डॉ रुचिका देसाई से बातचीत की। डॉ रुचिका कहती हैं, भारत में फिलहाल कोरोना के जिन वैरिएंट्स को संक्रमण के कारण के तौर पर देखा जा रहा है, उनकी प्रकृति काफी संक्रामकता वाली है।

इसके अलावा चूंकि यह मूल कोरोना वायरस जिसके आधार पर ज्यादातर वैक्सीन तैयार की गई हैं उससे काफी अलग हैं। यही कारण है कि ये वैरिएंट्स उन लोगों को भी संक्रमित कर रहे हैं जिनका पूरी तरह से टीकाकरण हो चुका है। नए वैरिएंट्स की प्रकृति को देश में इस तरह से संक्रमण के मामलों में उतार-चढ़ाव के लिए जिम्मेदार माना जा सकता है।
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कोरोना के नए वैरिएंट्स ने बढ़ाई चुनौतियां - फोटो : Pixabay
संक्रमण की गंभीरता कम

डॉ रुचिका कहती हैं, फिलहाल अच्छी बात यह है कि इस बार संक्रमित हो रहे ज्यादातर लोग 2-3 दिनों में ही ठीक हो रहे हैं। गंभीर संक्रमण के केस बहुत ही कम हैं, ऐसे मामले सिर्फ उन्हीं लोगों में देखे जा रहे हैं जिनको कोमारबिडिटी की समस्या रह चुकी है। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि हम कोरोना को हल्के में लेना शुरू कर दें।

कई यूरोपीय देशों में इन वैरिएंट्स के कारण हाल के महीनों में तेजी से हालात बिगड़ते हुए भी देखे गए हैं, इस जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

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कोविड-19 में गले के संक्रमण की समस्या - फोटो : Pixabay
गले में खराश के लक्षणों को लेकर विशेषज्ञों ने किया अलर्ट

कोविड के जोखिम को लेकर अध्ययन कर रही विशेषज्ञों की टीम का कहना है कि देशभर में मानसून का समय चल रहा है, ऐसे में सीजनल फ्लू के साथ गले में खराश की दिक्कत काफी सामान्य रही है। ऐसे ही लक्षण कोविड-19 में भी हो सकते हैं। ऐसे में आपको समय रहते यह पता लगाना जरूरी है कि आपमें गले में खराश की समस्या सामान्य है या फिर यह कोरोना संक्रमण के कारण हो रही है?
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गले में दर्द और संक्रमण के लक्षण - फोटो : istock
कैसे करें सामान्य और कोविड-19 वाले गले में खराश में अंतर

यूके के ज़ोई ऐप आधारित डेटा के हिसाब से विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों के बीच अंतर करने का सबसे आसान तरीका यह है कि बीमारी की गंभीरता पर ध्यान दिया जाए। कोरोना संक्रमण के पहले दिन आपमें गले की समस्याओं के लक्षण काफी अधिक हो सकते हैं, हालांकि हर दिन के साथ ये ठीक होते जाते हैं। जबकि फ्लू में होने वाली गले की समस्या के लक्षण समय के साथ बढ़ते जाते हैं। कोविड-19 में गले में खराश के साथ अन्य संबंधित लक्षणों पर भी ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।  


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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