देश कोविड-19 के बुरे दौर से गुजर रहा है। अभी संक्रमण की रफ्तार पर काबू भी नहीं पाया जा सका था कि विशेषज्ञों ने कोविड-19 से ठीक हो रहे लोगों में कवक (फंगल) संक्रमण के खतरे को लेकर सचेत किया है। ‘म्यूकोरमाइकोसिस’ नामक इस फंगल संक्रमण को सामान्य बोलचाल की भाषा में काला फंगल के नाम से भी जाना जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना से ठीक हो रहे या ठीक हो चुके लोगों को यह संक्रमण हो सकता है। कमजोर इम्यूनिटी वालों के लिए यह संक्रमण खतरा बना हुआ है। नाक से शुरू होने वाला यह इन्फेक्शन आंखों और मस्तिष्क तक भी पहुंच जाता है, इतना ही नहीं यह कैंसर की तरह जानलेवा भी हो सकता है।
इस लेख में हम विशेषज्ञ चिकित्सक से जानेंगे कि यह संक्रमण आंखों के लिए कितना नुकसानदायक है और किस तरह से इसकी पहचान कर इलाज शुरू किया जा सकता है?
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कई लोगों को हो रहा है अंधापन
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आंखों की जा रही है रोशनी
देश के कई राज्यों से खबरें आ रही हैं कि कोविड-19 को मात देने के बाद ब्लैक फंगस की वजह से लोगों के आंखों की रोशनी जा रही है। विशेषज्ञ, लोगों के सचेत रहकर इसके लक्षणों की निगरानी करने और इस बारे में तुरंत डॉक्टरों से संपर्क कर इलाज शुरू कराने की सलाह दे रहे हैं। आइए जानते हैं यह संक्रमण आंखों को कैसे नुकसान पहुंचा रहा है?
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आंखों की लालिमा और तेज दर्द से करें पहचान
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आंखों पर ब्लैक फंगस का असर
इस बारे में जानने के लिए हमने वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर सूद से बात की। डॉ समीर कहते हैं कि संक्रमण के इस तरह के मामले नए नहीं हैं, यह फंगस हमारे वातावरण में मौजूद रहता है। जब हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है तो यह फंगस शरीर पर हमला कर देता है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में नाक के माध्यम से होते हुए यह संक्रमण आंखों के पिछले हिस्से में पहुंच जाता है। समय पर इसकी पहचान और इलाज बेहद जरूरी होता है।
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डबल विजन और अंधापन भी कर सकता है यह संक्रमण
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आंखों में ब्लैक फंगस के संक्रमण को कैसे पहचानें?
डॉ. समीर कहते हैं कि संक्रमित लोगों को आंखों में लाली और दर्द की समस्या होती है। इसके अलावा कुछ लोगों को डबल विजन और गंभीर मामलों में अंधापन होने का भी खतरा रहता है। यह संक्रमण आंख की नसों को प्रभावित कर देता है, जिसके कारण आंखों में अन्य कई तरह की दिक्कतें भी हो सकती हैं।
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स्टेरॉयड का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है नुकसानदायक
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कोविड से ठीक होने के बाद क्यों बढ़ गया है इसका खतरा?
इस सवाल के जवाब में डॉ समीर कहते हैं कि कोविड-19 के इलाज के दौरान रोगियों को बहुत ज्यादा मात्रा में स्टेरॉयड दिया जाता है जिसके चलते उनकी इम्यूनिटी पर बुरा असर पड़ रहा है। संक्रमण का मुख्य कारण फिलहाल यही है। कोविड से ठीक हो चुके लोगों को सुबह हल्की धूप में बैठना चाहिए, इसके अलावा विटामिन्स और मिनरल्स का सेवन करने से भी इम्यूनिटी को ठीक करने में मदद मिल सकती है।
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कई लोगों को हो रही है ब्लैक फंगस संक्रमण की शिकायत
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कई आई-ड्रॉप्स में भी स्टेरॉयड होता है, क्या उससे भी खतरा है?
डॉ समीर कहते हैं कि आई ड्रॉप्स में मौजूद स्टेरॉयड से इस संक्रमण का कोई संबंध नहीं है। जिन लोगों को ओरल या इंजेक्शन के माध्यम से स्टेरॉयड दिया जा रहा है, सिर्फ उन्हीं लोगों की इम्यूनिटी इससे प्रभावित होती है, ऐसे लोगों को ही ब्लैक फंगस का खतरा ज्यादा होता है। कोविड के दौरान जिन लोगों को ज्यादा स्टेरॉयड देना पड़ हो या जिन्हें लंबे समय तक आईसीयू में रखने की जरूरत रही हो, ऐसे रोगियों को संक्रमण के बारे में विशेष सावधान रहना चाहिए।
कैंसर की तरह की घातक है यह संक्रमण
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गर्मियों के कारण होने वाली आंखों की समस्या और इसमें कैसे अंतर करें?
इस सवाल के जवाब में डॉ समीर कहते हैं कि गर्मियों के कारण होने वाली आंखों की समस्या में सामान्य तौर पर लोगों को हल्की जलन-चुभन या लालिमा होती है, वहीं ब्लैक फंगस के कारण लोगों को आंखों में बहुत ज्यादा दर्द और लालिमा, आंखों की रोशनी चले जानी जैसी गंभीर दिक्कतें भी हो रही हैं। इनमें से कुछ भी लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है क्योंकि इस संक्रमण को कैंसर की तरह ही घातक माना जाता है।
------ नोट: यह लेख दिल्ली स्थित शार्प साईट आई हॉस्पिटल के डायरेक्टर और वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. समीर सूद से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।