खून की कमी की समस्या
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सेवा मॉडल में भी बदलाव टी-3 की जगह टी-4 मॉडल
सरकार ने सेवा मॉडल में भी बदलाव किया है। अब 'टेस्ट, ट्रीट और टॉक' (टी-3) की जगह 'टेस्ट, ट्रीट, टॉक और ट्रैक' (टी-4) मॉडल अपनाया जाएगा।
- इसके तहत हीमोग्लोबिन की जांच, आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया का इलाज, मरीजों की नियमित निगरानी और पोषण संबंधी सलाह पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं या जिन पर आयरन की गोलियों का असर नहीं होता, उनके लिए नस के जरिए फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज और आयरन सुक्रोज देने का प्रावधान भी किया गया है।
नई व्यवस्था में एनीमिया से जुड़े सभी रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा। गर्भवती महिलाओं की जांच का रिकॉर्ड जननी पोर्टल पर, जबकि बच्चों का रिकॉर्ड आईबीएसएक और यू-विन (U-WIN) पोर्टल पर दर्ज होग। इसमें बाद में इन सभी प्लेटफॉर्म को एकीकृत कर एनीमिया मुक्त भारत अभियान पोर्टल बनाया जाएगा।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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