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Blood Clotting: शरीर में खून के थक्के क्यों बनने लगते हैं? ब्लड क्लॉटिंग से क्या दिक्कतें होती हैं, यहां जानिए

Sat, 24 May 2025 09:38 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शरीर में खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को थ्रॉम्बोसिस कहा जाता है। यह एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है जो चोट लगने पर अत्यधिक खून बहने से बचाती है। लेकिन जब बिना चोट के या गलत जगह पर खून के थक्के बनने लगते हैं, तो यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
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खून के थक्के बनने की समस्या - फोटो : Adobe
हमारे शरीर का मैकेनिज्म ऐसा है कि ये खुद से ही अपनी रक्षा कर सकता है। ये तंत्र लगातार काम करता रहता है, इस तरह से, कि कई बार आपको पता भी नहीं चलता और शरीर कई समस्याओं से मुकाबला करके आपको बड़ी दिक्कतों से बचा लेता है। खून के थक्के बनना (ब्लड क्लॉटिंग) भी ऐसी ही एक स्थिति है जो शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

शरीर रक्त के थक्के बनाकर चोट और रक्तस्राव की स्थिति में ज्यादा खून बहने से बचाता है। खून के थक्के बनना अच्छा संकेत है, पर अगर ये थक्के अधिक या बिना किसी कारण के बनने लगें तो इसके गंभीर और जानलेवा दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।

शरीर में खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को थ्रॉम्बोसिस कहा जाता है। यह एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है जो चोट लगने पर अत्यधिक खून बहने से बचाती है। लेकिन जब बिना चोट के या गलत जगह पर खून के थक्के बनने लगते हैं, तो यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।

हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी समस्याओं के लिए भी अनावश्यक रूप से खून के थक्के बनने को कारण माना जाता है।
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चोट के समय ब्लड क्लॉटिंग के फायदे - फोटो : Freepik.com
रक्तस्राव की स्थिति में फायदेमंद है ब्लड क्लॉटिंग

रक्तस्राव की स्थिति में आपका लिवर तुरंत एक्टिव हो जाता है और आपके खून में मौजूद प्लेटलेट्स को चिपकाकर रक्त के थक्के बनाता है और रक्तस्राव को रोकने में मदद करता है।

हालांकि कुछ स्थितियों में शरीर में बिना चोट के भी थक्के बनने लगते हैं जिसके कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। रक्त के थक्के जमने की इस तरह की समस्या खतरनाक हो सकती है, खासकर तब जब इसका समय पर इलाज न मिले।

धमनियों में रक्त के थक्के बनने से हृदय तक रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है जिससे हार्ट अटैक-स्ट्रोक हो सकता है।
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पैरों में ब्लड क्लॉटिंग की समस्या - फोटो : Adobe
ब्लड क्लॉटिंग के कारण होने वाली दिक्कतें

नसों में रक्त के थक्के बनने पर ये रक्तप्रवाह के माध्यम से शरीर के अन्य हिस्सों में भी जा सकते हैं। 
  • डीप वेन थ्रोम्बोसिस- आपके पैर, हाथ, लिवर, आंतों या किडनी की नसों में रक्त का थक्का बनने की समस्या है।
  • पल्मोनरी एम्बोलस- आपके फेफड़ों में रक्त का थक्का बनने की समस्या है। 
  • धमनियों में रक्त के थक्के बनने की स्थिति स्ट्रोक, दिल का दौरा,  पैरों में गंभीर दर्द, चलने में कठिनाई जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है।

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खून के थक्के बनने की समस्या - फोटो : freepik.com
खून के थक्के क्यों बनते हैं?

लंबे समय तक बैठने या लेटे रहने (शारीरिक रूप से निष्क्रिय लोग) से खून का बहाव धीमा हो जाता है, इसके कारण भी खून के थक्के बनने की समस्या हो सकती है। गर्भनिरोधक गोलियां और हार्मोन थेरेपी शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर थक्के बनने की आशंका बढ़ा देती हैं। अनावश्यक रूप से अगर शरीर में खून के थक्के बनने लगें तो इसका समय पर निदान और इलाज जरूरी हो जाता है। 
  • कुछ लोगों को आनुवंशिक (माता-पिता से विरासत में मिली) रूप से ये समस्या हो सकती है। 
  • आमतौर पर सर्जरी, चोट, दवाओं या किसी ऐसी चिकित्सा स्थितियों के कारण भी आपको ब्लड क्लॉटिंग की समस्या हो सकती है।
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ब्लड क्लॉटिंग की समस्या से कैसे बचें? - फोटो : Adobe stock
खून के थक्कों से बचाव और इलाज

ब्लड क्लॉटिंग की समस्या से बचे रहने के लिए  नियमित व्यायाम करें, लंबे समय तक बैठे न रहें।  पर्याप्त पानी पिएं ताकि खून गाढ़ा न होने पाए।  धूम्रपान न करना, शरीर के वजन को कंट्रोल में रखना और आनुवांशिक रूप से अपने जोखिमों को समझते हुए बचाव के उपाय करते रहना जरूरी है। 

जिन लोगों को ब्लड क्लॉटिंग की दिक्कत है उन्हें इसका इलाज जरूर कराना चाहिए। कुछ प्रकार की दवाएं रक्त में थक्का बनने की समस्या को रोकने में मदद करती हैं।




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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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