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Women Health: हर पांच में से 3 महिलाओं को ये गंभीर समस्या, शुरुआत में ऐसे लक्षणों को बिल्कुल न करें इग्नोर

Thu, 20 Mar 2025 07:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आंकड़े बताते हैं कि देश में हर 5 में से 3 महिला एनीमिया की शिकार है। एनीमिया तब होता है जब शरीर में पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। एनीमिया भले ही खून की कमी से संबंधित बीमारी है पर इसका असर संपूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
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महिलाओं में एनीमिया का खतरा - फोटो : Freepik.com
लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण कई प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। बच्चे हों या बुजुर्ग, महिलाएं हों या पुरुष सभी इसका शिकार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जब बात महिलाओं के सेहत की हो तो कुछ बीमारियां चिंता बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

आंकड़े बताते हैं कि देश में हर 5 में से 3 महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। एनीमिया तब होता है जब शरीर में पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। एनीमिया भले ही खून की कमी से संबंधित बीमारी है पर इसका असर संपूर्ण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

एनीमिया के शिकार लोगों में थकान, कमजोरी और चक्कर आना जैसे लक्षण होते हैं, अगर इसपर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। आयरन, विटामिन बी -12 या फोलेट की कमी, कुछ प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों या आनुवंशिक विकारों के कारण आप एनीमिया का शिकार हो सकती हैं, इसपर गंभीरता से ध्यान देना बहुत जरूरी है।
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महिलाओं में बढ़ती एनीमिया का समस्या - फोटो : Freepik.com
कम उम्र की लड़कियां भी हो रही हैं शिकार

महिला रोग विशेषज्ञ बताती हैं, किशोर और गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की दिक्कत ज्यादा देखी जाती है। आमतौर पर महिलाएं कमजोरी, थकान जैसे शुरुआती संकेतों को अनदेखा कर देती हैं, जिसके कारण समय पर इस बीमारी का निदान और इलाज नहीं हो पाता है।
  • कई शोध बताते हैं कि भारतीय महिलाओं के भोजन में आयरन युक्त आहार की कमी होती है।
  • विशेषतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में ये दिक्कत ज्यादा देखी जा रही है।
  • हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, और प्रोटीन युक्त भोजन का कम सेवन विटामिन B12 और फोलिक एसिड की कमी का कारण बनता है जो एनीमिया को बढ़ावा देती हैं।
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खून की कमी और इसके कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
एनीमिया के इन कारणों को भी जानिए

आहार में गड़बड़ी के अलावा एनीमिया के लिए कई और भी स्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं। जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन, दिनभर में अधिक बार चाय और कॉफी पीने से आयरन का अवशोषण कम हो जाता है, इससे भी आप एनीमिया का शिकार हो सकती हैं।
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताती हैं जिन महिलाओं को पीरियड्स में अधिक रक्तस्राव होता है, उनमें हीमोग्लोबिन की कमी होने लगती है।
  • गर्भावस्था के दौरान आयरन की अधिक आवश्यकता होती है, सही पोषण न लेने से एनीमिया हो सकता है, इसका असर बच्चे की सेहत पर भी देखा जाता रहा है।

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एनीमिया के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
इस तरह के लक्षणों को न करें अनदेखा

डॉक्टर बताती हैं, एनीमिया के लक्षणों को बिल्कुल भी अनदेखा न करें। 20 की उम्र में भी लड़कियों को ये दिक्कत हो रही है इसलिए कम उम्र से ही एनीमिया के संकेतों पर ध्यान देते रहें। 

लगातार थकान और कमजोरी रहना, अक्सर सिरदर्द और चक्कर आना, त्वचा का पीला पड़ना, सांस फूलना और दिल की धड़कनों का अक्सर बढ़ा रहा संकेत है कि आपके शरीर में खून की कमी हो सकती है। जिन लोगों के हाथ-पैर अक्सर ठंडे रहते हैं उन्हें विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
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खान पान में करें सुधार - फोटो : Freepik.com
एनीमिया से बचाव के क्या तरीके हैं?

एनीमिया से बचाव के लिए खान-पान को ठीक रखना सबसे जरूरी है। इसके लिए आयरन वाली चीजों का सेवन बढ़ाएं। 
  • हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, सरसों), चुकंदर, अनार, सेब, गुड़ और सूखे मेवे खाएं।
  • दालें, चना, सोयाबीन और अंकुरित अनाज प्रोटीन का अच्छा स्रोत हैं, अच्छे पोषण के लिए ये बहुत आवश्यक है।
  • आहार में विटामिन-सी (नींबू, संतरा, आंवला) वाली चीजें भी जरूर होनी चाहिए। ये शरीर को आयरन को बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करता है।
  • जिन लोगों को एनीमिया की दिक्कत है उन्हें डॉक्टर की सलाह पर आयरन और फोलिक एसिड की दवा लेनी चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह पर आयरन की गोलियां लेनी चाहिए।
  • समय-समय पर खून की जांच करवाकर हीमोग्लोबिन का स्तर चेक कराएं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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