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CDSCO: आपके घर में भी है कोई कैंसर या मानसिक रोगों का मरीज, तो जरूर पढ़ें ये राहत देने वाली खबर

Mon, 03 Aug 2026 11:26 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कैंसर, मिर्गी, मानसिक रोग और दिल की बीमारियों के इलाज से जुड़ी कई नई दवाएं जल्द भारतीय मरीजों तक पहुंच सकती हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने कई नई दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग, मार्केटिंग, इंपोर्ट और क्लीनिकल ट्रायल से जुड़े अहम फैसले लिए हैं।
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दवाओं के इस्तेमाल को लेकर फैसले - फोटो : Adobe Stock
हृदय रोग और कैंसर दुनियाभर में होने वाली मौतों का प्रमुख कारण हैं। हर साल इन दोनों बीमारियों से लाखों लोगों की मौत हो जाती है। इतना ही नहीं इन बीमारियों के इलाज पर होने वाला खर्च भी मरीज और परिजनों को काफी तोड़ देने वाला होता है।

इस बीच भारत के दवा नियामक तंत्र से आई एक बड़ी खबर ऐसे करोड़ों मरीजों और उनके परिवार वालों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की तीन कमेटियों ने कई नई दवाओं, उनके इस्तेमाल, आयात-निर्माण और मार्केटिंग के साथ क्लीनिकल ट्रायल को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक दवाओं को लेकर हो रही है, जिनके जरिए गंभीर मरीजों के उपचार के विकल्प बढ़ सकते हैं।

सबसे अहम फैसला मल्टीपल मायलोमा जैसे गंभीर ब्लड कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले डाराटुमुमैब इंजेक्शन को लेकर सामने आया है। अगर अंतिम मंजूरी मिलती है, तो यह दवा भारत में कैंसर के इलाज के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है। इसके अलावा मिर्गी, मानसिक रोग और हृदय संबंधी बीमारियों के इलाज से जुड़ी कई अन्य दवाओं पर भी महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जान लेते हैं।
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दवाओं को लेकर बड़े फैसले - फोटो : ANI
यहां जानिए क्या हुए फैसले?

जानकारियों के मुताबिक कैंसर, मिर्गी, मानसिक रोग और दिल की बीमारियों के इलाज से जुड़ी कई नई दवाएं जल्द भारतीय मरीजों तक पहुंच सकती हैं। सीडीएससीओ की तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने कई नई दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग से लेकर मार्केटिंग और क्लीनिकल ट्रायल से जुड़े अहम फैसले लिए हैं।
 
  • समितियों ने कई नई दवाओं और उनके नए उपयोग को मंजूरी देने की सिफारिश की है, जबकि कुछ दवाओं पर अतिरिक्त भारतीय मरीजों का क्लीनिकल डेटा और आगे के क्लीनिकल ट्रायल कराने को कहा है।
  • सबसे अहम फैसले कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को लेकर हुए हैं।
  • समिति ने डाराटुमुमैब इंजेक्शन को ब्लड कैंसर के एक प्रकार (मल्टीपल मायलोमा) के नए मरीजों के इलाज में अतिरिक्त उपयोग के लिए इंपोर्ट और मार्केटिंग की अनुमति देने की सिफारिश की है।
  • इसके लिए स्थानीय फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल से छूट देने की भी सिफारिश की गई है, लेकिन कंपनी को भारत में फेज-4 क्लीनिकल ट्रायल करना होगा।
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मेंटल हेल्थ की दवाओं को लेकर फैसला - फोटो : Adobe stock
मिर्गी और मानसिक रोगों की दवाओं पर भी फैसले

न्यूरोलॉजी और साइकियाट्री एसईसी ने मिर्गी की नई दवा सेनोबामेट टैबलेट की मैन्युफैक्चरिंग और मार्केटिंग की सिफारिश की है। समिति ने कहा है कि यह दवा केवल न्यूरोलॉजिस्ट के प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जाएगी। 
 
  • इसके अलावा क्वेटियापिन ओरल सस्पेंशन को भी मंजूरी देने की सिफारिश की गई है। 
  • वहीं ब्रेक्सपिप्राजोल टैबलेट के नए इंडिकेशन को भी हरी झंडी दी गई है। हालांकि सभी प्रस्तावों को मंजूरी नहीं मिली।
  • बापेंटिन एक्सटेंडेड रिलीज 200 मिलीग्राम टैबलेट पर समिति ने कहा कि यह स्ट्रेंथ दुनिया में कहीं भी मंजूर नहीं है। इसलिए पहले इसकी बायोएवेलेबिलिटी स्टडी करानी होगी।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 
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