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Anaemia Mukt Bharat: एनीमिया की रोकथाम के लिए नई गाइडलाइन जारी, नियमित जांच के साथ इन चीजों पर रहेगा फोकस

Mon, 29 Jun 2026 05:39 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 16वीं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की बैठक में ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान की नई ऑपरेशनल गाइडलाइन जारी किया।
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एनीमिया का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
केंद्र सरकार ने एनीमिया मुक्त भारत अभियान को लेकर बड़ा बदलाव किया है। देश में एनीमिया के मामलों को तेजी से कम करने के लिए नई ऑपरेशनल गाइडलाइन जारी की गई है। इसके तहत अब तक लागू 6×6×6 रणनीति को बढ़ाकर 7×7×7 रणनीति बनाया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 16वीं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की बैठक में ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान की नई ऑपरेशनल गाइडलाइन जारी किया।

नई रणनीति के तहत जन्म के समय कम वजन वाले शून्य से छह महीने तक के नवजात शिशुओं को भी अभियान में शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य जीवन के शुरुआती चरण से ही एनीमिया की रोकथाम और इलाज को मजबूत बनाना है। 
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महिलाओं में एनीमिया का खतरा - फोटो : Freepil.com
नई गाइडलाइन में क्या खास?

सरकार का कहना है कि कार्यक्रम को अधिक व्यापक, जन-केंद्रित और तकनीक आधारित अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। इसके तहत अब केवल आयरन की गोलियां देने तक सीमित रहने के बजाय जांच, इलाज, सही खान-पान, डिजिटल ट्रैकिंग और जनभागीदारी को भी अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा।
 
  • इस नई गाइडलाइन में पहली बार, जन्म के समय कम वजन 6 महीने तक के शिशुओं को सातवें लाभार्थी समूह के रूप में शामिल किया गया है।
  • इसके अलावा ‘ईटिंग राइट’ (संतुलित और आयरन युक्त भोजन) को सातवें हस्तक्षेप के रूप में जोड़ा गया है, ताकि लोगों में रोजाना पोषणयुक्त भोजन की आदत विकसित हो सके।
  • डिजिटल ट्रैकिंग के साथ मजबूत मॉनिटरिंग और मूल्यांकन प्रणाली को सातवें संस्थागत तंत्र के रूप में शामिल किया गया है।
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खून की कमी की समस्या - फोटो : Freepik.com
सेवा मॉडल में भी बदलाव टी-3 की जगह टी-4 मॉडल

सरकार ने सेवा मॉडल में भी बदलाव किया है। अब 'टेस्ट, ट्रीट और टॉक' (टी-3) की जगह 'टेस्ट, ट्रीट, टॉक और ट्रैक' (टी-4) मॉडल अपनाया जाएगा।
 
  • इसके तहत हीमोग्लोबिन की जांच, आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया का इलाज, मरीजों की नियमित निगरानी और पोषण संबंधी सलाह पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 
  • गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं या जिन पर आयरन की गोलियों का असर नहीं होता, उनके लिए नस के जरिए फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज और आयरन सुक्रोज देने का प्रावधान भी किया गया है।

नई व्यवस्था में एनीमिया से जुड़े सभी रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा। गर्भवती महिलाओं की जांच का रिकॉर्ड जननी पोर्टल पर, जबकि बच्चों का रिकॉर्ड आईबीएसएक और यू-विन (U-WIN) पोर्टल पर दर्ज होग।  इसमें बाद में इन सभी प्लेटफॉर्म को एकीकृत कर एनीमिया मुक्त भारत अभियान पोर्टल बनाया जाएगा।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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