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Arthritis: आर्थराइटिस अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं, बच्चे भी हो रहे शिकार; जानिए क्यों होती है ये दिक्कत

Mon, 03 Aug 2026 04:20 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

 आर्थराइटिस केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। बच्चों में भी यह बीमारी हो सकती है, जिसे जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस कहा जाता है। कहीं आपका बच्चा भी तो इसका शिकार नहीं है?
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बच्चों में आर्थराइटिस के मामले - फोटो : Amarujala.com/AI
आर्थराइटिस का नाम सुनते ही सबसे पहले हमारे दिमाग में बुजुर्गों की घुटनों में दर्द वाली तस्वीर सामने आ जाती है। आमतौर पर यही माना जाता रहा कि गठिया केवल बुजुर्गों की बीमारी है। लेकिन पिछले कुछ दशकों में 40 से कम उम्र के लोगों में भी आर्थराइटिस के बढ़ते मामले देखे गए हैं। इतना ही नहीं बच्चे भी इस समस्या का शिकार हो सकते हैं।

डॉक्टर कहते हैं, कई बार माता-पिता बच्चे के घुटने, टखने या कलाई में दर्द को खेल-कूद की सामान्य चोट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, यही लापरवाही बीमारी को गंभीर बना सकती है।

बच्चों में होने वाले आर्थराइटिस को जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (जेआईए) कहा जाता है। आंकड़ों से पता चलता है कि दुनियाभर में हर 1000 में से एक बच्चा इसका शिकार हो सकता है।  ये 16 साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाले आर्थराइटिस का सबसे आम प्रकार है। बच्चों में ये दिक्कत तब होती है जब इम्यून सिस्टम बहुत ज्यादा सक्रिय हो जाता है और शरीर में सूजन पैदा करने लगता है। कुछ बच्चों में ये लक्षण सिर्फ कुछ वर्षों तक रहते हैं, जबकि कुछ में ये लंबे समय तक बना रह सकता है।

कही आपका बच्चा भी तो गठिया का शिकार नहीं है?
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बच्चों में आर्थराइटिस की बढ़ती समस्या - फोटो : Freepik.com
बच्चों में क्यों होती है ये दिक्कत?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कुछ मामलों में जेआईए का असर केवल जोड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आंखों, हड्डियों और बच्चे के शारीरिक विकास पर भी पड़ सकता है। इसका अगर समय पर पहचान और इलाज न हो पाए तो इससे जोड़ों में स्थाई नुकसान, चलने-फिरने में कठिनाई और जीवनभर की विकलांगता तक का खतरा हो सकता है।
 
  • मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस का कारण शरीर के इम्यून सिस्टम के अपने ही स्वस्थ कोशिकाओं पर अटैक करने की वजह से होता है।
  • हालांकि ऐसी स्थिति क्यों होती है विशेषज्ञों का इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। कुछ मामलों में इसके लिए आनुवंशिकता और पर्यावरण की समस्याओं को जिम्मेदार माना जाता है।
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बच्चों में गठिया के मामले - फोटो : Freepik.com
कहीं आपका बच्चा भी तो नहीं है शिकार?

बच्चों में आर्थराइटिस के लक्षण हमेशा तेज दर्द के रूप में नहीं आते। 
 
  • कई बार बच्चा सुबह उठने के बाद जोड़ों में अकड़न महसूस करता है, लंगड़ाकर चलता है या किसी एक हाथ-पैर का कम इस्तेमाल करता है।
  • घुटने, टखने, कलाई या उंगलियों में सूजन दिखाई दे सकती है। 
  • कुछ बच्चों को हल्का बुखार, थकान या भूख कम लगने की समस्या भी होती है।
  • यदि ये लक्षण छह सप्ताह या उससे अधिक समय तक बने रहें तो जांच करानी चाहिए। 

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आर्थराइटिस के कारण आंखों की समस्या - फोटो : Freepik.com
जोड़ों के साथ दूसरे अंगों पर भी हो सकता है असर

जुवेनाइल आर्थराइटिस को केवल जोड़ों तक सीमित नहीं माना जाता। इसके कारण कुछ बच्चों में आंखों की अंदरूनी परत में सूजन हो सकती है समय पर जांच न होने पर इससे दृष्टि प्रभावित हो सकती है। कुछ प्रकार के जेआईए में बुखार, त्वचा पर चकत्ते, लिम्फ नोड्स की सूजन या अन्य अंगों पर भी असर देखा जा सकता है। 

जेआईए के कारण बच्चे का विकास भी धीमा होने का खतरा रहता है, ये हड्डियों के विकास पर असर डाल सकता है। 
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बच्चों में आर्थराइटिस की समस्या - फोटो : Freepik.com
बच्चे को आर्थराइटिस हो जाए तो क्या करें?

आर्थराइटिस के शिकार बच्चों में इलाज के माध्यम से दर्द और सूजन को कम करने और जोड़ों को होने वाले नुकसान से बचाने पर ध्यान दिया जाता है। इसके लिए सूजन कम करने वाली दवाएं दी जा सकती हैं। इस समस्या के शिकार ज्यादातर बच्चों को दवाओं के साथ लाइफस्टाइल और डाइट में सुधार की भी सलाह दी जाती है।

डॉक्टरों का मानना है कि समय पर रोग की पहचान और इलाज होने से गठिया की समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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