प्रतीकात्मक तस्वीर
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यहां आपको बता दें कि, डॉक्टर सूर्यकांत इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एवं इम्यूनोलॉजी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा था कि, 'वायु प्रदूषण का असर फेफड़ों पर ही नहीं बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों पर भी पड़ता है। कम तापमान व स्मॉग के कारण धूल के कण ऊपर नहीं जा पाते, जिसके कारण वो नीचे ही वायरस व बैक्टीरिया के संवाहक का कार्य करते हैं। इसलिए बाहर बिना मास्क लगाए निकलने पर ये वायरस सांस के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर लेता है।'