फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शोध में खुलासा: मोटापे से ज्यादा दुबलापन खतरनाक, 'बहुत पतले' लोगों में तीन गुना अधिक होता है मौत का खतरा

Wed, 24 Sep 2025 08:57 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • डेनमार्क के एक शोध में खुलासा हुआ है कि मोटापे से कहीं ज्यादा खतरनाक अत्यधिक दुबलापन है, जिसमें मौत का खतरा तीन गुना तक बढ़ जाता है।
  • स्टडी के अनुसार, सबसे कम मृत्यु दर अब 'ओवरवेट' (BMI 27) श्रेणी में पाई गई है।
विज्ञापन
1 of 5
अधिक दुबला होना (प्रतिकात्मक तस्वीर) - फोटो : freepik
Why is Being Thin More Dangerous: वजन कम करने को लेकर आमतौर पर हमारे समाज में यह धारणा है कि 'पतला होना' ही स्वस्थ होने की निशानी है, जबकि मोटापे को बीमारियों का घर माना जाता है। लेकिन डेनमार्क में हुए एक विस्तृत और लंबे शोध ने इस धारणा को पूरी तरह से चुनौती दी है। इस स्टडी के विश्लेषण से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मोटे होने से कहीं ज्यादा खतरनाक बहुत अधिक दुबला होना है। इस शोध के अनुसार, जो लोग 'बहुत पतले' की श्रेणी में आते हैं, उनमें सामान्य वजन वाले लोगों की तुलना में मौत का खतरा तीन गुना तक अधिक होता है।

यह शोध इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें दशकों तक हजारों लोगों के स्वास्थ्य डाटा का विश्लेषण किया गया है, जो इसके निष्कर्षों को और भी ठोस बनाता है। इस अध्ययन ने स्वस्थ वजन के पैमाने पर एक नया वाद-विवाद खड़ा दिया है, जो बताता है कि हमारा ध्यान सिर्फ मोटापा कम करने पर ही नहीं, बल्कि अत्यधिक दुबलेपन के खतरों पर भी होना चाहिए।
विज्ञापन

2 of 5
नॉर्मल वेट का पैमाना क्या है? - फोटो : Freepik.com
क्या होना चाहिए नॉर्मल वेट का पैमाना?
इस डेनिश स्टडी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि समय के साथ नॉर्मल वेट का पैमाना भी बदला है। शोधकर्ताओं ने पाया कि 1970 के दशक में, सबसे कम मृत्यु दर वाले लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) कम था।

लेकिन वर्तमान के आंकड़ों के अनुसार, सबसे कम मृत्यु दर उन लोगों में पाई गई जिनकी बीएमआई 27 के आसपास थी, जो चिकित्सकीय रूप से 'ओवरवेट' या अधिक वजन की श्रेणी में आता है। यह मानक 'सामान्य' बीएमआई रेंज (18.5-24.9) की धारणा के बिल्कुल विपरीत है।

ये भी पढ़ें- Weight Loss: चिया सीड्स के साथ मिला दें 5 रुपये की ये एक चीज, मोम की तरह पिघलने लगेगी पेट की चर्बी
विज्ञापन

3 of 5
क्या दुबला होना अधिक खतरनाक होता है? - फोटो : Freepik.com
क्यों है दुबलापन ज्यादा खतरनाक?
शोधकर्ताओं के अनुसार अत्यधिक दुबलापन अक्सर किसी गंभीर अंतर्निहित बीमारी का लक्षण हो सकता है। बहुत पतले लोगों में मृत्यु का अधिक खतरा इसलिए हो सकता है क्योंकि वे शायद पहले से ही किसी अघोषित बीमारी जैसे कैंसर, फेफड़ों के रोग, या पाचन संबंधी विकारों से जूझ रहे हों, जिसके कारण उनका वजन नहीं बढ़ पाता।

इसके अलावा शरीर में फैट और मांसपेशियों की कमी होने के कारण ऐसे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होती है, जिससे वे किसी भी संक्रमण या बीमारी का मुकाबला ठीक से नहीं कर पाते।

ये भी पढ़ें- Health Tips: सुबह गुनगुने पानी में एक चम्मच मिलाकर पी लें ये एक चीज, जड़ से दूर हो सकती हैं पेट की समस्याएं

4 of 5
मोटापा से होने वाले खतरों को न करें नजरअंदाज - फोटो : Freepik.com
मोटापे के खतरों को न करें नजरअंदाज
इस शोध का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि मोटापा सेहत के लिए अच्छा है। शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन अत्यधिक दुबलेपन के छिपे हुए खतरों को उजागर करता है, लेकिन इसका मतलब मोटापे को बढ़ावा देना नहीं है।

अत्यधिक मोटापा आज भी टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और कई प्रकार के कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियों का एक प्रमुख कारण है। यह अध्ययन केवल वजन के स्पेक्ट्रम के दोनों छोर पर मौजूद खतरों की ओर ध्यान आकर्षित करता है।

ये भी पढ़ें- Protein Deficiency: शरीर में प्रोटीन की कमी होने पर दिखते हैं ये लक्षण, कहीं आपको भी तो नहीं है?
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
संतुलित और स्थिर वजन (प्रतिकात्मक तस्वीर) - फोटो : Freepik.com
संतुलित और स्थिर वजन है सबसे अच्छा
इस शोध का सार यह है कि स्वास्थ्य का लक्ष्य अत्यधिक पतला होना नहीं, बल्कि एक संतुलित और स्थिर वजन बनाए रखना होना चाहिए। बहुत ज्यादा दुबलापन और बहुत ज्यादा मोटापा, दोनों ही सेहत के लिए हानिकारक हैं। समाज द्वारा तय किए गए सुंदरता के पैमानों के पीछे भागने के बजाय, लोगों को संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली के माध्यम से एक स्थिर वजन प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। किसी भी व्यक्ति के लिए आदर्श वजन उसकी उम्र, ऊंचाई और स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करता है, जिसके लिए डॉक्टर से सलाह लेना सबसे अच्छा तरीका है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें