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सावधान: सिर्फ पीरियड्स की समस्या नहीं है पीएमओएस, डायबिटीज का भी हो सकता है खतरा; जानिए कैसे

Sat, 19 Sep 2026 06:59 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीएमओएस का संबंध सिर्फ पीरियड्स और हार्मोन से नहीं है। इसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस और ब्लड शुगर से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप भी पीएमओएस को हल्के में ले रही हैं तो सावधान हो जाइए, ये गंभीर खतरा बढ़ाने वाला हो सकता है।
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पीएमओएस की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) महिलाओं की एक समस्या है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि दुनियाभर में अनुमानित 17 करोड़ से ज्यादा महिलाएं इसका शिकार हैं। पीसीओएस की समस्या की व्यापक प्रकृति को बेहतर ढंग से समझने के लिए हाल ही में इसका नाम बदलकर 'पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम' (पीएमओएस) कर दिया गया है।

पीसीओएस या पीएमओएस का नाम सुनते ही सबसे पहले हमारे दिमाग में पीरियड्स की समस्या आती है। पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ये पीरियड्स की दिक्कतों से कहीं ज्यादा गंभीर स्थिति हो सकती है, जिसपर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।

पीएमओएस को अक्सर सिर्फ पीरियड्स की समस्या समझा जाता है। लेकिन इसका असर शरीर के मेटाबॉलिज्म यानी भोजन से ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया पर भी हो सकता है। यही वजह है कि पीएमओएस वाली महिलाओं में ब्लड शुगर बढ़ने, डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस का भी खतरा हो सकता है।
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पीएमओएस और डायबिटीज का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
पहले इंसुलिन के बारे में जान लीजिए

इंसुलिन शरीर का एक हार्मोन है, जो खून में मौजूद ग्लूकोज यानी शुगर को कोशिकाओं के अंदर पहुंचाने में मदद करता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं देतीं। ऐसे में शरीर को शुगर को नियंत्रित करने के लिए ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ सकता है।
 
  • पीएमओएस में यह समस्या आम हो सकती है। 2023 की अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन के मुताबिक, पीएमओएस वाली महिलाओं में उम्र और वजन सामान्य होने पर ब्लड शुगर और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा अधिक हो सकता है।
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टाइप-2 डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
पीएमओएस और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पीएमओएस वाली हर महिला को डायबिटीज होगा ये जरूरी नहीं है, लेकिन ऐसी महिलाओं को ब्लड शुगर की नियमित जांच और जोखिम को कम करने वाली जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है।
 
  • असल में खाने के बाद भोजन से मिलने वाला कार्बोहाइड्रेट टूटकर ग्लूकोज में बदल जाता है और खून में पहुंचता है। इंसुलिन इस ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है। 
  • जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन की बात को ठीक से नहीं मानतीं, यानी इंसुलिन रेजिस्टेंस हो जाता है तो शरीर ज्यादा इंसुलिन बनाकर ब्लड शुगर को सामान्य रखने की कोशिश कर सकता है।
  • पीएमओएस में यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है क्योंकि इंसुलिन रेजिस्टेंस हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Adobe Stock
डायबिटीज का हो सकती हैं शिकार

डॉक्टर कहते हैं, अगर शरीर लंबे समय तक इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील रहता है और लगातार ज्यादा इंसुलिन बन रहा होता है तो समय के साथ शरीर की यह क्षमता कमजोर पड़ सकती है और ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। यही स्थिति आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ा सकती है। 
 
  • 2023 की अंतरराष्ट्रीय पीएमओएस गाइडलाइन के अनुसार, पीएमओएस वाली महिलाओं में फास्टिंग शुगर, ग्लूकोज टॉलरेंस और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा हुआ देखा जाता रहा है।
  • चाहे उम्र या बॉडी मास इंडेक्स कंट्रोल हो फिर भी हार्मोनल समस्याएं शुगर लेवल को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
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डायबिटीज की जांच जरूरी - फोटो : Freepik.com
पीएमओएस वाली महिलाओं को क्या करना चाहिए?

डॉक्टर कहते हैं, अगर आपको पीएमओएस की दिक्कत है तो नियमित अंतराल पर ब्लड शुगर की जांच जरूर कराते रहना चाहिए।  करना जरूरी माना जाता है। शुगर को कंट्रोल रखने और इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति को ठीक करने के लिए नियमित शारीरिक व्यायाम, संतुलित भोजन और वजन को कंट्रोल में रखने जैसे उपाय मदद कर सकते हैं।

जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज की दिक्कत रही है उन्हें अपने जोखिमों को लेकर और भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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