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सावधान: शरीर में ऐसे लक्षणों का मतलब हो रही है ब्लड क्लॉटिंग, इससे कई जानलेवा समस्याओं का बढ़ जाता है खतरा

Tue, 20 Dec 2022 06:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ब्लड क्लॉटिंग की समस्या के कारण हो सकता है स्ट्रोक - फोटो : istock
ब्लड क्लॉटिंग, चोट या कटने की स्थिति में रक्तस्राव के जोखिम से बचाने में विशेष भूमिका निभाती है। समय पर रक्त के थक्के बनकर शरीर से अधिक रक्त निकलने से रोकने में मदद मिलती है। पर अगर यही थक्के धमनियों में बनने लग जाएं तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है। धमनियों में रक्त का थक्का बनने के कारण हृदय रोग (हार्ट अटैक) और स्ट्रोक का खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं सभी लोगों को इसके जोखिम कारकों के बारे में जरूर जानना चाहिए। रक्त के थक्के बनने के अगर शुरुआती लक्षणों पर समय रहते ध्यान दे दिया जाए तो गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सकता है।

कुछ बातों को ध्यान में रखकर ब्लड क्लॉटिंग को रोका जा सकता है। अध्ययनों में पाया गया है कि वजन बढ़ने, अधिक धूम्रपान के कारण रक्त के थक्के बनने की समस्या हो सकती है। अगर आप लंबे समय की यात्रा कर रहे हैं तो दो से तीन घंटे में खड़े होकर टहलें और अपने पैरों को स्ट्रेच करें। कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कंट्रोल करके और स्वस्थ आहार का सेवन करना रक्त के थक्के बनने की समस्या को रोकने में सहायक है। 

आइए उन लक्षणों के बारे में जानते हैं जिनपर सभी को ध्यान देते रहना जरूरी है। इनकी पहचान कर गंभीर समस्याओं से बचाव किया जा सकता है।
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धमनियों में रक्त का थक्का बनने की समस्या - फोटो : istock
हार्ट अटैक-स्ट्रोक का बढ़ सकता है जोखिम

डॉक्टर कहते हैं, रक्त का थक्का बनना शरीर में होने वाली स्वाभाविक प्रक्रिया है, रक्त का थक्का न बनना अधिक गंभीर माना जाता है। हालांकि अगर यह रक्त में पहुंचकर धमनियों में जमा होने लगे तो स्थिति जरूर गंभीर हो सकती है। यदि कोई थक्का आपकी नसों के माध्यम से हृदय या फेफड़ों में पहुंच जाए तो इससे रक्त प्रवाह बाधित हो सकती है, जिससे हार्ट अटैक-स्ट्रोक या अन्य गंभीर समस्याओं का जोखिम होता है। 
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पैर में दर्द औऱ त्वचा के रंग में बदलाव - फोटो : getty images
त्वचा में दिख सकते हैं नीले-काले धब्बे

मेडिकल रिपोर्ट्स बताते हैं, रक्त के थक्के बनने की स्थिति में हर बार लक्षणों का नजर आना जरूरी नहीं है। जिन धमनियों में थक्के बनते हैं, उससे संबंधित कुछ परेशानियां जरूर हो सकती है। इसमें डॉक्टरी मदद और जांच की आवश्यकता हो सकती है। कुछ लोगों में थक्के बनने की स्थिति में त्वचा पर इसके संकेत नजर आ सकते हैं, जिनपर गंभीरता से ध्यान देकर स्थिति की पहचान की जा सकती है। हाथों-पैरों में इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हाथों-पैरों में बनने वाले थक्के की स्थिति में त्वचा के रंग में बदलाव, अंगों में सूजन और दर्द के साथ झनझनाहट हो सकती है। 
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सांस लेने में तकलीफ की समस्या - फोटो : iStock
सांस की तकलीफ होने पर भी दें ध्यान

हृदय की धमनियों में रक्त के थक्के बनने की स्थिति को गंभीर माना जाता है, इसे कोरोनरी आर्टरी थ्रंबोसिस के नाम से जाना जाता है। इस स्थिति में हृदय में  रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है जिसके कारण दिल का दौरा पड़ सकता है। हृदय में रक्त का थक्का बनने की स्थिति में सीने में तेज दर्द, चक्कर आने, सांस फूलने, पीठ-गर्दन और जबड़े में दर्द, बहुत अधिक पसीना आने और हृदय गति बढ़ने की समस्या हो सकती है। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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