वायु प्रदूषण वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। दिल्ली-एनसीआर में इसका खतरा साल के अधिकतर महीनों में बना रहता है। प्रदूषित हवा में सांस लेना सेहत को कई तरह से नुकसान पहुंचाने वाला माना जाता रहा है। आमतौर प्रदूषण की बात होते ही सबसे पहले दिमाग में फेफड़ों और सांस की बीमारियों का ख्याल आता है। अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं से पहले से ही परेशान लोगों के लिए प्रदूषित हवा और भी खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है।
पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, प्रदूषित हवा का असर सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं है। हवा में मौजूद बेहद सूक्ष्म कण जैसे पीएम2.5, सांस के साथ फेफड़ों की गहराई तक जा सकते हैं और कुछ कण खून के प्रवाह तक में भी मिल जाते हैं। खून के साथ ये हानिकारक कण मस्तिष्क, हृदय तक भी जाकर नुकसान पहुंचाने वाले हो सकते हैं।
यही वजह है कि खराब हवा का असर सिर्फ सांस फूलने या खांसी तक सीमित नहीं हैं, अध्ययनों में दिल, दिमाग और रक्त वाहिकाओं पर भी इसका नकारात्मक असर देखा गया है।