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सरोज खान किन बीमारियों से पीड़ित थीं, हार्ट अटैक से कितना अलग है कार्डियक अरेस्ट?

Fri, 03 Jul 2020 02:20 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Saroj Khan - फोटो : Social Media
बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान का मुंबई में कार्डियक अरेस्ट की वजह से निधन हो गया। वह पिछले कई दिनों से बीमार चल रही थीं। सरोज खान को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उनकी सेहत में थोड़ा सुधार भी हुआ था। बॉलीवुड में मास्टरजी कहलाने वाली सरोज खान को सांस लेने में तकलीफ की भी शिकायत हुई थी, जिसके बाद से उनके जाननेवाले और प्रशंसकों को उनके स्वास्थ्य की चिंता हो रही थी। उनके निधन से बॉलीवुड जगत शोक में है। सरोज खान के अलावा तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता, मशहूर अभिनेत्री श्रीदेवी समेत कई सेलिब्रेटियों की मौत भी कॉर्डियक अरेस्ट से हो चुकी है। 
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Madhuri Dixit and Saroj Khan(File Photo) - फोटो : twitter
  • 71 वर्षीय सरोज खान को सांस लेने की तकलीफ होने पर 20 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरोज खान लंबे समय से मधुमेह और बुजुर्गावस्था की अन्य बीमारियों से पीड़ित थीं। गुरुवार को उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और आधी रात के बाद करीब दो बजे उनका निधन हो गया।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
कोरोना से पीड़ित नहीं थीं सरोज खान
  • टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जून को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के चार दिन बाद 24 जून को कोरियोग्राफर कुणाल कोहली ने ट्विटर पर उनकी तबीयत संबंधी जानकारी साझा की थी। उनके मुताबिक, सरोज खान कोरोना वायरस से पीड़ित नहीं थीं। कोविड की जांच में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। उनमें कोरोना संक्रमण के संकेत या लक्षण नहीं थे। 

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श्रीदेवी के निधन के बाद श्रद्धांजलि देते उनके परिवारिक सदस्य और अन्य लोग(File Photo)
  • सरोज खान से पहले तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रह चुकीं जयललिता, बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री श्रीदेवी की मौत का कारण भी कार्डियक अरेस्ट ही था। बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठ सकता है कि कार्डियक अरेस्ट आखिर होता क्या है! क्या यह हर्ट अटैक जैसा है, या फिर उससे अलग है? हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट अलग है तो दोनों के बीच क्या अंतर होते हैं? 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सबसे पहले जानते हैं कि कार्डियक अरेस्ट क्या होता है:
  • कार्डियक अरेस्ट में दिल के भीतर के हिस्सों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान गड़बड़ हो जाता है। इस वजह से दिल की धड़कन पर बुरा असर पड़ता है। जकार्डियोपल्मोनरी रेसस्टिसेशन (CPR) के जरिए मरीज के हार्ट रेट को नियमित करने की कोशिश की जाती है। जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक हो चुका होता है, उन्हें कार्डियक अरेस्ट की आंशका ज्यादा रहती है। 
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Cardiac Surgery(File Photo) - फोटो : Social media
अचानक होता है कार्डिएक अरेस्ट
  • heart.org के मुताबिक कार्डियक अरेस्ट अचानक होता है और इसकी कोई चेतावनी शरीर की तरफ से नहीं मिलती। आम तौर पर दिल में होने वाली इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी के कारण धड़कन का तालमेल बिगड़ जाता है। इस कारण दिल की 'पम्प करने की क्षमता' प्रभावित होती है और हमारे दिल, दिमाग या शरीर के दूसरे हिस्सों तक खून पहुंचने में बहुत दिक्कत होती है। ऐसे में बहुत कम समय में व्यक्ति बेहोश हो जाता है और नब्ज भी जाती रहती है। अगर सही वक्त पर सही इलाज न मिले तो कार्डियक अरेस्ट से कुछ मिनटों में ही मौत हो जाती है। 
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हार्ट अटैक (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
हार्ट अटैक क्या होता है?
  • हार्ट अटैक के दौरान दिल के कुछ हिस्सों में खून का बहाव जम जाता है। हार्ट अटैक के मामले में इलाज मिलने में देर होने पर दिल और शरीर को उतना ही अधिक नुकसान होता चला जाएगा। इसमें लक्षण तुरंत भी दिख सकते हैं और कुछ देर में भी दिख सकते हैं। हार्ट अटैक आने के कुछ घंटों या कुछ दिनों बाद तक इसका असर देखने को मिलता है। कार्डियक अरेस्ट की तरह हार्ट अटैक में अचानक दिल की धड़कन बंद नहीं होती। 

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Heart attack - फोटो : Pixabay
  • कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक, दोनों ही बीमारियों आपस में गहरी जुड़ी हैं। कई बार हार्ट अटैक के दौरान और उसकी रिकवरी के दौरान भी कार्डिएक अरेस्ट आने की संभावना रहती है। चूंकि हार्ट अटैक में दिल की धड़कन तुरंत बंद नहीं होती, इसलिए कार्डिएक अरेस्ट की तुलना हार्ट अटैक में मरीज को बचाए जाने की संभावना कहीं ज्यादा होती है।
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Heart attack - फोटो : Pixabay
क्या कार्डियक अरेस्ट में मौत तय? 
  • ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के अनुसार दिल में इलेक्ट्रिकल सिग्नल की समस्याएं शरीर में जब ब्लड नहीं पहुंचने देती तो वह कार्डियक अरेस्ट की शक्ल ले लेता है। जब इंसान का शरीर ब्लड को पम्प करना बंद कर देता है तो दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। ऐसा होने पर व्यक्ति बेहोश हो जाता है और उसे सांस लेने में बहुत तकलीफ होने लगती है। इसके कोई लक्षण पहले से नहीं दिखते हैं और कार्डियक अरेस्ट में मौत होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 
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