दिमाग, हमारे शरीर के सभी कार्यों को नियंत्रित करता है। जैसे अब भूख लगी है, अब सोना है, अब आपको ख़ुशी महसूस हो रही है, अब दुःख आदि। यह एक प्राकृतिक क्रम है जो तब तक सुचारू रहता है जब तक कोई स्थिति बीच में आकर इसे असंतुलित नहीं करती। दिमाग के काम में असंतुलन कई वजहों से हो सकता है, कुछ में यह अस्थाई हो सकता है, जबकि कुछ में स्थायी भी। समय पर इलाज या काउंसिलिंग मिलने से ज्यादातर ऐसे असंतुलन नियंत्रण में आ सकते हैं लेकिन मुश्किल यह है कि हम दिमाग की ऐसी समस्याओं को अक्सर नजरअंदाज करते हैं।
बाइपोलर डिसऑर्डर, ऐसी ही एक मानसिक स्वास्थ्य की समस्या है जिसमें पीड़ित के व्यवहार में बेहद तीव्र परिवर्तन या मूड स्विंग्स दिखाई देते हैं। उदाहरण के लिए कभी अचानक बहुत खुश और प्रसन्नचित्त और कभी बेहद निराशा हो जाना। बाइपोलर डिसऑर्डर के ये मूड स्विंग्स पीड़ित के खाने, सोने, दिनभर की गतिविधियों, ऊर्जा के स्तर और व्यवहार सभी पर असर डालते हैं। व्यवहारगत परिवर्तन या मूड स्विंग्स के ये एपिसोड्स कई बार भी सामने आ सकते हैं। यह जीवनभर रहने वाली समस्या है, लेकिन दवाइयों और काउंसिलिंग के साथ इसे नियंत्रित किया जा सकता है।