दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का असर
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भारत में बढ़ता वायु प्रदूषण का जोखिम
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के नेतृत्व में 71 शैक्षणिक संस्थानों और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के 128 विशेषज्ञों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने ये रिपोर्ट तैयार की है। लेखकों ने कहा कि 30वें संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (कॉप30) से पहले प्रकाशित यह रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य के बीच संबंधों का अब तक का सबसे व्यापक आकलन प्रस्तुत करती है।
दिल्ली में वायु प्रदूषण के लगातार उच्च स्तर को देखते हुए ये निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से वायु गुणवत्ता "खराब" और "बेहद खराब" के बीच बनी हुई है। प्रदूषण की समस्या से निपटने के प्रयास में पिछले सप्ताह राष्ट्रीय राजधानी के बुराड़ी, करोल बाग और मयूर विहार जैसे कुछ हिस्सों में क्लाउड-सीडिंग परीक्षण किए गए। हालांकि, पर्यावरणविद इसे एक अल्पकालिक उपाय बताते हैं।
लैंसेट रिपोर्ट के साथ देश-संबंधित डेटा शीट में लेखकों ने बताया, भारत में साल 2022 में मानव-जनित वायु प्रदूषण (पीएम 2.5) के कारण 17.18 लाख से अधिक मौतें हुईं, जो 2010 से 38 प्रतिशत की वृद्धि है। जीवाश्म ईंधन (कोयला और तरल गैस) के कारण 2022 में इन मौतों में 7.52 लाख (44 प्रतिशत) का हिस्सा रहा।