फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कितना जरूरी मास्क: कोरोना वायरस ही नहीं टीबी, अस्थमा और निमोनिया से भी बचाता है ये, जानें कैसे

Sat, 10 Apr 2021 05:18 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डॉक्टर सूर्यकांत
लखनऊ के किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के श्वसन रोग विभाग के प्रमुख

देश में साल 2020 जैसे हालात फिर से बन चुके हैं। कोरोना वायरस पिछले बार के मुकाबले इस बार तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रहा है। हर दिन संक्रमित लोगों की संख्या में लगातार काफी इजाफा हो रहा है, और शुरुआत से ही लोगों को एक बात के लिए कहा जा रहा है कि वो मास्क पहने। बावजूद इसके कई लोग या तो मास्क नहीं पहन रहे या फिर मास्क को ऐसे पहन रहे हैं, जिससे वो वायरस से तो बचे नहीं रह सकते। लेकिन लोग शायद ये नहीं जानते कि मास्क सिर्फ आपको कोरोना वायरस ही नहीं, बल्कि अन्य बीमारियों से भी बचाता है।
विज्ञापन

2 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दरअसल, आपको थोड़ा सा पीछे ले जाकर याद दिलाते हैं कि पिछले दिनों लखनऊ के किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के श्वसन रोग विभाग के प्रमुख डॉक्टर सूर्यकांत ने कहा था कि मास्क पहनने से सिर्फ कोविड-19 महामारी से ही नहीं क्षय रोग (तपेदिक), निमोनिया और कई तरह की एलर्जी से भी बचाव होता है। उनका मानना है कि बढ़ते प्रदूषण के बीच मास्क पहनना जरूरी है।
विज्ञापन

3 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
यहां आपको बता दें कि, डॉक्टर सूर्यकांत इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एवं इम्यूनोलॉजी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा था कि, 'वायु प्रदूषण का असर फेफड़ों पर ही नहीं बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों पर भी पड़ता है। कम तापमान व स्मॉग के कारण धूल के कण ऊपर नहीं जा पाते, जिसके कारण वो नीचे ही वायरस व बैक्टीरिया के संवाहक का कार्य करते हैं। इसलिए बाहर बिना मास्क लगाए निकलने पर ये वायरस सांस के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर लेता है।'

4 of 5
ड्राइविंग के दौरान मास्क की आवश्यकता - फोटो : iStock
डॉक्टर सूर्यकांत ने इस बात पर जोर दिया था कि, 'घर से बाहर निकलते समय अपने मुंह और नाक को मास्क से अच्छी तरह के ढंककर रखें। ऐसा करने से बैक्टीरिया से जुड़ी बीमारियों जैसे कोरोना वायरस टीबी व निमोनिया, अस्थमा, वायु प्रदूण और कई तरह की एलर्जी से बचा जा सकता है।'
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
उनके मुताबिक, 'वायु प्रदूषण में पार्टिकुलेट मैटर यानी पीएम 2.5 माइक्रान यानी बहुत ही महीन धूल कण ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ये सांस लेने के रास्ते से फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं।' इसलिए आपको मास्क तो पहनना ही चाहिए।

नोट: यह लेख डॉक्टर सूर्यकांत की बातों के आधार पर तैयार किया गया है। वे लखनऊ के किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के श्वसन रोग विभाग के प्रमुख हैं। साथी ही डॉक्टर सूर्यकांत इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एवं इम्यूनोलॉजी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला के  हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें