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CoronaVirus: वायु प्रदूषण के कारण कोविड-19 से मौत का खतरा, सांस के मरीजों की मुश्किलें भी बढ़ीं

Fri, 06 Nov 2020 07:49 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली में प्रदूषण(File Photo) - फोटो : अमर उजाला
कोरोना महामारी काल में बढ़ते संक्रमण के बीच अब वायु प्रदूषण भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। दिल्ली-एनसीआर और कुछ अन्य मेट्रो शहरों में वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। हवा की गुणवत्ता इतनी खराब होती जा रही है कि सांस लेना भी दूभर हो गया है। खासकर कोरोना के मरीजों के लिए और जिन लोगों को पहले से ही अस्थमा जैसी सांस की बीमारी हैं, उनके लिए यह प्रदूषण घातक साबित हो सकता है। हालिया शोध अध्ययनों के मुताबिक वायु प्रदूषण के कारण कोविड-19 से होने वाली मृत्यु का खतरा बढ़ गया है। पराली जलाने और दिवाली में संभावित पटाखों के प्रदूषण से मुश्किलें और बढ़ सकती है। इस बारे में गुरुवार को एनजीटी यानी राष्ट्रीय हरित अधिकरण को भी सूचित किया गया।
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वायु प्रदूषण (File Photo) - फोटो : PTI
पटाखों पर प्रतिबंध से जुड़े एक मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता राज पंजवानी और वकील शिबानी घोष को एनजीटी का सहयोग करने के लिए न्याय मित्र नियुक्त किया गया है। दोनों अधिवक्ता ने गुरुवार को एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि पार्टिकुलेट वायु प्रदूषण के कारण पूरी दुनिया में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 15 फीसदी है। उन्होंने कहा, "वायु प्रदूषण और कोविड-19 संक्रमण से मौत के खतरे को लेकर हालिया शोध से पता चलता है कि कोरोना से मृत्यु के बढ़े खतरे में वायु प्रदूषण एक महत्वपूर्ण कारक है।"
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दिल्ली में वायु प्रदूषण (File Photo) - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा, "अध्ययन में यह भी कहा गया है कि कोविड-19 के प्रसार पर नियंत्रण के लिए वायु प्रदूषण कम करने की खातिर निष्कर्ष को समन्वित महत्वाकांक्षी नीतियां बनाने में ज्यादा प्रेरक होना चाहिए। अध्ययन का आकलन है कि पार्टिकुलेट वायु प्रदूषण पूरी दुनिया में कोविड-19 के कारण मृत्यु में 15 फीसदी का योगदान करता है।"

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air pollution - फोटो : Social media
दोनों वकीलों ने आंद्रे पोजर और अन्य के अध्ययन ‘रिजनल एंड ग्लोबल कंट्रीब्यूशंस ऑफ एयर पॉल्यूशन टू रिस्क ऑफ डेथ फ्रॉम कोविड-19’ का हवाला दिया। उन्होंने सभी तरह के पटाखा की बिक्री पर किसी भी प्राधिकार द्वारा किसी भी तरह का लाइसेंस देने पर रोक लगाने की मांग की। ‘इंडियन फायरवर्क्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन’ की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का विरोध किया और कहा कि इस पर कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं है और मामला पहले ही उच्चतम न्यायालय में है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से पेश हुए वकील बालेंदु शेखर ने एनजीटी से कहा कि कोविड-19 के कारण मृत्यु दर में वायु प्रदूषण की भागीदार पर कोई स्पष्ट निष्कर्ष नहीं है और इस मुद्दे पर उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को पत्र लिखकर उनके विचार मांगे हैं। एनजीटी ने फैसला सुरक्षित रख लिया और कहा कि नौ नवंबर को इसे वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
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