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Arthritis Risk: दिनचर्या की ये गलतियां 35 में ही बना देती हैं आर्थराइटिस का मरीज, अभी से बरतें ये सावधानियां

Sat, 14 Feb 2026 06:06 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Causes Of Early Joint Pain: कम उम्र में आर्थराइटिस की शिकायत होना आज के दिनों में बहुत आम हो गया है। देखा जाए तो बहुत से लोग इस समस्या से परेशान रहते हैं, मगर ऐसा होने के पीछे का सबसे बड़ा कारण कम उम्र की खराब जीवनशैली है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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आर्थराइटिस - फोटो : Adobe Stock
Arthritis Symptoms At 35: आर्थराइटिस या गठिया को पहले बुढ़ापे की बीमारी माना जाता था, मगर पिछले कुछ वर्षों में 30 से 35 वर्ष के युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में जोड़ों के दर्द और सूजन का मुख्य कारण हमारी बिगड़ती जीवनशैली और दिनचर्या की छोटी-छोटी गलतियां हैं। लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करना, शारीरिक सक्रियता की कमी, और जंक फूड का अत्यधिक सेवन हमारे जोड़ों के कार्टिलेज को समय से पहले घिसने पर मजबूर कर देता है। 

इसके अलावा गलत पोस्चर में घंटों मोबाइल या लैपटॉप का जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल करना भी रीढ़ की हड्डी और गर्दन के जोड़ों पर अत्यधिक दबाव डालता है। अगर आप भी सुबह उठने पर जोड़ों में अकड़न महसूस करते हैं या सीढ़ियां चढ़ते समय घुटनों में कट-कट की आवाज आती है, तो यह आर्थराइटिस की शुरुआती दस्तक हो सकती है। इन संकेतों को नजरअंदाज करना भविष्य में आपको लाचार बना सकता है, इसलिए समय रहते अपनी आदतों में सुधार करना बहुत जरूरी है।
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खराब पॉश्चर - फोटो : Adobe Stock
खराब पोस्चर और निष्क्रिय जीवनशैली
आजकल की 'सेडेंटरी लाइफस्टाइल' आर्थराइटिस का सबसे बड़ा कारण है। ऑफिस में घंटों गलत तरीके से बैठने से कूल्हे और घुटनों के जोड़ों पर असामान्य भार पड़ता है। व्यायाम की कमी से मांसपेशियों में लचीलापन खत्म हो जाता है, जिससे जोड़ों को सहारा मिलना बंद हो जाता है। दिन में कम से कम 30 मिनट टहलना या स्ट्रेचिंग करना आपके कार्टिलेज के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

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मोटापा - फोटो : Freepik.com
बढ़ता वजन और अनहेल्दी डाइट का असर
अगर किसी व्यक्ति का वजन तेजी से बढ़ रहा है तो शरीर के बढ़े हुए वजन का सीधा असर आपके घुटनों और टखनों के जोड़ों पर पड़ता है। अत्यधिक वजन जोड़ों के बीच के 'साइनोवियल फ्लूइड' को कम कर देता है, जिससे हड्डियां आपस में रगड़ने लगती हैं। साथ ही प्रोसेस्ड फूड, चीनी और अधिक नमक वाली डाइट शरीर में 'इंफ्लेमेशन' (सूजन) बढ़ाती है। पोषक तत्वों, विशेषकर विटामिन-D और कैल्शियम की कमी हड्डियों को अंदर से खोखला कर देती है, जिससे कम उम्र में ही गठिया का जोखिम बढ़ जाता है।

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धूम्रपान - फोटो : Adobe Stock Photos
धूम्रपान और नींद की कमी की भूमिका
शायद आपको जानकर हैरानी हो, लेकिन धूम्रपान सीधे तौर पर हड्डियों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। तंबाकू में मौजूद टॉक्सिन्स हड्डियों के घनत्व को कम करते हैं और जोड़ों में सूजन बढ़ाते हैं। इसी तरह पर्याप्त नींद न लेने से शरीर की रिकवरी धीमी हो जाती है। रात के समय ही जोड़ों के ऊतकों की रिकवरी होती है, और नींद की कमी इस नेचुरल हीलिंग प्रक्रिया को बाधित कर आर्थराइटिस के जोखिम को बढ़ा देती है।
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बच्चों में आर्थराइटिस की समस्या - फोटो : Freepik.com
समय पर सावधानी ही है बचाव
आर्थराइटिस से बचने के लिए अपनी दिनचर्या में संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को शामिल करें। कैल्शियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ को डाइट में शामिल करें, इससे जोड़ों की चिकनाई बनाए रखने में मदद मिलती है। अगर जोड़ों में लगातार दर्द या लाली महसूस हो, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें। ध्यान रखें हड्डियों का स्वास्थ्य आपकी सक्रियता पर काफी हद तक निर्भर करता है। आज की गई थोड़ी सी सावधानी आपको भविष्य के असहनीय दर्द और सर्जरी से बचा सकती है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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