फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्या फल-सब्जी या परचून की दुकान से घर आकर नहाना जरूरी है? जानें ऐसे ही 7 जरूरी सवालों के जवाब

Sun, 31 May 2020 06:41 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 8
Coronaindia - फोटो : PTI
दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस के कारण लोगों में एक तरह से डर का माहौल है। बीमारी से ज्यादा इसके बारे में फैल रही अफवाहें और झूठ, लोगों के डर के पीछे की बड़ी वजह है। ऐसे माहौल में इन दिनों लोग विशेषज्ञों और डॉक्टरों से कोरोना फैलने को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। लॉकडाउन के बीच लोग सोशल डिस्टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं और अपने घरों में रह रहे हैं। लेकिन जरूरी सामान और राशन लाने तो बाहर जाना ही पड़ता है। अब तो अनलॉक 1.0 के दिशानिर्देश भी जारी हो चुके हैं, जाहिर है कि लोगों की आवाजाही और अन्य गतिविधियां बढ़ेगी। ऐसे में बाहर जाने वाले लोग ज्यादा आशंकित रहते हैं। कई लोग कपड़े, जूते से लेकर दाढ़ी-बाल के जरिए कोरोना फैलने से जुड़े सवालों के जवाब जानना चाहते हैं। ऐसे कई जरूरी सवालों के जवाब वैज्ञानिकों ने दिए हैं।
विज्ञापन

2 of 8
नई दिल्ली में लॉकडाउन के दौरान खाने के पैकेट लेने के लिए इंतजार करती महिलाएं। - फोटो : PTI(File)
क्या परचून, फल-सब्जी या दवा की दुकान से घर आने के बाद कपड़े धोना और नहाना चाहिए?
  • ज्यादातर लोग, जो सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं, उन्हें इसकी कोई जरूरत नहीं है। हां, घर आकर साबुन से हाथ जरूर धोएं। घर से बाहर किसी संक्रमित के होने की आशंका बनी रहती है। उसकी छींक या खांसी की बूंदें आप तक न पहुंचे, इसके लिए छह फुट की दूरी पर खड़े हों। हालांकि छोटी बूंदें हवा में कुछ देर तक रह सकती हैं, लेकिन एरोडायनेमिक्स के कारण इनके कपड़ों पर ठहरने की संभावना बहुत कम होती है।
विज्ञापन

3 of 8
दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर खाने के पैकेट लेने के लिए लाइन में खड़े शख्स के शरीर का तापमान जांचता स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : PTI(File)
वायरस समेटे छोटी बूंदें कपड़ों पर क्यों नहीं ठहरतीं?
  • छोटी बूंदें हमारे चारों ओर मौजूद हवा के प्रवाह के साथ बहती हैं और तेज गति से चलती किसी वस्तु से टकराती हैं। चूंकि इंसान बहुत धीमी गति से चलता है, इसलिए इनके हमारे टकराने की आशंका न बराबर है। सिर्फ भारी बूंदें ही तत्काल हमारे अंगों या कपड़ों पर गिर सकती हैं क्योंकि ये हवा के प्रवाह के साथ नहीं बह पातीं। अगर बाहर जाने पर ऐसा हो तो ही घर आकर नहाएं और कपड़े धोएं।

4 of 8
क्या दाढ़ी या सिर के बालों पर भी वायरस ठहर पाएगा?
  • अगर आप सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं, तो शरीर पर कहीं भी वायरस नहीं आ सकता। अगर किसी संक्रमित की छींक या खांसने की ढेरों बूंदें आपके बालों या दाढ़ी पर गिरती हैं, तो वहां वायरस की आशंका बनती है। इसके बाद, अगर आप बालों पर हाथ लगाकर उसे नाक, मुंह या आंख पर लगाते हैं तो ही संक्रमण की स्थिति पैदा होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह वायरस फैलने के बहुत ही कम आशंका होती है।
विज्ञापन

5 of 8
साबुन या सर्फ से धुलाई में वायरस मर जाएगा
क्या धुलाई से मर जाता है वायरस?
  • साबुन या डिटर्जेंट से कपड़े धोते रहें। अगर किसी सूरत में कपड़े पर वायरस होगा, तो साबुन या सर्फ से धुलाई में मर जाएगा। इसलिए घबराने की कोई बात नहीं है।
विज्ञापन

6 of 8
प्रतीकात्मक तस्वीर
कपड़ों पर वायरस कितनी देर ठहर सकता है?
  • अध्ययन धातु पर तीन दिन और गत्ते पर एक दिन वायरस ठहरने की ओर इशारा करते हैं। कपड़ों पर विशेष अध्ययन नहीं हुआ है। लेकिन, विशेषज्ञों का कहना है कि गत्ते की सोखने वाली प्रकृति के कारण उस पर वायरस कम देर ठहरता है, कपड़े पर भी यही संभावना है। 
विज्ञापन

7 of 8
Shoes - फोटो : Pixabay
जूतों को भी डिसइंफेक्टेंट करना जरूरी है?
  • जूते वायरस का वाहक हो सकते हैं, लेकिन ये संक्रमण के आम स्रोत नहीं हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे जूते पहनकर जाएं जो घर आते ही साबुन से धुल सकें। साथ ही घर में जूते लाने पर रोक लगा सकें तो बेहतर होगा। 
विज्ञापन

8 of 8
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
क्या सामान के डिलीवरी पैकेज, अखबार पर वायरस को लेकर चिंतित होना चाहिए?
  • किसी पैकेज पर संक्रमण की आशंका बेहद कम है। अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया, जो अखबार पढ़ने या पैकेज खोलने से संक्रमण की तस्दीक करता हो।

यह भी पढ़ें: कोरोना वायरस से निपटने को 'हर्ड इम्यूनिटी' किसी भी देश के लिए बहुत बड़ा जोखिम

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें