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एसिम्पटोमेटिक कोरोना मरीज इस तरह से घर के अन्य मरीजों को कोरोना संक्रमण से बचाएं

Tue, 18 May 2021 06:43 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एंटीबॉडी टेस्ट में उनके शरीर में एंटीबॉडी पाई जाती है - फोटो : pixabay

Medically reviewed by Dr. Deepak Mahavar
डॉ दीपक माहवर, श्वास रोग विशेषज्ञ
सेंटर पॉइंट हॉस्पिटल, नागपुर
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.डी, डी.एन.बी
अनुभव- 10 वर्ष

एसिमप्टोमेटिक कोरोना मरीज अक्सर खुद को कोरोना मरीजों की श्रेणी में नहीं गिनते हैं क्योंकि ये वे मरीज हैं जिनको कोरोना के लक्षण तो नहीं दिखाई दे रहे हैं पर उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है। कई सारे एसिम्पटोमेटिक मरीज खुद का और अपनों की सुरक्षा का ध्यान इसलिए भी सही ढंग से नहीं रख पाते हैं। एसिम्पटोमेटिक मरीजों को रिपोर्ट पॉजिटिव आने के दौरान लक्षण भले ही न दिखते हों लेकिन बाद में एंटीबॉडी टेस्ट में उनके शरीर में एंटीबॉडी पाई जाती है जो कि इस बात का प्रमाण है कि उनके शरीर में वायरस ने प्रवेश किया था इसलिए अपनी कोरोना रिपोर्ट में संदेह न करते हुए खुद को आइसोलेट कर लें। अगली स्लाइड्स से जान्ए किस तरह आप घर के अन्य सदस्यों को संक्रमित होने से बचा सकते हैं। 

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परिवार के अन्य सदस्यों को भी संक्रमित कर सकते हैं - फोटो : iStock

सेल्फ आइसोलेशन में लापरवाही नहीं
जैसे ही रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, सेल्फ आइसोलेशन में चले जाएं। कई एसिम्पटोमेटिक मरीज ऐसे भी होते हैं जो रिपोर्ट पर संदेह करते हैं और एक बार और जांच करवाने का निर्णय लेते हैं, इस दौरान वे परिवार के साथ ही रहते हैं लेकिन इस बात को समझ नहीं पाते हैं वे कि लक्षण भले ही न दिख रहे हों लेकिन यदि वे संक्रमित हैं तो अपने परिवार के अन्य सदस्यों को भी संक्रमित कर सकते हैं। 

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अपने परिवार को जोखिम में डालने जैसा है - फोटो : iStock

जबतक न आ जाए निगेटिव रिपोर्ट
कई लोग 10 से 14 दिन आइसोलेशन में रहकर खुद से ही घर के अन्य सदस्यों के साथ रहने लगते हैं। वे फिर से जांच करवाते ही नहीं है जो कि बिल्कुल गलत है। एसिम्पटोमेटिक मरीजों का इस तरह से खुद से ही खुद को कोरोना निगेटिव मान लेना अपने परिवार को जोखिम में डालने जैसा है इसलिए जबतक रिपोर्ट निगेटिव नहीं आ जाती तबतक आइसोलेशन में ही रहें।

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परिवार के अन्य सदस्यों को संक्रमित कर सकता है - फोटो : iStock

घर के अन्य सदस्यों को अस्पताल ले जाना
कई एसिम्पटोमेटिक मरीज घर के अन्य सदस्यों को जांच आदि के लिए लेकर जाते हैं। उनका कहना पड़ता है कि वे तो स्वस्थ हैं, उन्हें कोई आराम की आवश्यकता नहीं है, घर के अन्य लोगों की जांच करवाने के लिए वे खुद उनको लेकर चले जाते हैं जो कि बिल्कुल भी ठीक नहीं है। मरीज भले ही एसिम्पटोमेटिक हो लेकिन उसके साथ एक ही गाड़ी पर आना- जाना करना परिवार के अन्य सदस्यों को संक्रमित कर सकता है। 

 

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संक्रमण का खतरा हो सकता है - फोटो : social media
अपना सामान दूर ही रखवाएं
किसी कमरे में आइसोलेट होने के बाद घर का कोई अन्य सदस्य आपको कोई सामान देने आता है तो हाथ से हाथ उसे न लें। सामान को नीचे जमीन पर रखवा दें और फिर ग्लव्स पहनकर अपना सामान उठाएं। इस सामान को फिर से घर के सदस्यों तक न पहुंचाएं। अपने खाने के बर्तन, कपड़े आदि खुद ही धोकर साफ करें। घर के सदस्य यदि इन्हें ले जाते हैं तो उन्हें संक्रमण का खतरा हो सकता है इसलिए ऐसा न करें। अपने परिवार के सदस्यों की सुरक्षा का ख्याल रखें। 
नोट- यह लेख सेंटर पॉइंट हॉस्पिटल के डॉक्टर दीपक माहवर से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर दीपक महावर पिछले 10 सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने अपनी डिग्री एम.बी.बी.एस गवर्नमेंट कॉलेज एंड हॉस्पिटल, नागपुर से ली है।
अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 



 
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