लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी ने हमारी सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। इसका आंखों की सेहत पर भी सीधा असर देखा जा रहा है। कम उम्र में ही धुंधला दिखना, पढ़ने के लिए चश्मे की जरूरत महसूस होना और ग्लूकोमा जैसी बीमारियां इसका संकेत है।
मोतियाबिंद भी आंखों की ऐसी ही एक समस्या है जिसके कारण लोगों को दिखना कम हो जाता है, रात में गाड़ी चलाना मुश्किल हो जाता है और यहां तक कि दूर से चेहरों की पहचाने में भी कठिनाई होने लगती है। आमतौर पर मोतियाबिंद को बुढ़ापे की समस्या माना जाता रहा है, पर क्या आप जानते हैं कि इसकी शुरुआत 40-45 की उम्र में ही हो जाती है? अध्ययनों में पाया गया है कि डायबिटीज, लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का सेवन, आंखों में चोट, अत्यधिक धूप और धूम्रपान जैसी आदतों के कारण ये समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है।
मोतियाबिंद का इलाज संभव है, सर्जरी के माध्यम से नए लेंस डालकर आंखों की रोशनी में सुधार किया जा सकता है। पर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या गर्मियों में ये सर्जरी कराना सही है? क्या ज्यादा गर्मी में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है?