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प्रदूषण के खतरे: पीएम 2.5 के छोटे कण शरीर में कर सकते हैं बड़े नुकसान, इन अंगों पर होता है सबसे ज्यादा असर

Mon, 14 Sep 2026 07:01 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

प्रदूषण का असर सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता। पीएम2.5 जैसे महीन कण आंखों, सांस की नलियों, दिल, रक्त वाहिकाओं और दिमाग तक असर डाल सकते हैं। प्रदूषित हवा के कारण हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का खतरा हो सकता है।
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वायु प्रदूषण से होने वाले खतरे - फोटो : Amarujala.com/AI
वायु प्रदूषण वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। दिल्ली-एनसीआर में इसका खतरा साल के अधिकतर महीनों में बना रहता है। प्रदूषित हवा में सांस लेना सेहत को कई तरह से नुकसान पहुंचाने वाला माना जाता रहा है। आमतौर प्रदूषण की बात होते ही सबसे पहले दिमाग में फेफड़ों और सांस की बीमारियों का ख्याल आता है। अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं से पहले से ही परेशान लोगों के लिए प्रदूषित हवा और भी खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है।

पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, प्रदूषित हवा का असर सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं है। हवा में मौजूद बेहद सूक्ष्म कण जैसे पीएम2.5, सांस के साथ फेफड़ों की गहराई तक जा सकते हैं और कुछ कण खून के प्रवाह तक में भी मिल जाते हैं। खून के साथ ये हानिकारक कण मस्तिष्क, हृदय तक भी जाकर नुकसान पहुंचाने वाले हो सकते हैं। 

यही वजह है कि खराब हवा का असर सिर्फ सांस फूलने या खांसी तक सीमित नहीं हैं, अध्ययनों में दिल, दिमाग और रक्त वाहिकाओं पर भी इसका नकारात्मक असर देखा गया है।
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प्रदूषण का सेहत पर असर - फोटो : Adobe Stock
प्रदूषण का संपूर्ण स्वास्थ्य पर हो सकता है असर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार वायु प्रदूषण हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़ों की बीमारी और कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाने वाला हो सकता है। इससे शरीर को होने  वाले अंदरूनी नुकसान कई बार बिना किसी स्पष्ट संकेत के होते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस यानी कोशिकाओं पर हानिकारक रसायनों का दबाव बढ़ सकता है। ये स्थिति कई तरह की क्रॉनिक बीमारियों का सबसे बड़ा कारण मानी जाती है।

वायु प्रदूषण के कारण होने वाली दिक्कतों को सिर्फ सांस की समस्याओं तक नहीं देखा जाना चाहिए।
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प्रदूषण का आंखों पर असर - फोटो : Freepik.com
आंखें और सांस की समस्याएं

प्रदूषित हवा के संपर्क में आने पर आंखों में जलन, लालिमा, पानी आना और खुजली जैसी समस्या हो सकती है। धूल, धुआं और दूसरे प्रदूषक आंखों की सतह पर मौजूद नमी और सुरक्षा परत को प्रभावित कर सकते हैं। इसके साथ आपको नाक में जलन, छींक और गले में खराश भी हो सकती है। जिन लोगों को पहले से एलर्जी या सांस की बीमारी है, उनमें प्रदूषित हवा लक्षणों को बढ़ा सकती है।
 
  • वायु प्रदूषण फेफड़ों की सेहत के लिए भी खतरनाक माना जाता है। पीएम2.5 जैसे महीन कण फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं। इनके लंबे समय तक संपर्क में रहने से सांस की नली में सूजन और फेफड़ों की कार्यक्षमता पर असर पड़ सकता है।

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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Adobe Stock Images
दिल की सेहत के लिए खतरा

प्रदूषित हवा में मौजूद महीन कण सिर्फ फेफड़ों को ही नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। पीएम2.5 शरीर में सूजन और रक्त वाहिकाओं पर भी दबाव डाल सकता है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क के कारण कुछ लोगों में हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिमों को बढ़ा हुआ पाया गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हृदय रोग की समस्या है उनमें इसका और भी गंभीर असर देखा जा सकता है। यही कारण है कि प्रदूषण वाले दिनों में बाहर कम निकलने और शारीरिक गतिविधियों को लेकर सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।
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प्रदूषण का ब्रेन हेल्थ पर असर - फोटो : Adobe Stock
दिमाग को भी खतरा

वायु प्रदूषण के लंबे समय संपर्क को अध्ययनों में ब्रेन हेल्थ को भी नुकसान पहुंचाने वाला पाया गया है। लंबे समय में प्रदूषण के कारण शरीर में सूजन और रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ सकता है, जिससे दिमाग तक जाने वाली रक्त आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण को स्ट्रोक के प्रमुख पर्यावरणीय जोखिमों में शामिल किया गया है। अध्ययनों से पता चलता है कि बच्चों के विकास के दौर में प्रदूषित हवा के अधिक संपर्क के कारण दिमाग के विकास पर असर हो सकता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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